बारिश-अंधेरे में जगी इंसानियत की किरण | CM | Almora News

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दोस्तो देश के बड़े शहर में सिस्टम के आखों के सामने खत्म हो गई थी जिंदगी वहीं देवभूमि में एक टैंकर चालक लोगों के साथ ऐसे मिल ऐसे रेस्क्यू को अंजाम दे डाला जिसे देख कर हर कोई ये कहने को मजूबर हो गया कि इंसानियत बड़े शहरों में मर चुकी है। अपनी देवभूमि में जिंदा है क्योंकि यहां जो इंसानियत की किरण देखने को मिली। उसने देश के बड़े नोएडा के पूरे सिस्टम पर जोर का तमाचा मार दिया वो कैसे बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो संवेदाना कहा और कैसे बनी हुई हैं और कहां पर मर चुकी हैं और कैसे ये बताने के लिए आया हूं पहले मै आपको दो तस्वीरें दिखा रहा हूं। दोस्तो आज मै आपको तुलनात्क स्थिति दिखाने के लिए आया हूं, क्योंकि कहीं इंसानियत मर गई तो कहीं कहीं इंसानों ने मौत के मुंहु से निकाल लिया। एक तरफ सिस्टम द्वारा मारा गया एक नवजवान होगा तो दूसरी वो इंसान जो बिना सिस्टम की मदद के बचा लिया गया। दोस्तो पहली तस्वीर ये ये जो देख रहे हैं ये नोएडा के सेक्टर 150 में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज महतो की दर्दनाक मौत ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। यह घटना 16-17 जनवरी 2026 की रात हुई, जब घने कोहरे में उनकी कार गहरे पानी भरे गड्ढे में गिर गई।

युवराज करीब 90 मिनट तक पानी में डूबते-उतराते जिंदगी-मौत से जूझते रहे और “पापा मुझे बचा लो” चिल्लाते रहे, लेकिन बचाव में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना और दम घुटना बताया गया। इस केस में बिल्डरों की लापरवाही, पुलिस-प्रशासन की सुस्ती और खासकर गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेघा रूपम पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं लेकिन एक और तस्वीर जो अपनी देवभीमि मे देखने को मिली वो देखिए। जी हां दोस्तो, देवभूमि उत्तराखंड में सबकी उम्मीदें फिर से जगी हैं। बारिश और अंधेरे में, जब एक बाइक सवार गहरी खाई में गिर गया, तब लोगों ने सिर्फ देखा नहीं, बल्कि खुद आगे बढ़कर उसे बचाया। टैंकर चालक और राहगीरों की इस इंसानियत ने साबित कर दिया कि अभी भी हमारे समाज में अच्छाई बाकी है। दोस्तो कई बार सोशल मीडिया पर यही सुनने को मिलता है कि इंसानियत खत्म हो गई है।लेकिन कभी कभी उसी भीड़ में इंसानियत की एक किरण जल उठती है अब देखिए ना एक तरफ नोएडा के उस पूरे सिस्टम को उस पानी के तालाब जाने डर लग रहा था। जहां एक युवा फंसा था जो मुझे बचालो बचालों करके मर गया। सिस्टम तमासबीन बना रहा। वहीं दूसरी ओर शाम करीब 8 बजे, अल्मोड़ा से टनकपुर की ओर जा रहा एक बाइक सवार लोहाघाट घाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाराकोट (चंपावत) के खोलका के पास बाइक फिसलने से गहरी खाई में जा गिरा। बारिश, अंधेरा और क्षतिग्रस्त सड़क वजह बनी। लेकिन देखो वो कहते हैं ना इंसानियत सबसे बड़ी चीज है वो जिंदा होनी चाहिए।

