उत्तराखंड बीजेपी पर आज डबल अटैक हुआ है! एक तरफ पार्टी के अपने विधायक के बयान पार्टी के लिए मुसीबत बने हुए हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए सरकार की खामियां गिना दी हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच से लेकर किसान आत्महत्या मामला और अब बीजेपी विधायक अरविंद पांडे का विवाद—हर मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। क्या बीजेपी भीतर से कमजोर हो रही है? और क्या कांग्रेस इसी मौके को भुनाकर सियासी बढ़त बनाने की तैयारी में है? सवालों के जवाब मेरी इसी रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो लगता बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जो कुछ दिन पहले तक दूसरे की कुंडली में दोष योग बता रहे थे। अब लग रहा है कि उनको बीजेपी की कुंडरी को दिखाना चाहिए, ये मै इसलिए कह रहा हूं कि जहां बीजेपी इस बात को लेकर गदगद थी कि कोई दिक्कत नहीं दो विधानसभा चुनाव जीत लिए दोस्तो बार सांसदी का नतीजा बीजेपी के पक्ष में आ गया दो बार नगर निकाय और पंचायत चुनाव में अगर जनता का बीजेपी से मोह भंग नहीं हुआ तो अब क्या होगा लेकिन, लेकिन लगता है अगला विस चुनाव आने से पहले ही गेम बदल चुका। दोस्तो वो सुना होगा आपने हमें तो अपनों लूटा गैरों में कहा दम था। वही कहावत यहां बीजेपी में फिट बैठ रही है अब मौका गैरो को भी मिल चुका तभी तो उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक बार फिर से बीजेपी सरकार पर गरजे।
गणेश गोदियाल ने शुक्रवार को तीन मुद्दों पर अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की घोषणा, काशीपुर किसान सुखवंत सिंह सुसाइड केस और बीजेपी विधायक अरविंद पांडे मामले पर सरकार के तीखे सवाल किए, एक कर बताता ता हूं। पहले अंकिता भंडारी हत्याकांड। दोस्तो गणेश गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में लगातार प्रदेश सरकार और खुद मुख्यमंत्री जांच को भटकाने का काम कर रहे हैं. गणेश गोदियाल का कहना है कि कांग्रेस का यह आरोप आज भी स्टैंड करता है। दोस्तो गणेश गोदियाल का आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले पर जनता के आक्रोश को देखते सरकार ने आनन-फानन में सीबीआई जांच की आधी-अधूरी घोषणा तो कर दी, लेकिन इस घोषणा का हश्र भी पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की घोषणा जैसा हो रहा है। इन दोनों मामलों में सीबीआई की तरफ से अभी तक कोई बयान आया है या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इतना ही नहीं गोदियाल का आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच कराये जाने के लिए राज्य सरकार की नीयत साफ नहीं है। इसलिए धामी सरकार जांच में पहले दिन से ही लीपापोती करती आई है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की जाती है तो अंकिता को न्याय दिलाने के लिए फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा। ये तो एक मामला हो गया अब दूसरे पलर आता हूं, दोस्तो वो है किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण। दोस्तो वहीं काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले पर भी गणेश गोदियाल ने सरकार को घेरा, उन्होंने कहा कि सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है और न ही दोषी पुलिस कर्मियों और बड़े अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है। पुलिस विभाग ने मामले पर कुछ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करके उन्हें उधम सिंह नगर जिले से हटाकर रुद्रप्रयाग और चमोली भेजा गया है।
इसके साथ ही गोदियाल ने मांग उठाई कि उन्हें जिलों में न भेज कर पुलिस हेडक्वार्टर अटैच किया जाना चाहिए था। अगर मुख्यमंत्री उन पर कृपा करना भी चाहते हैं तो मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा का जिम्मा उन पुलिसकर्मियों को दे देना चाहिए। कांग्रेस को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। अब बात आती बीजेपी के अपनों पर जो किरकिरी करा रहे हैं। कांग्रेस को मौका दे रहे हैं, वो विधायक विधायक अरविंद पांडेय दोस्तो गणेश गोदियाल ने बीजेपी विधायक अरविंद पांडेय के मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले भाजपा विधायक अरविंद पांडेय के घर चाय पीने के लिए प्रदेश के कई भाजपा नेता उत्सुक थे। हेलीकॉप्टर भी उन्हें ले जाने के लिए तैयार था, लेकिन अचानक कुछ हुआ और प्लान कैंसिल हो गया। भाजपा के इन्हीं विधायक को सरकार ने जमीन पर कब्जा करने की एवज में नोटिस जारी किया है, यह बड़ा गंभीर प्रश्न है. भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेता पांडे के आवास पर चाय पीने जाने वाले थे, लेकिन अंतिम क्षणों में उन्हें रोक दिया गया। दोस्तो जो कांग्रेस कई सालों से सिर्फ सवालों का सामना कर रही है कि वो प्रदेश की हर उस सत्ता से बाहर क्यों जहां चुनाव होता है, लेकिन वो कांग्रेस भी सरकार से सवाल उठा रही कि क्या भाजपा के तथाकथित बड़े नेता इस तरह जमीनों को कब्जा करने में लगे हुए हैं। अगर ऐसी स्थिति है, तो फिर क्या भाजपा के नेता वहां ढांढस बंधाने जा रहे थे। वहीं अगर वो बाद में भाजपा के नेता अरविंद पांडे के घर नहीं गए, इसका मतलब भाजपा के भीतर क्या-क्या खिचड़ियां पक रही है। प्रदेश की जनता यह सब जानना चाहती है। वैसे जवाब तो मिलने चाहिए, आप क्या कहेंगे कमेंट के जरिए बताईयेगा।