देवभूमि में बड़े खतरे को लेकर अलर्ट! | Earth Quake | Disaster Alert | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो दशकों से अपना उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा एक अंदेखे खतरे को महसूस करता आ रहा है, लेकिन अब ऐसा लग रहा है इस बड़ी परेशानी की आहट सुनाई देने लगी है। लोगों को ये आभास हो रहा है कि कभी एक बड़ी मूसीबत पहाड़ियों के सिर पर आ सकती है। कैसे अब देवभूमि में इस बड़े खतरे ने अलर्ट रहने के लिए कह दिया। कैसे इस खतरे ने वैज्ञानिकों तक को बड़ी टेंशन में डाल दिया है। दोस्तो उत्तराखंड का प्राकृतिक आपदोँ के साथ चोली दामन का साथ है। हर साल हमारे पहाड़ मौनसून में मौसमी मार झेलते हैं, लेकिन इधर अब उत्तराखंड में धरती हिली और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है! क्या ये सिर्फ मामूली झटके हैं या कुछ बड़ा आने वाला है? दोस्तो तीसरी बार सिर्फ 100 दिन में भूकंप के झटके, क्या देहभूमि में कहीं कोई बड़ा खतरा छुपा है? विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं और कौन से क्षेत्र सबसे संवेदनशील हैं।

दोस्तो उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में रविवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया। कई लोग इसे लेकर चर्चा करते नजर आए, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी प्रकार की जनहानि या संपत्ति नुकसान की सूचना नहीं मिली है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुबह 11 बजकर 47 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई। भूकंप का केंद्र कपकोट के पास जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। दोस्तो कुछ लोगों को झटके महसूस हुए, जबकि कई लोग अपने काम में व्यस्त होने के कारण इसे महसूस नहीं कर सके, लेकिन दोस्तो इधर भूकंप के झटकों के बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तुरंत सक्रिय हो गए। सुरक्षा के लिहाज से जिले के विभिन्न इलाकों से जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। द्सोत तो इस बात का अंदाजा इस बात को लेकर प्रशासनिक अमला भी तैयारी करके बैठा है। दोस्तो 3 महीने में तीसरी बार कांपी धरती खास बात यह है कि इस साल बागेश्वर में यह तीसरा भूकंप है।

  • 13 जनवरी: 3.5 तीव्रता
  • 6 फरवरी: 3.4 तीव्रता
  • 5 मार्च: 3.7 तीव्रता

हालांकि दोस्तो तीनों ही घटनाओं में किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इधर दोस्तो इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि, उत्तराखंड के कई पहाड़ी जिले शहर क्षेत्र बेहद ही संवेदनशील हैं। भूकंप को लेकर इस बात को लेकर वैज्ञानिक भी कई मरतबा। कई रिपोर्ट को आधार बनाकर ये चिंता जाहिर करते रहे हैं कि क्या होगा कैसे होगा। ऐसे में दोस्तो देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट की रिसर्च के अनुसार उत्तराखंड में कभी भी महाभूकंप आ सकता है। वाडिया इंस्टीट्यूट के पूर्व कहते हैं कि प्रदेश में बार-बार आ रहे छोटे छोटे भूकंपों की वजह से धरती के भीतर मौजूद ऊर्जा पूरी तरह से बाहर नहीं आ पा रही है। दोस्तो इन छोटे भूकंपों के बावजूद वैज्ञानिक कहते हैं कि धरती के भीतर जमा भूकंपीय ऊर्जा का केवल 5 से 6 फीसदी हिस्सा ही अभी तक निकल पाया है। इस ऊर्जा को निकालने के लिए 7 से 8 रिक्टर स्केल से अधिक तीव्रता का भूकंप आवश्यक है। अगर पूरी ऊर्जा निकली तो महासंकट खड़ा होगा। अब दोस्तो भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्रों की बात आती है तो दोस्तोउत्तराखंड लंबे समय से भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र रहा है। यहां अक्सर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी नए भूकंप मानचित्र में उत्तराखंड को जोन 6 में शामिल किया गया है, जो इसकी उच्च संवेदनशीलता को दर्शाता है। पहले राज्य को जोन 4 और 5 में रखा गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण लगातार सक्रिय रहता है। छोटे भूकंप बड़े खतरे की चेतावनी भी हो सकते हैं, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

दोस्तो उत्तराखंड का पूरा पहाड़ी क्षेत्र, विशेषकर पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिले, भूकंप के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील (जोन V) हैं। इन क्षेत्रों में 1991 (उत्तरकाशी) और 1999 (चमोली) जैसी विनाशकारी घटनाओं का इतिहास रहा है, जो मुख्य बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) के पास स्थित हैं। भूकंपीय रूप से संवेदनशील प्रमुख क्षेत्र की बात करूं तो जोन V (सबसे खतरनाक): चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले। जोन IV और V (उच्च जोखिम): उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा और चंपावत के कुछ हिस्से। अन्य संवेदनशील स्थान: देहरादून, जो फॉल्ट लाइन के करीब होने के कारण अत्यधिक जोखिम में है। दोस्तो इस महासंकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और भविष्य की चुनौतियों के दृष्टिगत सरकार ने उत्तराखंड में भूकंपीय निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने का निश्चय किया है। इसी कड़ी में आठ शहरों में भूकंप वेधशालाएं स्थापित की जाएंगी। इस सिलसिले में भूमि चयन कर विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेजी गई है। यही नहीं, भूकंप चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए सेंसर की संख्या को 500 तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। वर्तमान में 169 सेंसर संचालित हैं। ऐसे में उत्तराखंड महासंकट को लेकर आगाह करने वाले संकेत समय-समय पर वैज्ञानिक भी देते रहे हैं। अब आपको थोड़ा अलर्ट रहने की सतर्क रहे, सुरक्षित रहें।