नन्हे गजराज की सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी!

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    https://youtu.be/XeZDHAipHSg?si=LSk_PXo6GzaEfCe-
    दोस्तों, खबरों की इस भीड़ में आज हम आपको एक ऐसी कहानी दिखाने जा रहे हैं, जो सुकून भी देगी और चेहरे पर मुस्कान भी ले आएगी।राजाजी टाइगर रिजर्व में इन दिनों जंगल नहीं, बल्कि ममता की तस्वीर नजर आ रही है। झुंड से बिछड़ा एक नन्हा सा हाथी, जो कभी जंगल में असहाय पड़ा मिला था, आज वन कर्मियों के दुलार में सुरक्षित है। बोतल से दूध पीता ये नन्हा गजराज अब न सिर्फ स्वस्थ हो रहा है, बल्कि पूरे हाथी बाड़े की जान बन चुका है। जहां इंसान और प्रकृति के रिश्ते की एक खूबसूरत मिसाल देखने को मिल रही है। राजाजी टाइगर रिजर्व के हाथी बाड़े में इन दिनों एक नन्हा मेहमान वन महकमे और पार्क प्रशासन की आंख का तारा बना हुआ है। झुंड से बिछड़ गए इस नन्हे गजराज की खूब देखभाल की जा रही है। धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा नन्हा हाथी अब पूरे परिसर में अठखेलियां करता नजर आ रहा है। जी हां दोस्तो एक सुबह। हरिद्वार के श्यामपुर फॉरेस्ट रेंज के खारा इलाके में वनकर्मी रोज़ की तरह गश्त पर निकले थे। जंगल की खामोशी के बीच अचानक उन्हें कुछ अलग सा महसूस हुआ। थोड़ी दूर जाने पर जो दृश्य सामने आया, उसने सभी को भावुक कर दिया। घास के बीच एक नवजात हाथी का शावक अकेला, असहाय और अपनी मां को पुकारता हुआ। वनकर्मियों ने तुरंत अधिकारियों को सूचना दी।

मौके पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और डॉक्टर पहुंचे। नन्हा हाथी बेहद कमजोर था और उसके आसपास झुंड का कोई निशान नहीं मिल रहा था। दोस्तो घंटों तक आसपास के जंगल में झुंड की तलाश की गई, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली, तब एक बड़ा फैसला लिया गया। नन्हे गजराज को सुरक्षित राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज स्थित हाथी बाड़े में शिफ्ट किया गया। यह फैसला उसके जीवन को बचाने के लिए बेहद ज़रूरी था। दोस्तो हाथी का शावक बहुत छोटा था और अपने आप जंगल में जीवित रह पाना उसके लिए मुश्किल था। इसलिए हमने उसे हाथी बाड़े में रखने का निर्णय लिया, जहां उसकी लगातार निगरानी की जा रही है। जी हां दोस्तो यहां हाथी बाड़े में पहुंचते ही नन्हे गजराज को नया संसार मिल गया। यहां उसे बोतल से दूध पिलाया जा रहा है, समय पर दवाइयां दी जा रही हैं और चौबीसों घंटे देखभाल की जा रही है।धीरे-धीरे उसका डर कम हुआ और अब वो वन कर्मियों के साथ घुलने-मिलने लगा है दोस्तो कभी सूंड से खेलना कभी इधर-उधर दौड़ लगाना और कभी वन कर्मियों के पीछे-पीछे चल देना नन्हा गजराज अब पूरे परिसर में अपनी मासूम अठखेलियों से सबका दिल जीत रहा है।

जी हां इसका वजन लगातार बढ़ रहा है, जो इसके स्वस्थ होने का संकेत है। यह अब एक्टिव है और लोगों के साथ घुलने-मिलने लगा है। दोस्तो वन विभाग के लिए यह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी है।हाथी सामाजिक जानवर होते हैं और अपने झुंड के बिना रहना उनके लिए आसान नहीं होता। इसीलिए अधिकारी अब उसके मूल झुंड को खोजने में जुटे हुए हैं, ताकि उसे वापस प्राकृतिक माहौल में छोड़ा जा सके। दोस्तो अधिकारियों के लिए यह अब भी एक रहस्य है कि आखिर किन परिस्थितियों में यह नन्हा नर हाथी अपने झुंड से बिछड़ गया। क्योंकि आमतौर पर हाथी अपने बच्चों को कभी अकेला नहीं छोड़ते। लेकिन जब तक झुंड नहीं मिलता, तब तक यह नन्हा गजराज वन विभाग के संरक्षण में सुरक्षित रहेगा। दोस्तों, ये कहानी सिर्फ एक नन्हे हाथी की नहीं ये कहानी है इंसानियत की, संवेदनशीलता की और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी की। जहां अक्सर जंगलों को खतरे की खबरें आती हैं, वहीं राजाजी टाइगर रिजर्व से आई यह खबर उम्मीद जगाती है। उम्मीद कि यह नन्हा गजराज जल्द ही अपने परिवार से मिलेगा और जंगल में फिर से गूंजेगी उसकी खुशियों की आवाज़।