Kotdwar में बवाल के बीच बड़ा खुलासा देख चौंक जाएंगे | Kotdwar News | Uttarakhand News

Spread the love

कोटद्वार जहां एक दुकान के नाम पर उठा विवाद अब कई परतों में खुलता जा रहा है।जिस जगह एक मुस्लिम दुकानदार की मदद को लेकर बवाल मचा, अब उसी इलाके से एक और चौंकाने वाला दावा सामने आ रहा है। Kotdwar Baba Controversy क्या मामला सिर्फ ‘दुकान के नाम’ तक सीमित था?या इसके पीछे कोई और कहानी छुपी है?क्या कोटद्वार में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के आरोप सही हैं?और अगर हां—तो ये अतिक्रमण किसने किया, कब किया और प्रशासन अब तक चुप क्यों रहा?क्या कोटद्वार में डेमोग्राफी बदलने की आशंका सिर्फ एक दावा है,या फिर इसके पीछे कोई ठोस सच्चाई छुपी है?आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे—दावों की हकीकत क्या है,कागज़ों में क्या दर्ज है। कोटद्वार में सरकारी भूमि पर अवैध मुस्लिम बस्तियां, लकड़ी पड़ाव-आम पड़ाव में कब्जे और यूपी से महिलाओं द्वारा उत्तराखंड जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप। डेमोग्राफी चेंज की आशंका, सियासी लोगों की भूमिका संदिग्ध। ये सब मै बताने के लिए आया हूं तो आप इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा कि कैसे कोटद्वारा में मुस्लिमों ने किया बड़ा खेल।

दोस्तो एक तरफ कोटद्वार में माहौल बिगड़ा मामला आप सब जानते भी है कि एक मुस्लिम ने अपनी दुकान का नाम बाबा रखा तो बवाल हो गया। उस मुस्लिम दुकानदार के साथ पूरा देश खड़ा होता दिखाई दिया कि ऐसा कोई गुनाह नहीं किया जिसकी सजा दी जाए। पुलिस ने भी कह दिया दुकान का नाम नहीं बदला जाएगा, लेकिन एक और खबर पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार शहर से आई उसको देखेंगे तो चौक जाएंगे। वो ये कि कोटद्वार में डेमोग्राफी चेंज की खबरें सामने आ रही हैं। इसमें सरकारी भूमि पर कब्जे कर बस्तियां बसाने में कांग्रेस के नेताओं के भूमिका संदिग्ध है। खास बात ये भी है। यूपी से आए मुस्लिम अपनी महिलाओं के प्रसव कोटद्वार में करवा कर जन्म प्रमाण पत्र उत्तराखंड के बनवा रहे और और उसके आधार पर भविष्य की डेमोग्राफी चेंज की रेखाएं खींची जा रही है। दोस्तो जानकारी के मुताबिक कोटद्वार में लकड़ी पड़ाव ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां नजीबाबाद बिजनौर अफजलगढ़ क्षेत्रों के मुस्लिम लोग योजनाबद्ध तरीके से सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बस गए है खास बात ये कि उन्हें कांग्रेस के नेताओं के राजनीतिक संरक्षण देकर बसाया। इसी तरह आम पड़ाव में भी मुस्लिम आबादी ने घुसपैठ की और सरकार की भूमि कब्जा ली।

अब यहां आपको बता दूं कि सरकारी महकमे को छकाने की नीति क्या है। दोस्तो जानकारी के मुताबिक इस सरकारी क्षेत्र को कब्जा कर उस पर हाईकोर्ट से स्टे ले लिया गया ताकि सरकारी महकमे के द्वारा इस मामले में खामोशी ओढ़ ली जाए। इधर दोस्तो सूत्र बताते हैं कि लकड़ी पड़ाव और आम पड़ाव में ऐसी घनी मुस्लिम आबादी है कि यहां जाने का साहस कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं करता। यहां फर्जी दस्तावेज बना कर उत्तराखंड की सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाया जा रहा है।बताया जाता है कि यहां यदि सत्यापन अभियान चलाया जाए तो बहुत से घुसपैठियों का पर्दाफाश हो जाएगा। कैसे खो नदी के किनारे मुस्लिमों का अवैध कब्जा वो बताता हूं दोस्तो कोटद्वार से निकलने वाली खो नदी के किनारे भी सरकारी नदी श्रेणी की भूमि पर बड़ी संख्या में यूपी के मुस्लिमों के अवैध कब्जे हो रहे हैं। ये भी जानकारी सामने आई है कि यहां की वोटरलिस्ट में ऐसे नाम भी है जोकि यूपी की वोटरलिस्ट में भी है। ये विषय एक बार यहां से विधायक रहे हरक सिंह रावत ने भी उठाया था। यहां कैंट एरिया में अवैध मजार बना दी गई है। जिसे लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। दोस्तो पिछले दिनों एक और विषय भी चर्चा में आया था कि कोटद्वार के अस्पतालों में ज्यादातर बच्चे यूपी की मुस्लिम महिलाओं के जन्म ले रहे है और इनके जन्म प्रमाण पत्र उत्तराखंड के बन रहे है।

फर्जी दस्तावेज प्रमाण पत्र बनाकर आयुष्मान कार्ड भी उत्तराखंड के बनाए गए है। कल को यही बच्चे उत्तराखंड के नागरिक होने का दावा करेंगे। जिसे लेकर कई सवाल उत्तराखंड सरकार के समक्ष भी रखे गए है।ये विषय स्थानीय विधायक और विधान सभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी के समक्ष भी सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उठा चुके हैं। बहरहाल ये कोटद्वार शहर डेमोग्राफी चेंज की दृष्टि से संवेदनशील हो चुका है। इस ओर धामी सरकार ने शीघ्र ध्यान नहीं दिया तो यूपी से लगता ये क्षेत्र भी सनातन संस्कृति को आघात पहुंचाने वाला हो जाएगा,,तो दोस्तो सवाल बहुत हैं और जवाब अभी अधूरे।क्या कोटद्वार में सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण हुआ है?अगर हुआ है, तो फिर ज़िम्मेदार कौन है—अवैध कब्जा करने वाले या आंख मूंदे बैठे अफसर?क्या यूपी से आकर यहां जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप सही हैं, या ये सिर्फ आशंकाएं हैं?और अगर फर्जी दस्तावेज़ों का खेल चल रहा है, तो अब तक प्रशासन ने ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की?सबसे अहम सवाल—डेमोग्राफी चेंज की जो बातें कही जा रही हैं,क्या सरकार के पास इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा है या नहीं?अगर है, तो जनता से क्यों नहीं साझा किया जा रहा?और अगर नहीं है, तो फिर इन दावों की निष्पक्ष जांच कब होगी?ये लड़ाई किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं हो सकती—ये लड़ाई कानून, ज़मीन और सिस्टम की जवाबदेही की है।क्योंकि अगर आज सवाल नहीं पूछे गए,तो कल हालात हाथ से निकल सकते हैं।