देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कानून-व्यवस्था का आलम अब सीधे जनता और राजनीति की सुर्खियों में आ गया है। कांग्रेस ने सिर्फ शब्दों में ही नहीं, बल्कि कार्रवाई करते हुए पुलिस मुख्यालय को घेर लिया और राज्य में बढ़ते अपराध के खिलाफ सख्त ऐलान कर दिया। अब इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है और सवाल उठ रहे हैं—क्या सरकार अपराधियों के बढ़ते हौसलों के बीच अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है? इस शहर की सड़कों पर गूंजती गोलियों और जनता के भय के बीच राजनीतिक तूफान अब पूरे प्रदेश की निगाहें खींच रहा है। दोस्तो आपको कानून व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच अब उस सियासी शोर को दिखाना चाहता हूं जहां एक नहीं दो दो इस्तेफे की मांग उठने लगी है। दोस्तो ये गुस्सा है पुलिस के खिलाफ पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ और ये वैसे हो भी क्यों ना हांलांकि कांग्रेस के बड़े बूढ़े लोग इस फ्रेम से अपने आप को दूर रख हुए हैं। पता नहीं क्यों ऐसे ये कांग्रेस वाले सत्ता में आने का सपना देख रहे हैं। जहां राजधानी में होती एक के बाद एक हत्याओं पर कांग्रेस का जो रिएक्शन आना चाहिए जमीन पर चुनाव जीतने या फिर जनता की सुरक्षा का सवाल करने के लिए वो तो लगता है अपने अपने चुनावी क्षेत्रों में व्यस्त है, लेकिन हां कांग्रेस के युवाओं ने सवाल किया है पुलिस से कि आखिर ये क्यों हो रहा है। इसी लिए तो ये हंगामा और बयान है। चलिए जनता इनको देख कर ये आभास कर सकती है कि विपक्ष जनता का परहरी है। इससे इतर दोस्तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता भी बोले कहते दिखाई दिए कि देहरादून राजधानी के अंदर जिस तरीके से परसों भी और आज भी दो कत्ल हुए हैं, उसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ, भर्त्सना करता हूँ। दोस्तो पिछले 15 दिनों की अवधि में 5 मर्डर राजधानी देहरादून में हुए हैं। हल्द्वानी में भी एक युवक और युवती की निर्मम तरीके से हत्या की गई है। हालात बहुत गम्भीर हैं, सरकार को इन तमाम चीजों से कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर आगामी 16 फरवरी को राजभवन घेराव के माध्यम से सरकार को घेरने का कार्य कर रही है। कुम्भकर्ण की नींद में सोई सरकार अगर नही जागेगी तो कांग्रेस आगे भी सरकार के खिलाफ संघर्ष करने का कार्य करेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री जी में अगर जरा भी नैतिकता बची हुई है तो उन्हें तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए।
इसके अलावा एक और बयान या फिर आक्रोश देखने को मिला कांग्रेस की तरफ से वो भी कहते हैं देवभूमि उत्तराखंड की शांति और सुरक्षा पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। दोस्तो करन माहरा कहते हैं कि प्रदेश में बढ़ते अपराध और आए दिन हो रही हत्याएं साफ संकेत हैं कि कानून-व्यवस्था कमजोर पड़ी है। जिस सरकार ने “सुरक्षित उत्तराखंड” का वादा किया था, वही आज जवाब देने से बचती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री अभी भी खुद को “धाकड़” कहलाने में बिल्कुल नहीं शरमा रहे हैं और जमीन पर जनता डर और असुरक्षा का माहौल महसूस कर रही है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और सत्ता की छत्रछाया उन्हें खुली छूट दे रही है। देवभूमि को विकास और शांति चाहिए, ना कि जंगलराज दोस्तो वैसे बीते दिनों में जो कुछ देखने को मिला है उसकी व्यख्या लोग करने लगे अपने-अपने तरीके से सीपीआई एमएल के इंद्रेश मैखुरी भी कई सवाल खड़े किये हैं। दोस्तो, राजधानी देहरादून से लेकर हल्द्वानी तक जिस तरह से आपराधिक घटनाओं ने रफ्तार पकड़ी है, उसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जहां सड़कों पर उतरकर सरकार को घेरने की बात कर रही है, वहीं उसके युवा संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया ने सीधे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है, तो प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा सरकार पर “जंगलराज” का आरोप लगा रहे हैं। वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के इंद्रेश मैखुरी ने भी कानून व्यवस्था को लेकर कई तीखे प्रश्न खड़े किए हैं।अब बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई प्रदेश में हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं, या फिर यह सियासी संघर्ष का एक नया अध्याय है? क्या सरकार विपक्ष के आरोपों का ठोस जवाब दे पाएगी, या फिर इस्तीफे की मांग और तेज होगी? जनता जवाब चाहती है—सुरक्षा पर भरोसा चाहती है। देखना होगा कि सत्ता जागती है या सियासत और गरमाती है। फिलहाल इतना ही, बने रहिए हमारे साथ।