Badrinath विधायक ने खोली पोल-पट्टी! | Congress MLA | Chardham Yatra | Uttarakhand News

Spread the love

जी हां दोस्तो वैसे ये कई बार देखने को मिल ही जाताहै कि दावे कुछ होते हैं और जमीनी हकीकित कुछ और लेकिन तब क्या हो जब सरकार के मास्टर प्लान पर ही सवाल उठने लग जाएं। जहां एक तरफ दावा इस बात की व्यवस्था चाक चौबंद हैं दुरुस्त कर दी गई हैं। जहां नहीं हुई वहां तेजी से काम हो रहा है लेकिन अब जब एक स्थानीय विधायक ने दावों पर सवाल किया है तो फिर सियासत में शोर है। दोस्तो चारधाम यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन तैयारियों को लेकर सियासत ने नया रंग ले लिया है। बद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला ने राज्य सरकार पर सीधे सवाल दागे हैं। दोस्तो क्या मास्टर प्लान के दावे सच में जमीन पर उतरे हैं? क्या अलकनंदा नदी की चौड़ाई कम होने से मंदिर और स्थानीय आबादी खतरे में हैं? और क्या श्रद्धालुओं को इस साल भी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ेगा? बताने जा रहा हूं आपको विधायक ने सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए और 13 सूत्रीय मांगों में क्या शामिल है। जी हां दोस्तो एक तरफ चारधाम यात्रा का शुभआरंब होने वाला है तो दूसरी तरफ ये एक तस्वीर जो सीधे ग्राउंड जीरों से आई, वैसे सियासी भी कह सकते हैं लेकिन बात व्यवस्था की हो रही है तो चर्चा को व्यवस्था पर ही रखता हूं।

दोस्तो, बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला ने बताया कि 5 अप्रैल को वे खुद बद्रीनाथ धाम का दौरा कर लौटे हैं उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री की निगरानी में चल रहे मास्टर प्लान के बावजूद 40 से 50 प्रतिशत काम अभी भी अधूरा है। इसके अलावा दोस्तो बुटोला ने आरोप लगाया कि चारधाम यात्रा को लेकर होने वाली समीक्षा बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायकों को नहीं बुलाया जाता, जिससे ज़मीनी समस्याएं सामने ही नहीं आ पातीं। विधायक ने बद्रीनाथ में चल रहे मास्टर प्लान पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अलकनंदा नदी की चौड़ाई करीब 3 मीटर तक कम कर दी गई है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है। जिससे आसपास के मंदिरों को खतरा उत्पन्न हो गया है, उन्होंने यह भी कहा कि नदी की चौड़ाई कम होने से स्थानीय व्यापारियों और आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है। वहीं, मंदिर के आसपास तीन साल पहले तोड़े गए पुरोहितों के घर आज भी खंडहर बने हुए हैं। इसके अलावा दोस्तो बद्रीनाथ विधायक ने कहते हैं कि जिलाधिकारी भी निर्माण कार्यों को लेकर नाराज हैं और अब युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत है। इसके अलावा दोस्तो चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर विधायक ने सरकार के सामने 13 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारण खत्म करना
  • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हमेशा खुला रखना
  • ड्राइवरों के लिए ग्रीन कार्ड 6 महीने का करना
  • ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक बैरिकेडिंग कम करना

वहीं होटल व्यवसायियों को कमर्शियल गैस नहीं मिलने से भी परेशानी बढ़ रही है। ऐसे में दोस्तो बड़ा सवाल यही है कि यात्रा शुरू होने से पहले क्या सरकार इन खामियों को दूर कर पाएगी या फिर इस बार भी श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ेगा। यहां आपको ये भी बता दूं ये सावल तब उठ रहे हैं जब यात्रा शुरू होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है। उत्तराखंड की चार धाम यात्रा 19 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही है. इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। गंगोत्री वह स्थान है जहां से मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण माना जाता है। वहीं यमुनोत्री मां यमुना का उद्गम स्थल है। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे खुलेंगे. यहां शिवलिंग बैल की आकृति के रूप में विराजमाना हैं.वहीं बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6.15 पर खुलेंगे। ये भगवान विष्णु के नर-नारायण स्वरूप की तपोभूमि है। स्कंद पुराण के अनुसार चार धाम यात्रा करने वालों को मन, वचन और कर्म से हुई गलतियों का प्रायश्चित मिलता है। पापों का क्षय होता है तो दोस्तो, तैयारियां और दावे कितने भी बड़े हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत और स्थानीय निरीक्षण ही तय करेंगे कि श्रद्धालुओं को इस बार व्यवस्थित यात्रा मिलेगी या नहीं। चारधाम यात्रा शुरू होने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं—19 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलेंगे, 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट लेकिन कपाट खुलने से पहले ही तैयारियों को लेकर शोर शुनाई देने लगा है।