बच्चों के विवाद में सड़कों पर चले लाठी-डंडे | Uttarakhand News

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उत्तराखंड से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बच्चों के छोटे से झगड़े ने ऐसा तूल पकड़ा कि बड़ों की एंट्री होते ही मामला सड़क पर जंग में बदल गया। कहासुनी से शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में लाठी-डंडों और फावड़ों तक पहुंच गया।बच्चों की नोक-झोंक को सुलझाने की जगह, बड़ों ने हालात और बिगाड़ दिए और फिर जो हुआ, वो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देगा।आखिर बच्चों के झगड़े में क्यों भड़की इतनी हिंसा? कौन थे वो लोग, जिन्होंने कानून हाथ में ले लिया? और अब प्रशासन क्या कार्रवाई करने जा रहा है? रुड़की एक तस्वीर ने बिचलित कर दिया जब दोसोत बच्चों के बीच पबजी खेलने को लेकर हुआ मामूली विवाद अब बड़ों के बीच गंभीर हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। पुरानी रंजिश को लेकर हुए इस हमले में पिता-पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार करीब एक माह पूर्व जावेद के पुत्र और पड़ोस में रहने वाले एक युवक के पुत्र के बीच पबजी खेलने को लेकर कहासुनी हो गई थी। उस समय जावेद ने बीच-बचाव करते हुए दोनों बच्चों को समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया था। लेकिन बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर मन में रंजिश पनपती रही। आरोप है कि बीती देर शाम उक्त युवक ने अपने परिजनों व साथियों के साथ मिलकर जावेद और उनके परिजनों पर अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और फावड़े से जानलेवा हमला किया, जिसमें जावेद पुत्र इरफान तथा जुनैद पुत्र जावेद गंभीर रूप से घायल हो गए। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना के बाद परिजन घायलों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल रुड़की लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस हमलावरों की पहचान में जुटी हुई है। इस संबंध में एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन कर दिया गया है और जल्द ही सभी दोषियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्कता बरत रही है। रुड़की की इस घटना ने एक बार फिर हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छोटी-सी चिंगारी कैसे पूरे समाज को जला सकती है.. दोस्तो पबजी जैसे एक मोबाइल गेम को लेकर शुरू हुआ बच्चों का मामूली विवाद, अगर उसी वक्त पूरी तरह खत्म मान लिया जाता, तो शायद आज दो लोग जिंदगी और मौत से जूझ नहीं रहे होते। बच्चों की नासमझी को बड़ों की समझदारी से संभाला जाना चाहिए था, लेकिन यहां उल्टा हुआ—पुरानी रंजिश ने हिंसा का रूप ले लिया। लाठी-डंडे और फावड़े से हुआ हमला सिर्फ दो लोगों पर नहीं था, बल्कि कानून, सामाजिक जिम्मेदारी और इंसानियत पर हमला था। गली-मोहल्लों में इस तरह की हिंसा न केवल परिवारों को तबाह करती है, बल्कि पूरे इलाके की शांति और सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। हालांकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है, टीमें गठित कर दी गई हैं और आरोपियों की तलाश जारी है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है क्या हम छोटी बातों को समय रहते सुलझाना सीखेंगे? क्या बच्चों के झगड़ों में बड़ों को आग लगाने की बजाय पानी डालना नहीं चाहिए? दोस्तों, कानून अपना काम करेगा, दोषियों को सजा भी मिलेगी, लेकिन ऐसी घटनाएं हमें आईना दिखाती हैं कि गुस्सा, बदला और हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं होते। जरूरत है संयम, संवाद और समझदारी की।