दोस्तो एक कैंटर चालक ने सड़क किनारे गिरी बाइक देखी, रुककर नीचे झांका तो घायल युवक खाई में पड़ा मिला। इसके बाद हाईवे से गुजर रहे वाहन चालकों और युवाओं ने बिना देर किए रस्सी की मदद से भारी बारिश और अंधेरे के बीच रेस्क्यू कर युवक को बाहर निकाला। घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। तो एक ये लोग हैं जो ना किसी सिस्टम का हिस्सा है ना किसी सरकार प्रशासन का इन लोगों ने एक इंसान की जिंदगी जाने से बचा लिया तो नही दूसरी तरफ नोएडा में क्या हुआ था। 16 जनवरी की रात युवराज अपनी एसयूवी चला रहे थे। सेक्टर 150 टी-पॉइंट के पास निर्माणाधीन प्लॉट में बेसमेंट के लिए खोदा गया गड्ढा पानी से भरा था। कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं था। घने कोहरे के कारण कार सीधे नाले में गिर गई। युवराज कार से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन पानी धिरे-धिरे उनकी कार को डूबाता गया। पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रभावी बचाव नहीं हुआ। शव रविवार सुबह निकाला गया, जबकि कार चार दिन बाद (20 जनवरी को) NDRF की मदद से बाहर निकाली गई। तो दोस्तो मै क्या वैसा तो पूरा देश कह रहा है कि युवराज को सिस्टम ने मार दिया। जी हां सिस्टम ने मार दिया तमाम बचाव का सामन और ट्रेनिग होने के बावजूद युवराज की जान नहीं बचाई गई, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ पर बिना किसी ट्रेनिंग बिना की साजो सामान के एक सख्स का रैस्क्यू आप लोगों ने कर दिया। बड़ी बिडम्बना है अपने देश की तो दोस्तो ये दोनों रेस्क्यू चर्चा में हैं। एक सवाल तमाम हैं तो दूसरे लोग सरहना कर रहे हैं।

रेस्क्यू का वीडियो वायरल हो रहा है, लेकिन असल बात यह है कि आज किसी ने कहा नहीं, करके दिखाया और यही इंसानियत है, जो कभी कभी उम्मीद बचाए रखती है तो सिस्टम तो वैसे ही मारा ही हुआ है तो तबी तो नोएडा में युवराज को मरने दिया गया, लेकिन इंसान इंसान की पहचान को अभी भूला नहीं। उसका नतीजा है ये वीडियो। दोस्तों, आज हमने समाज की दो बहुत ही अलग-अलग हकीकतें देखीं। एक तरफ नोएडा में युवराज महतो की दुखद मौत, जहां तमाम सिस्टम, ट्रेनिंग और संसाधनों के बावजूद एक युवा की जान बचाई नहीं जा सकी। वहीं दूसरी ओर, देवभूमि उत्तराखंड में जब एक बाइक सवार गहरी खाई में गिरा, तो आम लोग – एक टैंकर चालक और राहगीरों – की बहादुरी और इंसानियत ने उसे मौत के मुंह से बचा लिया। यह विरोधाभास हमें एक सच्चाई दिखाता है – कभी सिस्टम फेल हो सकता है, नियम फेल हो सकते हैं, संस्थाएं फेल हो सकती हैं। लेकिन इंसानियत, करुणा और हिम्मत अभी भी जीवित हैं। आज किसी ने सिर्फ देखा नहीं, बल्कि खुद आगे बढ़कर काम किया। और यही उम्मीद की किरण है, जो विश्वास बनाए रखती है, तो दोस्तों, जहां हम नोएडा में एक खोई हुई जान पर शोक मना रहे हैं, वहीं उत्तराखंड में बची हुई जिंदगी को भी सलाम करना चाहिए। आखिरकार, बड़ी चीज़ सिस्टम नहीं, बल्कि इंसानियत ही है, जो सबसे बड़ा फर्क ला सकती है।दोस्तो क्या कहेंगे आप इन दोनों तस्वीरों पर कमेंट कर बताइएगा शेरय कीडिएगा।