UP में तीन बाघों की मौत पर कार्यवाही, उत्तराखंड में 12 की मौत पर भी सन्नाटा

Share

Dehradun: यूपी के लखीमपुर में बाघों की मौत पर योगी सरकार सख्त हो गई है। लखीमपुर में बाघों की मौत के मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। बाघों की मौत के मामले में CM योगी के जांच के आदेश के बाद बड़ी कार्रवाई। वनमंत्री की जांच में दुधवा में लापरवाही के चलते बाघों की मौत का खुलासा हुआ है और अब मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को भी हटा दिया गया है। जबकि उत्तराखंड में बीते पांच माह में 12 बाघों की मौत पर भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच की बात कही है। बता दे, बाघ एक संरक्षित प्रजाति का जीव है। प्रदेश में बाघों के संरक्षण पर प्रतिवर्ष मोटी रकम खर्च की जाती है। इसके बाद भी एक के बाद एक लगातार बाघों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में सरकार और वन विभाग पर सवाल उठ रहे हैं। बीते दिनों अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खबर का संज्ञान लेते हुए बाघों की मौत के मामले में जांच की बात कही थी।

हालांकि इस मामले में पहले ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. समीर सिन्हा के स्तर से जांच के आदेश दे दिए गए थे। लेकिन जांच में क्या बात सामने आई है, इसका अभी खुलासा नहीं किया गया है। इस संबंध में डॉ. सिन्हा का कहना है कि उत्तराखंड में बाघों की मौत के सबसे अधिक मामले कुमाऊं के तराई वन प्रभाग के हैं। इसलिए इस मामले की जांच चीफ कुमाऊं को सौंपी गई थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी थी, लेकिन कुछ बिंदुओं पर उनसे विस्तृत जांच आख्या मांगी गई है। उन्हें शीघ्र ही फाइनल रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। हालांकि जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश भूभाग में भले ही उत्तराखंड से बड़ा है, लेकिन बाघों के घनत्व के मामले में वह उत्तराखंड से बहुत पीछे है। वर्ष 2018 की गणना के अनुसार, उत्तरप्रदेश में जहां बाघों की संख्या 173 के आसपास है, वहीं उत्तराखंड में इनकी संख्या करीब 442 के आसपास है। ऐसे में उत्तराखंड में मौत के मामले भी अधिक हो सकते हैं।