कैबिनेट में 5 नए चेहरों के जरिए मिला बड़ा संदेश | Cabinet Minister | CM Dhami | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में आज बड़ा दिन रहा, धामी सरकार ने कैबिनेट का विस्तार करते हुए पांच नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर दिया है। खास बात ये है कि इस विस्तार में सिर्फ चेहरे नहीं बदले, बल्कि साफ तौर पर जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश भी नजर आ रही है। ठाकुर, ब्राह्मण, पंजाबी और अनुसूचित जाति— क्या हर वर्ग को साधने की रणनीति के साथ बीजेपी ने चुनावी साल में बड़ा संदेश देने की कोशिश कर रही है आखिर कौन मंत्री किस समाज से आता है और इन नए कैबिनेट चेहरों से क्या बनेगा सियासी गणित। दोस्तो उत्तराखंड की धामी सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ है। धामी मंत्रिमंडल में पांच नए मंत्रियों की एंट्री हुई है। पांच विधायकों यानी खजान दास, प्रदीप बत्रा, मदन कौशिक, राम सिंह कैड़ा, भरत चौधरी को कैबिनेट में जगह मिली है। धामी सरकार ने इस कैबिनेट विस्तार से जातीय गणित को साधने की कोशिश की है। ये मै इसलिए कह रहा हूं क्योंकि कैबिनेट में एक विधायक अनुसूचित जाति का है, तो वहीं एक ब्राहम्ण विधायक है। इसके अलावा एक पंजाबी विधायक और दो ठाकुर विधायक को मंत्री बनाया गया है। दोस्तो धामी सरकार के कैबिनेट का विस्तार हुआ है। पांच विधायकों यानी राजपुर सीट से विधायक खजान दास, रुड़की विधानसभा से विधायक प्रदीप बत्रा, हरिद्वार से पांच बार के विधायक मदन कौशिक, नैनीताल के भीमताल सीट से विधायक राम सिंह कैड़ा, रुद्रप्रयाग सीट से विधायक भरत चौधरी को कैबिनेट में जगह मिली है। सबसे बात खजान दास की देहरादून जिले की राजपुर सीट से विधायक खजान दास को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

बता दें कि वो राजपुर सीट से ही लगातार दो बार चुनाव जीते है। सरकार में खजान दास भुवन खंडूरी शिक्षा राज्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने साल 2007 में टिहरी जिले से भी चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने संगठन में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान की वात करें तो खजान दास पार्टी के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे हैं। दोस्तो इसके बाद दूसरे विधायक की जो मंत्री बने हैं, यहां कहूं कि एक बार फिर वो मंत्री बने हैं। वो नाम है मदन कौशिक का दोस्तो मदन कौशिक ब्राह्मण समाज से आते है। वो बीजेपी के बड़ा ब्राहम्ण चेहरों में गिने जाते हैं। हरिद्वार से मदन कौशिक पांच बार के विधायक रह चुके हैं। आपको बता दें कि वो पूर्व मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान की बात करें तो वो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। मदन कौशिक ने साल 2003 में पहली बार हरिद्वार से चुनाव जीता था। तब से वो लगातार हरिद्वार से विधायक हैं। दोस्तो हरिद्वार से आते हैं मदन कौशिक, उधर रुड़की से हैं अगले विधायक जो मंत्री बने हैं उनके बारे में भी जान लीजिए प्रदीप बत्रा। दोस्तो, रुड़की विधानसभा से विधायक प्रदीप बत्रा पंजाबी समाज से आते हैं। वो रुड़की से तीन बार विधायक रहे चुके है। आपको बता दें कि हरीश रावत सरकार के समय कांग्रेस के कुछ विधायकों ने बगावत कर बीजेपी का हाथ थामा था। इन विधायकों में प्रदीप बत्रा भी शामिल हैं।

ये तो मैदानी क्षेत्र की बात हो गई, अब थोड़ा कुमाउं की तरफ रुख करता हूं। यहां से जो नाम कैबिनेट का हिस्सा बना वो नाम है राम सिंह कैड़ा, दोस्तो राम सिंह कैड़ा नैनीताल के भीमताल सीट से विधायक है। वो ठाकुर समाज से आते है। इस सीट से वो दो बार विधायक रह चुके है। बीजेपी के टिकट से वो पहली बार विधायक बने हैं। इससे पहले साल 2017 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे। जिसमें उन्होंने भीगताल से जीत हासिल की थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की। काफी लंबे समय तक साम सिंह कैड़ा कांग्रेस से भी जुडे़ रहे। दोस्तो हरिद्वार रुड़की देहरादून नैनीताल के बात पहाड़ की इन पांच चेहरों में पहाड़ का एक मात्र चेहर दिखा तो वो है भरत चौधरी। दोस्तो रुद्रप्रयाग सीट से विधायक भरत चौधरी भी ठाकुर समाज से आते है। इस सीट से वो दो बार पार्टी के विधायक रहे हैं। आपको बता दें कि राजनीति में भरत चार दशकों से हैं। मंत्रीमंडल में भरत चौधरी को शामिल कर बीजेपी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने का मैसेज दिया है। आपको बता दें कि आज संस्कृत में उन्होंने शपथ ली। दोस्तो भरत चौधरी को लेकर बीते वक्त में बहुत कुछ देखने को मिला था। विवाद इनके बयान से हुआ था। जहां इन्होंने कह दिया था कि मै आपके वोट से विधायक नहीं बना हूं। जो करना हो कर लेना, लेकिन अब कैबिनेट का हिस्सा है तो दोस्तों, ये थे धामी सरकार के नए कैबिनेट मंत्रियों के नाम और उनकी पृष्ठभूमि। अनुभव और नई उम्मीदों के साथ इन पांच नेताओं को मिली जनता की सेवा की बड़ी जिम्मेदारी, देखा जाए तो इस मंत्रिमंडल विस्तार में सिर्फ नए चेहरे ही नहीं आए, बल्कि समाज और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए चुनावी साल में बीजेपी ने सियासी संदेश भी भेजा है। अब सवाल ये है कि ये नए चेहरे अपने-अपने क्षेत्रों में कितनी सक्रियता दिखाते हैं और सरकार की विकास योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में कितना असरदार साबित होंगे।