उत्तराखंड के पहाड़ों में बर्फबारी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है, वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में हो रहे इस बदलाव का असर न सिर्फ धामों की यात्रा पर पड़ रहा है, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और पर्यावरण पर भी दिखाई दे रहा है। भारी बर्फबारी के बाद गर्मी का सीजन क्यों लंबा हो रहा है और सर्दियों का समय क्यों छोटा होता जा रहा है—इस रिपोर्ट मै बतउंगा इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण, दोस्तो उत्तराखंड मैसम सिर्फ चौका ही नहीं रहा है बल्की मौसम के बदलते पैटर्न से हमारी आपकी जिंदगी भी बदलती आने वाले वक्त में दिखेगी क्या। दोस्तो उत्तराखंड में एक बार फिर से मौसम ने करवट ली है। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है। अभी मार्च का महीना चल रहा है और दूसरी बार है कि उत्तराखंड की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अच्छी खासी बर्फ गिरी है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में 19 मार्च 2026 की सुबह बर्फबारी हुई, जिससे एक बार फिर कड़ाके की ठंड लौट आई है। मौसम विभाग ने पहले ही राज्य में बदलाव की संभावना जताई थी। दोस्तो उत्तराखंड में मार्च के महीने में दूसरी बार गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, पिथौरागढ़, मुनस्यारी, औली, हरसिल जैसे कई ऐसे ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं जहां पर दूसरी बार बर्फ गिरी है। इसके अलावा उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि और बारिश हुई है। कई जगह पर ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है तो तेज हवाओं ने बागवानी फसलों को नुकसान किया है। वैसे तो मौसम विभाग मार्च के महीने में होने वाली बारिश और बर्फबारी को सामान्य घटना बता रहे हैं, लेकिन अक्सर मार्च के महीने में जबरदस्त तापमान बढ़ता रहा है।
दोस्तो लोगों को अच्छी खासी गर्मी का एहसास होता रहा है, लेकिन मार्च के महीने में लगातार दो बार मौसम में हुए बदलाव ने लोगों को एक बार फिर से ठंड का एहसास दिला दिया है। यही वजह है कि लोगों ने अपने सर्दियों के कपड़ों को पैक कर रख दिया था। देहरादून में या फिर उत्तराखंड के कई क्षेत्र में लोग अपनी स्वेटर जैकेट दोबारा निकाल कर सड़कों पर घूमते हुए दिख रहे हैं। उत्तराखंड में चाहे यमुनोत्री हो या गंगोत्री या फिर बद्रीनाथ या फिर केदारनाथ सब जगह जमकर बर्फबारी हुई है। 19 मार्च 2026 की सुबह से लगातार बर्फबारी जारी है। पिछले कई दिनों से मौसम का यही मिजाज बना हुआ है, जिससे धामों बर्फ की चादर में ढका हुआ है। लगातार हो रही बर्फबारी का असर अब चारों धाम में यात्रा की तैयारियों पर भी साफ नजर आने लगा है। भारी बर्फ के चलते व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में दिक्कतें सामने आ रही हैं. मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल बर्फबारी थमने के आसार कम हैं। जिस तरह से मौसम का रुख बना हुआ है, उससे आने वाले दिनों में भी बर्फबारी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में केदारनाथ बद्रीनाथ धाम यमुनोत्री धाम और केदारनाथ धाम की यात्रा की तैयारियों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। दोस्तो वैज्ञानिकों का कहना है कि मार्च के महीने में बारिश और बर्फबारी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिलती थी, लेकिन इस बार पूरे क्षेत्र में बारिश मिल रही है और ऊपरी इलाकों में बर्फबारी जनवरी का महीना ज्यादा कुछ खास नहीं गया था, लेकिन मार्च के महीने में हो रही बर्फबारी से हिमालय के लिए ग्लेशियरों के लिए अच्छी खबर है। दोस्तो साल 2025 में भी मार्च के महीने से हल्की बारिश और बर्फबारी का सिलसिला लगातार जारी रहा। पिछले साल 2025 में 10 से 15 दिन की ही गर्मी का असर रहा और लगभग लगातार बारिश और बर्फबारी ही रही। दोस्तो मौसम विभा वाले भी मान रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का असर जरूर है, क्योंकि लगातार तापमान में वेरिएशन हो रहा है और मौसम में भी वेरिएशन आ रहा है। जो बर्फ और बारिश जनवरी-फरवरी के महीने में मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली है, लेकिन मार्च के महीने में हो रही बारिश और बर्फबारी काफी हद तक जो स्पेल खाली गया था उसको भर रही है। वहीं, दोस्ोत वाडिया इंस्टिट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक ग्लेशियर एक्सपर्ट कहते हैं कि गर्मियां का सीजन बड़ा हो रहा है जबकि सर्दियों का सीजन छोटा हो रहा है. बारिश भी 4000 मीटर तक हो रही है। यह सब बढ़ते तापमान और ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहा है। डॉ डोभाल के मुताबिक ना तो समय पर गर्मियां हो रही है, ना ही समय पर सर्दियों पड़ रही है। इसकी वजह से सर्दियों में पढ़ने वाली बर्फ ठीक से ऊपरी क्षेत्रों में खासकर ग्लेशियर क्षेत्र में नहीं जम रही है। तो दोस्तो, उत्तराखंड में मौसम का यह बदलता पैटर्न सिर्फ धामों की यात्रा ही नहीं प्रभावित कर रहा है, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी और हिमालय के ग्लेशियरों पर भी असर डाल रहा है। भले ही बर्फबारी और बारिश से कुछ राहत मिली हो, लेकिन वैज्ञानिकों की चेतावनी साफ है—ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम में अनिश्चितता बढ़ रही है। गर्मियों का समय लंबा हो रहा है, सर्दियों का छोटा, और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फ ठीक से जम नहीं रही, इसलिए आने वाले समय में यात्रा और पर्यावरण दोनों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।