जी हां दगड़ियो उत्तराखंड में भारी बारिश ने बढ़ाई दिल्ली की चिंता, हथिनीकुंड बैराज से आया पानी। दिल्ली की दहलीज पर कैसे पहुंच गई बाढ़! हथिनीकुंड बैराज से कैसे बजी खतरे की घंटी बताने के लिए आया हूं दगड़ियो। Alarm bells rang from Hathinikund Barrage दगड़ियो उत्तराखंड के पहाड़ी छेतों में हो रही भारी बारिश ने दिल्ली वालों की चिंता को बढ़ा दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश ने न सिर्फ प्रदेशवासियों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि अब इसके खतरनाक प्रभाव दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में महसूस किए जा रहे हैं। खासतौर पर हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी राजधानी दिल्ली की दहलीज तक पहुंच चुका है और यहां बाढ़ का भय सिर उठाने लगा है। ये स्थिति दर्शाती है कि उत्तराखंड की प्रकृति अब दिल्ली-हरियाणा के लिए सुकून की जगह तबाही का पैगाम लेकर आई है। आगे मै आपको बताउंगा हर वो जानकारी जो आपके लिए बड़ी महत्वपूर्ण है दोस्तो इसलिए आप से गुजारिश ये है कि आप अंत तक मेरे साथ वीडियो में अंत तक बने रहे हैं। दगड़ियो पहले बात करता हूं हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गये बेकाबू पानी, दिल्ली में बढ़ा के खतरे को लेकर हथिनीकुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे यमुना नदी के जलस्तर में खतरनाक वृद्धि हो रही है। जल प्रबंधन के नाम पर यहाँ की स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग की लापरवाही साफ नजर आ रही है।
उत्तराखंड में हो रही निरंतर बारिश के कारण बैराज में जल स्तर तेजी से बढ़ा है, और उसे नियंत्रित करने के लिए बेमियादी रूप से पानी छोड़ा जा रहा है। दोस्तो हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में लगातार पानी छोड़े जाने से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि दिल्ली में पुराना रेलवे ब्रिज बंद किया गया है। इसके अलावा यमुना नदी से सटे इलाकों में जिलाधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। मंगलवार सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक यमुना का जलस्तर 205.80 मीटर दर्ज किया गया। हथिनी कुंड बैराज से 1.763 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, वजीराबाद बैराज से 69210 क्यूसेक और ओखला बैराज से 73619 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। दिल्ली में फिलहाल यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। लोहा पुल (पुराना लोहे का पुल) के पास जलस्तर निकासी के निशान 206 मीटर के करीब पहुंचा है। इसी कारण पुल को बंद कर दिया गया है, इसके अलावा, दिल्ली के यमुना बाजार समेत अन्य इलाकों में पानी आवासीय कॉलोनियों में घुसने लगा है। बाढ़ के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है। दोस्तो हथिनीकुंड बैराज से 3.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से पिछले 24 घंटे में 3.29 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया।
अधिकारियों के अनुसार, यमुना बैराज से छोड़े गए पानी को दिल्ली पहुंचने में आमतौर पर 48 से 50 घंटे लगते हैं, ऐसे में दिल्ली में बाढ़ का संकट है। दो साल पहले दिल्ली में यमुना का जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंचा था, जिससे राजघाट और लाल किला एरिया समेत यमुना किनारे की कॉलोनियों में कई फीट तक पानी भर गया था। यह पानी यमुना नदी के रास्ते दिल्ली और हरियाणा की ओर बह रहा है, जो इन राज्यों में बाढ़ जैसी आपदा को न्योता दे रहा है। खासकर दिल्ली की निचले इलाकों में जलभराव की संभावना तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। प्रशासन को चाहिए कि इस खतरे को गंभीरता से लें और पानी की निकासी को नियंत्रित करें। फिलहाल, स्थितियों को देखते हुए दिल्ली में भी बैराजों के गेट खोले जा चुके हैं, जिससे राजधानी में पानी का दबाव कम हो सके और बाढ़ की ज्यादा गंभीर स्थिति न बने। जिला मजिस्ट्रेटों की निगरानी में निकासी प्रक्रिया जारी है हालांकि, यमुना का लगातार जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन के सामने भी बड़ी चुनौती है। दिल्ली में यमुना किनारे रहने वाले लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की गई है। दोस्तो उधर मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि सितंबर में मानसून सक्रिय बना रहेगा और देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
राजधानी दिल्ली में सोमवार को बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया था, जहां सुबह से ही रुक-रुक कर बारिश होती रही है। इसके अलावा दोस्तो ऊपर पहाड़ी राज्यों में लगातार बारिश हो रही है, जिसके चलते हरियाणा के सिर्फ हथिनीकुंड बैराज ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के डाकपत्थर बैराज से भी लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। सोमवार को यहां से 1.39 लाख क्यूसेक पानी निकाला गया, जो अपने आप में एक भयावह संख्या है। यमुना और टोंस नदी के ऊपर जलस्तर इस कदर बढ़ गए हैं कि वे उफान पर हैं। इस स्थिति में अगर जल निकासी का उचित प्रबंध नहीं किया गया तो दिल्ली और हरियाणा के लिए बाढ़ का संकट अपरिहार्य होगा। यमुना के आसपास बसे लाखों लोग इस खतरे की चपेट में आ सकते हैं इसके बावजूद राज्य सरकारों और केंद्र के जिम्मेदार अधिकारी इस खतरे को नजरअंदाज करते नजर आ रहे हैं उनकी नियोजित लापरवाही की कीमत जनता को चुकानी पड़ सकती है। एक और जो सवाल हर साल प्रशासनिक सुस्ती, जनता की जान पर बड़ा खतरा, यहां यह बताना आवश्यक है कि भारी बारिश के दौरान ऐसे बैराज से पानी छोड़ना एक तो जरूरी होता है, लेकिन इसका नियंत्रण और समय पर उचित प्रबंधन सबसे बड़ी जरूरत है। पर अफसोस, उत्तराखंड और downstream राज्यों की प्रशासनिक तंत्र इस गंभीर स्थिति में पूरी तरह से असमर्थ साबित हो रहे हैं। जल संसाधन विभाग के फैसले समय से न लेना और जलस्तर की बढ़ती आपात स्थिति पर तेजी से प्रतिक्रिया नहीं देना सीधे तौर पर दिल्ली-हरियाणा में बाढ़ की स्थिति को आमंत्रित कर रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आम आदमी के लिए सुरक्षित जगह तलाशना मुश्किल हो गया है।