Harish Rawat की नाराजगी या रणनीति? | Dehradun | Congress | Uttarakhand News

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चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में हलचल मच गई है।पार्टी के एक बड़े नेता ने अचानक सियासी ब्रेक का ऐलान कर सबको चौंका दिया।अब वो सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आएंगे। क्या यह नाराजगी है या कोई रणनीति? मै बताउंगा आपको इसके पीछे की पूरी कहानी अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो एक तरफ कांग्रेस अपना कुनबा बढ़ा रही थी। बीजेपी के नेताओं को तोड़ दिल्ली में कार्यक्रम हो रहा था तो वहीं उत्तराखंड में इस बात का शोर था कि कांग्रेस के बड़े नेता। पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड हरीश रावत का अब राजनीति से पूरी तरह से किनारा करने वाले हैं। अगर हां तो फिर इसके पीछे कारण क्या है, क्योकि ये सवाल चुनाव ठीक पहले जन्म हैं. और खुद हरीश रावत ने इस ओर इशारा किया। दोस्तो उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने राजनीति से 15 दिनों के व्रत यानी अवकाश की घोषणा की। रावत ने यह फैसला तब लिया है जब भाजपा के कई नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं थी हालांकि हरीश रावत ने इसको अपनी 60 वर्षों की राजनीतिक यात्रा के बाद एक अर्जित अवकाश बताया है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उनकी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। इस दौरान वे राजनीतिक कार्यों से दूर रहकर मंदिरों में पूजा-अर्चना और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे, लेकिन क्या हरीश रावत सच में जो कारण बता रहे हैं वही कारण है या फिर कुछ और कांग्रेस अंदर चल रहा है।

आगे इस पर भी बात होगी लेकिन दोस्तो बीजेपी की उत्तराखंड इकाई के कुछ नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से ठीक पहले का ये फैसला पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की 15 दिन तक राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा को कांग्रेस से उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। दोस्तो हरीश रावत ने राजनीति से 15 दिन तक ‘व्रत’ रखने का ऐलान उस समय किया है कांग्रेस बीजेपी को डैंट दे रही थी और आगे की चुनावी रणनीति को धार दे रही थी। दोस्तो हरीश रावत ने एक बयान में कहा कि बिजली-पानी की दरें बढ़ाने के सरकार के इरादे के खिलाफ एक घंटे के मौन व्रत के बाद मैंने मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की आराधना की और शांत मन से अपने सार्वजनिक जीवन के 60 वर्षों की राजनीतिक यात्रा पर बहुत कुछ मनन किया। इतना ही नहीं हरीश रावत ने कहा कि मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि इन 60 वर्षों की अथक यात्रा के बाद मुझे एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में अर्जित अवकाश लेने का अधिकार प्राप्त हो गया है। मैं अर्जित अवकाश की पहली किश्त के रूप में 15 दिन तक राजनीतिक सोच और राजनीतिक कार्यों से व्रत रखूंगा। तो दोस्तो हरीश रावत सियासत नहीं करेंगे तो फिर क्या करेंगे..हरीश रावत ने कहा कि इस दौरान में मंदिरों में पूजा-अर्चना, कुछ ईद मिलन और मांगलिक समारोह में भाग लूंगा। मैं अपनी जीवन यात्रा के उन प्रसंगों और मोड़ों को उकेरने की कोशिश करूंगा जो समय के साथ बहुत नीचे कहीं चले गए हैं। दोस्तो कांग्रेस नेता हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। 2002-2009 तक लोकसभा सांसद रहे। वे उत्तराखंड के प्रमुख कांग्रेस नेता हैं और राज्य के विकास और 2013 की आपदा के बाद राहत कार्यों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या अब राजनीति को जल्द अलविदा कहने वाले हैं हरीश रावत