दोस्तो, कहावत है ना—”जहाँ चाह वहाँ राह”। और आज मै अपनी इस रिपोर्ट के जरिए आपको मिलवाने जा रहा हूं। उत्तराखंड की उस बेटी से, जिसने अपनी मेहनत और हौसले से इतिहास रच दिया। पति की एक मजाकिया टिप्पणी ने Pratibha को प्रेरित किया, और आज वह बन गई हैं प्रदेश की पहली महिला बॉडी बिल्डर। पत्नी, मां, बेटी और बहू—हर फर्ज निभाने के बीच भी प्रतिभा ने अपनी ताकत और दृढ़ता से साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उनकी इस प्रेरक यात्रा के बारे में, जो देख कर आप भी कह उठेंगे—“वाह, प्रतिभा!” दोस्तो कहते हैं मजबूत इरादें, लगन और मेहनत बड़ी से बड़ी चुनौती को पीछे छोड़, एक न एक दिन सफलता जरूर आपका दामन चूमती है और इसी की मिसाल है दो बच्चों की मां प्रतिभा। जिन्होंने थायराइड जैसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर के परामर्श से वैट कम करने के लिए जिम ज्वाइन किया था. जिसके बाद अब वह उत्तराखंड की पहली महिला बॉडी बिल्डर बन गई है।
उत्तराखंड के पौड़ी के यमकेश्वर ब्लॉक की मूल निवासी प्रतिभा थपलियाल उत्तराखंड की पहली महिला बॉडी बिल्डर हैं और इस साल 6 से 12 सितंबर तक नेपाल की राजधानी काठमांडू और 30 अक्टूबर से 6 नवंबर तक साउथ कोरिया में होने वाली एशिया और वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप के लिए पूरे देश से एकमात्र प्रतिभा थपलियाल का ही चयन हुआ है। जिसमें की वह भारत का प्रतिनिधित्व किया, फिर इंडियन बॉडी बिल्डर्स फेडरेशन की ओर से आयोजित ट्रायल में प्रतिभा को चुना गया। दोस्तो इससे पहले भी उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रतिभा कहती है कि एशिया और वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में प्रतिभाग करना उनका सपना था। वह दोनों प्रतियोगिताओं में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं.दोस्तो प्रतिभा दो बच्चों की मां हैं। उन्होंने जिस मेहनत और जज्बे के बूते सिर्फ कुछ ही समय में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कामयाबी पाई, वह समाज की हर एक बेटी, बहू के लिए मिसाल बन गई है। प्रतिभा की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश ऋषिकेश में हुई है उन्होंने हिंदी में एमए किया है। वह पढ़ाई के दौरान खेलों में भी सक्रिय रही हैं. इससे पहले वह वॉलीबॉल में बतौर कप्तान उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और पांच बार नॉर्थ जोन से खेल चुकी हैं. इसके अलावा वह चार बार क्रिकेट में भी ऑल इंडिया स्तर पर खेल चुकी हैं।
दोस्तो प्रतिभा के पति भूपेश बताते है कि प्रतिभा ने ऋषिकेश में स्कूलिंग के दौरान वॉलीबॉल प्रतियोगिता में भाग लिया था, वह क्रिकेट भी खेलती थी। साथ ही शादी से पहले प्रतिभा ने वॉलीबॉल स्टेट टीम की अगुवाई भी की थी। जब प्रतिभा ने जिम ज्वाइन किया तो उनकी मांसपेशियों में होने वाली बढ़ोतरी देखी तो मैने उन्हें बॉडी बिल्डिंग में किस्मत आजमाने की बात कही और वह मान भी गई। साथ ही भूपेश कहते है कि सिक्किम में प्रतिभा पोडियम फिनिश करने में नाकामयाब रहीं जिसके बाद उन्होंने स्ट्रिक्ट डायट फॉलो करते हुए काफी मशक्कत की और उसका की परिणाम था कि दूसरे ही इवेंट में वह गोल्ड मेडल ले आई। दोस्तो महिला सशक्तिकरण का जीता जागता एक और उदाहरण उत्तराखंड की बेटी प्रतिभा थपलियाल के रूप में सामने आया हैं। दो बच्चों की गृहणी मां प्रतिभा पिछले 3 वर्षों से बॉडी बिल्डिंग को अपना जुनून बनाकर