देवभूमि में खामोश त्रासदी से हड़कंप! | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड में एक खामोश त्रासदी धीरे-धीरे घर-घर में फैल रही है। बाहर से आती स्मैक और घर के अंदर टूटते रिश्ते, क्या बनभूलपुरा से जुड़ा है इस ड्रग्स का कनैक्शन?कितने परिवारों की ज़िंदगी पर इसका असर पड़ रहा है, और आखिर कैसे बनेगा हमारा उत्तराखंड ड्रग्स फ्री? दोस्तो शाराब पर तो शोर था ही, लेकिन अब ड्रग्स रुप बीमारी ने उत्तराखंड को जकड़ना शुरू कर दिया है। ये मै क्यों कह रहा हूं वो बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए पुलिस का खुलासा और क्या इस ड्रग्स का कनैक्शन हल्द्वानी के बनभूलपुरा से भी है। दोस्तो एक मां की आंखों में नींद नहीं है। वह दरवाजे की आहट पर बार-बार चौंक जाती है। एक पिता हर अनजान फोन कॉल से डरता है, कहीं फिर से कोई बुरी खबर न हो। ये किसी एक घर की कहानी नहीं, बल्कि हल्द्वानी के उन बेहिसाब परिवारों की सच्चाई है, जिनके बच्चे बेटा-बेटी नशे की गिरफ्त में हैं या उस खतरनाक कगार पर खड़े हैं, जहां से लौटना आसान नहीं होता। दोस्तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये जहर बच्चों तक पहुंच कैसे रहा है? जवाब उतना ही डराने वाला है- बहुत आसानी से। बिलासपुर, बरेली, बहेड़ी जैसे शहरों से नशे की खेप बिना किसी बड़े अवरोध के लंबे समय से हल्द्वानी पहुंच रही है। यहां से ये जहर नैनीताल और पूरे पहाड़ी इलाकों में फैल रहा है, जैसे किसी ने इस शहर को नशे का खुला गलियारा बना दिया हो, वो कैसे भी समझियए। दोस्तो हाल ही की घटनाएं इस सच्चाई को और भी गहरा करती हैं। रामपुर रोड स्थित बेलबाबा मंदिर के पास से पुलिस ने कनिका (40 वर्ष), निवासी शिवनगर ट्रांजिट कैम्प, जिला ऊधम सिंह नगर को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 203 ग्राम स्मैक बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 60 लाख 90 हजार रुपए आंकी जा रही है।

दोस्तो इतना नहीं है कि एक या कुछ तस्करों की गिरफ्तारी होती है, लेकिन ड्रग्स की एंट्री पर रोक नहीं लग पाती वो इस लिए जिस खुलासे पर आज पुलिस ब़डे दावा कर रही है। वहीं इससे पहले बीते सोमवार को बागजला, गौलापार क्षेत्र से 91.10 ग्राम स्मैक (लगभग 27 लाख रुपये) के साथ आनंद सिंह रावत और रोहित थापा को पकड़ा गया था। दोस्तो पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया था कि वे स्मैक को पिंचू निवासी शक्तिफार्म, सितारगंज (उधम सिंह नगर) से खरीदकर हल्द्वानी में सप्लाई करते थे, लेकिन अब नए खुलासे पर क्या कहना है। दोस्तो आज पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। अच्छी बात है बड़ी कामयाबी ये है, लेकिन इससे पहले के मामलो में पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि सप्लाई की जड़ें बाहरी इलाकों तक फैली हुई हैं, जहां से यह जहर खरीदकर हल्द्वानी लाया जाता है और फिर यहां से छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर बाजार में उतारा जाता है, लेकिन दोस्तो इन आंकड़ों और बरामदगियों के पीछे जो असली दर्द छुपा है, वो किसी रिपोर्ट में नहीं दिखता। वो दर्द है उन मां-बाप का, जो हर दिन अपने बच्चों को इस दलदल से बाहर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ सफल हो जाते हैं, लेकिन कई ऐसे भी हैं, जिनके हाथ सिर्फ निराशा लगती है। दोस्तो हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में फलफूल रहे नशा मुक्ति केंद्र इस बात को चीख चीखकर बताने के लिए काफी हैं कि आज कैसे नई पीढ़ी नशे के दलदल में धंस रही है। और पीछे मां बाप उनकी चिंता में खून के आंसू बहाने को मजबूर हैं। दोस्तो नशा सिर्फ एक अपराध नहीं है ये एक ऐसी चुपचाप फैलने वाली त्रासदी है, जो परिवारों को अंदर से तोड़ देती है। हल्द्वानी आज उसी मोड़ पर खड़ा है, जहां अगर समय रहते इस जाल को नहीं तोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ी इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाएगी। दोस्तो सवाल सिर्फ ये नहीं कि कितनी स्मैक पकड़ी गई सवाल ये है कि कितनी अब भी शहर में घूम रही है, और कितने घरों को अभी और उजाड़ना बाकी है। क्योंकि नशे का हर तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आ रहा हो, ऐसा दावा सामने नहीं आया है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।