उत्तराखंड की राजनीति में आज गैरसैंण से उठी बहस पूरे प्रदेश में गूंज रही है। विधानसभा में अल्पसंख्यक, मदरसा और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर तीखी सियासत देखने को मिली। सवाल उठ रहा है कि क्या ये बहस सिर्फ आज की राजनीति है या फिर 2027 के चुनाव की बड़ी पिच तैयार की जा रही है? कैसे बीजेपी ने बना लिया नया चुनाव प्लान। Uttarakhand Budget Session 2026 कैसे सदन में दिखी उसकी झलक बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो गैरसैंण की विधानसभा में पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल गरमा गया है और राजनीतिक संकेत दूर तक जाते दिख रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है—क्या 2027 का चुनावी रण अभी से सजाया जा रहा है, और आखिर यह सियासी समीकरण किसके लिए आसान होगा? दोस्तो उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा सत्र में पिछले कुछ दिनों के भीतर कई ऐसे बयान सामने आए हैं, जिनसे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच कुछ ऐसे मुद्दे भी उभर कर सामने आए हैं, जिन्हें लेकर ये सवाल उठने लगा है कि क्या बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति अभी से तय कर रही है। कुछ ऐसे बयान हैं, जो इस बात की ओर बड़ा इशारा करते हैं। दोस्तो .सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान से लेकर बीजेपी विधायक शिव अरोड़ा द्वारा जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग तक कई ऐसी बातें सामने आईं जिनका सीधा संबंध राज्य की राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़ा जा रहा है।
दरअसल दोस्तो विधानसभा सत्र के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय, मदरसा और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दे जोर शोर से उठे। जी हां दोस्दो जहां कांग्रेस तमाम मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर दिख रही थी वहीं बीजेपी के नेता उन सवालों का जवाब भी उसी आक्रामक अंदाज में देते दिखाई दिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बहसों के जरिए राज्य की राजनीति में एक खास तरह का मैदान तैयार किया जा रहा है जो भविष्य में चुनावी मुद्दों का आधार बन सकता है, लेकिन कैसे विधायन सभा में कांग्रेस पर बरसे मुख्यमंत्री धामी वो तो आप देख ही चुके हैं। इतना भर नहीं था विधानसभा में जब मुख्यमंत्री सीएम पुष्कर सिंह धामी बोलने के लिए खड़े हुए, तो उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोला. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से अल्पसंख्यक समुदाय को केवल राजनीति का साधन समझा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक समाज एक टूलकिट की तरह रहा है, जिसका इस्तेमाल केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए किया गया। जी हां दोस्तो मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य किसी भी समुदाय को राजनीति का साधन बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले और समाज आगे बढ़े। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार किसी को टूलकिट नहीं बल्कि अच्छी किताबें देना चाहती है, ताकि नई पीढ़ी बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सके हालांकि इसके बाद मुख्यमंत्री का बयान और भी ज्यादा चर्चा में आ गया जब उन्होंने मदरसों और मस्जिदों से जुड़ा मुद्दा उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष यह आरोप लगाता है कि उन्हें मदरसों और मस्जिदों से दिक्कत है, लेकिन उनका स्पष्ट कहना है कि यदि किसी भी संस्थान की आड़ में राष्ट्र विरोधी गतिविधियां होती हैं तो सरकार उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। इधर मुख्यंमंत्री तमाम मुद्दों का जिक्र किया तो उधर इसी बीच रुद्रपुर से बीजेपी विधायक शिव अरोड़ा ने भी सदन में एक और बड़ा मुद्दा उठा दिया। उन्होंने राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग करते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की दिशा में कदम उठा रही है, उसी तरह जनसंख्या नियंत्रण पर भी सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। दोस्तों, गैरसैंण की विधानसभा से उठी इस बहस ने अब प्रदेश की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। अल्पसंख्यक, मदरसा और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर जिस तरह से सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में ये मुद्दे उत्तराखंड की राजनीति में और ज्यादा चर्चा का विषय बनने वाले हैं।अब सवाल यही है कि क्या ये सिर्फ सदन की बहस है या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव का शुरुआती संकेत? क्या बीजेपी इन मुद्दों के सहारे नया चुनावी नैरेटिव तैयार कर रही है, या फिर विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगा?