अब घरों में घुस आया है ये ज़हरीला खतरा? | Pithoragarh | Uttarakhand News | तैयों का आतंक

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड के घरों में घुस आया है एक ऐसा जरहीला खतरा, एक छोटा सा कीड़ा जो अब जानलेवा खतरा बनने लगा है। वैसे आप इस खबर को देख कर ये जरूर कहेंगे कि क्या ये भी हो सकता है, लेकिन ये सच है दोस्तो ये खबर बेहद अहम है। Pithoragarh Wasps Terror क्या आप अपने घर के आंगन में भी अब सुरक्षित नहीं हैं? क्या एक छोटा-सा कीड़ा बन चुका है जानलेवा खतरा? और क्या प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहा ये उड़ता हुआ ज़हर। दोस्तो पिथौरागढ़ में एक बार फिर ततैयों का कहर बरपा है। जी हां सही सुना वो ततैया जो आपके घर के आस पास या जंगल मे पेड़ पौधों में अकर देखे जा सकते हैं, वो ही ततैया की बात हो रही है। इस बार शिकार बने एक मां और उसका बेटा — जिन पर ततैयों ने किया जानलेवा हमला, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक इत्तेफाक है? या फिर वो खौफनाक सिलसिला, जो पिछले 5 सालों में 12 से ज़्यादा लोगों की जान ले चुका है, अब और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है? दोस्तो सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से खबर आई है, यहां ततैयों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक सामने आ रही घटनाओं से आमजन में दहशत में दिखाई देने लगा है। यहां अब ततैयों ने सीमांत क्षेत्र मूनाकोट के सल्ला चिंगरी गांव में एक मां और बेटे पर हमला कर घायल कर दिया। दोनों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है, खबर के मुताबिक दोस्तो सीमांत मूनाकोट विकासखंड के सल्ला चिंगरी गांव निवासी राधा देवी (45) घर के पास खेत में घास काट रही थी। उनका 23 साल का बेटा मवेशियों के लिए घास लेने आया, वह घास लेकर घर की तरफ लौटने लगा तो एकाएक कहीं से ततैयों के झुंड ने आकर युवक और महिला पर हमला बोल दिया।

उन्होनें किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाई, बाद में परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। इमरजेंसी में तैनात एमओ डॉ. ने दोनों का उपचार किया, साथ ही ये बताया गया कि ततैयों ने दोनों के सिर, चेहरे, पीठ में में काटा है। उन्होंने बताया दोनों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, लेकिन इतना भर नहीं है आगे में आपको एक आकड़ा दिखाउंगा जिसे देख कर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे, कि ऐसा कैसे हो सकता है। वो है अपने उत्तराखंड में ततैया के काटने से मौत तक हो चुकी है। अभी बात इस इलाके की पिथौड़गढ जनपद की, दोस्तो यहां 25 दिन के भीतर ततैयों के हमले की ये चौथी घटना है। बीते 20 सितंबर को पहली घटना हुई थी। जिसमें मदकोट के चौना गांव रहने वाले एक व्यक्ति जिनका नाम बहादुर सिंह है उनकोअपनी जान गंवानी पड़ी। इस घटना के दो दिन बाद अलग-अलग जगह ततैयों ने तीन लोगों को घायल कर दिया। चार अक्टूबर को डुंगरी गांव में स्कूल जा रहे तीन बच्चों को ततैयों ने हमला कर घायल किया। अब सल्ला चिंगरी में ये घटना सामने आई है। दोस्तो इससे पहले सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी के मदकोट में ततैया के हमले से एक माह पूर्व एक अधेड़ की मौत हो गई थी। मदकोट के चौना गांव में एक माह पूर्व खेत में काम कर रहे 54 वर्षीय एक व्यक्ति पर ततैया के झुंड ने हमला कर दिया था। सीएचसी मुनस्यारी से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी थी। बीते पांच वर्ष में ततैया के हमले में 12 से अधिक लोग काल के गाल में समा चुके हैं। लगातार ततैया के हमले से लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

दोस्तो अपने उत्तराखंड में गुलदार, हाथी, भालू, जंगली सूअर के लोगों पर हमले की घटनाएं आमतौर पर होती रहती हैं। वन विभाग के मुताबिक इन हमलों में कई लोग अपनी जान गंवा भी देते हैं, जबकि कई लोग घायल भी हो जाते हैं। इसके अलावा सर्प दंश से मौत के मामले भी सामने आते रहते हैं, लेकिन अब ततैया के हमले से मौत की खबरों ने सबको चौंका दिया है। आज के मामले में तो मां और बेटा सिर्फ घायल हुए हैं लेकिन इससे पहले के कई ऐसे मामला सामने आ चुके हैं जहां लोगों को जान तक गवानी पड़ी है। दोस्तो ठीक एक साल पहले भी ऐसी कुछ खबरों से ग्रामीण लोग दहशत में आए थे। बीते साल 30 सितंबर को टिहरी जिले के एक गांव तुनेटा के रहने वाले पिता-पुत्र पर ततैया के झुंड ने हमला किया था। हमले के दौरान दोनों पिता-पुत्र गाय चराने जंगल गए थे, हमले में दोनों की मौत हो गई। ततैया के हमले से मौत की खबर ने न केवल गांव बल्कि पूरे उत्तराखंड को डरा दिया था और आज एक बार फिर पिथौड़ागढ़ से आई इस खबर से लोग एक बार उसी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। वैसे दोस्तो साल 2022 में भी पिथौरागढ़ के ततैया के झुंड ने नेपाली मूल के नागरिकों के ऊपर भी हमला बोला था। इस हमले के बाद नेपाली मूल का नागरिक घर में ही घरेलू उपचार ले रहा था, लेकिन कुछ ही दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।

पिथौरागढ़ जिले में अब तक ततैया के हमले से अलग-अलग गांवों में कई मौत हो चुकी हैं। बागेश्वर के कपकोट में भी बीते सालों में ततैया के हमले में दो सगे भाई बुरी तरह घायल हो गए थे। दोस्तो आपको ये भी बता दूं कि तब जब उत्तराखंड में लगातार सामने आए ततैया के हमलों की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने मुआवजे का भी ऐलान किया। सरकार ने ततैया के हमले में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को एक लाख रुपए, ततैया के काटने से अपंग होने पर 3 लाख रुपए और मौत होने पर 6 लाख रुपए का मुआवजा देने का प्रावधान किया है। वन विभाग ने ततैया को भी गुलदार, भालू, मगरमच्छ और सांप की श्रेणी में रखा है। वहीं दोस्तो डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो ततैया बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। बीते कुछ सालों में हमने ऐसे कई केस देखे हैं। कई प्रजातियां इनमें बेहद ही जहरीली होती हैं। जंगल या ऐसी जगह पर अगर आप लोग जा रहे हैं तो कोशिश करें कि गहरे रंग के कपड़े ना पहने। डार्क कपड़े देखकर अमूमन ततैया हमला करती हैं। कई लोग बेहद अधिक इत्र या परफ्यूम लगाकर भी गुजरते हैं, उन्हें भी यह बहुत जल्द काट लेती हैं। इसके डंक में टॉक्सिन होता है, वह एक जहर है, इसके अधिक काटने से ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है, हालांकि, काटने पर तुरंत उपचार मिलता है तो व्यक्ति को बचाया जा सकता है, तो पिथौरागढ़ में उड़ते हुए इन ज़हरीले हमलावरों ने एक बार फिर दिखा दिया कि खतरा सिर्फ जंगलों में नहीं, अब हमारे घरों के दरवाज़े तक आ पहुंचा है। 12 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं, और अब मां-बेटे की हालत खराब है। सवाल अब भी वही है — क्या प्रशासन इन घटनाओं को सिर्फ आंकड़ों में गिनता रहेगा, या कोई ठोस कदम उठाएगा? कदम उठाएगा तो वो क्या होगा।