न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बनाने की रेस में जुटी हैं। प्रतिभा थपलियाल ने बीते 6 माह पहले सिक्किम में आयोजित राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग महिला प्रतियोगिता में चौथा स्थान प्राप्त कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। प्रतिभा थपलियाल बताती हैं कि लगभग 3 वर्ष पहले उन्होंने बॉडी बिल्डिंग की शुरुआत सिर्फ अपने वजन को घटाने के लिए शुरू की थी। साधारण गृहणी होने के चलते 2 बच्चों की मां और पेइंग गेस्ट हाउस (PG) चलाने वाली प्रतिभा ने अपने पति की देखरेख में जिम जाना शुरू किया। उनके पति भी बॉडी बिल्डिंग का शौक रखते हैं। पति भूपेश थपलियाल की निगरानी में प्रतिभा जिम में घंटों पसीना बहाती हैं।
दोस्तो तीन साल के अथक प्रयास और मेहनत के बल पर प्रतिभा ने वो मुकाम हासिल किया है कि अब उनको राष्ट्रीय स्तर की बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के लिए जाना जाता है। प्रतिभा पिछले 6 माह से बॉडी बिल्डिंग की प्रतियोगिता में शामिल होती रहीं और बीते फरवरी माह 2022 को उन्होंने सिक्किम जाकर राष्ट्रीय स्तर की महिला बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने चौथा स्थान हालिया किया। दोस्तो वो कहती हैं कि उत्तराखंड की पहली महिला बॉडी बिल्डिंग में नाम कमाने वाली प्रतिभा थपलियाल के मुताबिक, पहाड़ की महिलाएं बहुत ही मजबूत होती हैं। ऐसे में उनका सभी महिलाओं को एक संदेश है कि वह अपने अपने शौक और सपनों को पूरा करने के लिए अपनी सामान्य जिंदगी के साथ-साथ कुछ समय निकालकर दृढ़ संकल्प से किसी भी क्षेत्र में मेहनत कर आगे बढ़ सकती हैं। प्रतिभा थपलियाल जैसी न जाने कितनी महिलाएं हैं, जिनके अंदर जिंदगी में कुछ कर गुजरने की तमन्ना है लेकिन किन्हीं कारणों से वे आगे नहीं बढ़ पाती हैं. बॉडी बिल्डिंग हो या कोई भी अन्य खेल का क्षेत्र आज सरकारों को प्रतिभा थपलियाल जैसी होनहार और मेहनती महिलाओं को इस तरह के खेल और प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ाने के लिए न सिर्फ आर्थिक मदद की दरकार है।
साथ ही उनको प्रोत्साहन देने की भी जरूरत है फिलहाल, बॉडी बिल्डिंग ने उत्तराखंड की पहली महिला के रूप में देश और दुनिया में नाम कमाने के लिए जी जान से मेहनत करने वाली प्रतिभा थपलियाल को राज्य सरकार खेल मंत्रालय से कोई मदद अब तक नहीं मिल सकी है। दोस्तो, प्रतिभा थपलियाल की कहानी सिर्फ एक महिला बॉडी बिल्डर की नहीं, बल्कि हिम्मत, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। थायराइड जैसी बीमारी से जूझते हुए, दो बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने जिम में पसीना बहाया और उत्तराखंड की पहली महिला बॉडी बिल्डर बनकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का नाम रोशन किया। प्रतीक्षा, संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने उन्हें वह मुकाम दिया, जो किसी भी महिला के लिए प्रेरणा बन सकता है। प्रतिभा की उपलब्धियों से यह साफ है कि महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर अपने सपनों को सच कर सकती हैं, बस जरूरत है समाज और सरकार की सही प्रोत्साहन और समर्थन की। दोस्तो, यही समय है कि हम उत्तराखंड जैसी मेहनती बेटियों को सही मंच और अवसर दें, ताकि वे न केवल देश का नाम रोशन करें, बल्कि महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बनें प्रतिभा थपलियाल की मेहनत और हौसले को सलाम!