kotdwar नया मोड़ दीपक को किसने बताया ‘भारत का हीरो’? !| kotdwar | Dehradun News | Uttarakhand News

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उत्तराखंड के कोटद्वार से बड़ी और सस्पेंस भरी खबर सामने आ रही है। शहर में एक कपड़े की दुकान को लेकर उठे विवाद ने अब सियासी रंग ले लिया है। इस मामले में सियासत ने दीपक कुमार को ‘भारत का हीरो’ बताया है। दीपक वही शख्स हैं, जिन्होंने पहले एक मुस्लिम दुकानदार की मदद कर सबका दिल जीता था।इस विवाद का असर क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक माहौल पर कैसे पड़ेगा, और प्रशासन इसे कितनी जल्दी नियंत्रण में ला पाएगा। बताउंगा आपको दीपक कुमार के सियासी कनेक्शन ने कैसे मचा दिया शोर। दोस्तो उत्तराखंड के कोटद्वार में एक कपड़े की दुकान के नाम पर उठे विवाद ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस ने दीपक कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। दीपक वही शख्स हैं, जिन्होंने बीते दिनों एक मुस्लिम दुकानदार की मदद की थी। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा काटा। इस मामले में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने दीपक को ‘भारत का हीरो’ बताया है. तुम बब्बर शेर हो इस मामले में कांग्रेस के सीनियर नेता राहुल गांधी की भी एंट्री हो गई है।

1 फरवरी की शाम उन्होंने ‘X’ पर एक पोस्ट किया। लिखा, दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं – उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं। वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है। संघ परिवार जानबूझकर देश में आर्थिक और सामाजिक ज़हर घोल रहा है, ताकि भारत बंटा रहे और कुछ लोग डर के सहारे राज करते रहें। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने उत्तराखंड BJP पर भी हमला बोला है। कांग्रेस नेता ने कहा, हमें और दीपकों की ज़रूरत है – जो झुकें नहीं, जो डरें नहीं, और जो पूरी ताक़त से संविधान के साथ खड़े रहें। हम तुम्हारे साथ हैं भाई डरो मत. तुम बब्बर शेर हो’। दोस्तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी ने उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी दीपक को भारत का हीरो बताया है और दीपक के साथ खड़े होने की बात कही हैँ। जिसके बाद राजनीति भी तेज हो गई हैँ। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोटद्वार के पूर्व विधायक हरक सिंह रावत ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओ को फ़र्ज़ी करार देते हुए कहा कि यह लोग बीजेपी के नहीं हैँ। बल्कि दलाली करने वाले फ़र्ज़ी लोग हैँ ज़ो कोटद्वार का माहौल खराब करने का काम कर रहे हैँ। तो

दोस्तो एक तरफ राहुल गाधी का मौहम्मद दीपक यानि दीपक कुमार अक्की को बब्बर शेर कह कर भारत का शर कहा वहीं हरक सिंह ने बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों को लेकर क्या ये कह दिया कि ये सत्ता के दलाल हैं। ये सियासी क्यों मचा है, लेकिन इधर पुलिस ने जो कहा वो भी बेहद गौर करने वाला है। दोस्तो पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के साथ बातचीत के बाद सहमति बन गई है। दुकान का नाम ‘बाबा’ ही रहेगा और बजरंग दल की ओर से इस नाम को लेकर कोई विरोध या प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। पुलिस ने चेतावनी भी जारी की है कि क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यहां मै आपको बता दूं कि पुलिस ने 1 फरवरी की रात में प्रेस नोट जारी कर मामले में FIR की जानकारी दी। इसमें बताया गया है कि दीपक और उनके साथियों के खिलाफ गाली-गलौज करते हुए जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग करने और जान से मारने की नीयत से हमला करने के संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैंपुलिस ने इस मामले में तीन अलग-अलग केस दर्ज किए। पहला केस 30–40 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सार्वजनिक शांति भंग, सरकारी काम में बाधा और पुलिस से धक्का-मुक्की के आरोप में दर्ज किया गया।

दूसरा केस स्थानीय निवासी वकील अहमद की शिकायत पर गाली-गलौज और जातिसूचक भाषा के इस्तेमाल को लेकर दर्ज हुआ। तीसरा केस कमल पाल की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके साथियों के खिलाफ दर्ज किया गया है। दोस्तो, कोटद्वार का यह विवाद अब सिर्फ एक दुकान के नाम तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने दीपक कुमार को ‘भारत का हीरो’ और ‘बब्बर शेर’ कह कर उनके हौसले को सलाम किया है, तो वहीं दूसरी ओर स्थानीय सियासी दावे और हिंदूवादी संगठनों की भूमिका ने मामले को और गर्मा दिया है।हालांकि पुलिस ने दोनों पक्षों के साथ बात कर मामले को शांत कर दिया है और स्पष्ट किया है कि दुकान का नाम ‘बाबा’ ही रहेगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे साफ है कि दीपक और उनके साथियों के इर्द-गिर्द उठे राजनीतिक और सामाजिक विवाद ने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींच लिया है, और प्रशासन भी हर कदम पर निगरानी बनाए हुए है। यही है वो कहानी, जो अब सिर्फ कोटद्वार तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक माहौल का हिस्सा बन चुकी है।