जी हां दोस्तो देवभूमि की आस्था और पहचान को लेकर उत्तराखंड में एक बड़ा फैसला अब चर्चा के केंद्र में है, हांलांकि इस फैसले का अभी आधिकारिक ऐलान होना बांकि लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि एक बड़ा फैसला होना तय है। क्योंकि साधु-संतों और गंगा सभा की उस मांग पर सरकार गंभीर मंथन कर रही है, जो सीधे हरिद्वार और आने वाले कुंभ मेले से जुड़ी है। क्या कुंभ से पहले सरकार ऐसा कदम उठाने जा रही है, जो हरिद्वार की धार्मिक मर्यादा को लेकर नया अध्याय लिखेगा? और क्या साधु-संतों की मांग पर धामी सरकार अपनी मुहर लगाएगी? दोस्तो कुंभ की तैयारियों से पहले हरिद्वार एक बार फिर बड़े फैसले के मुहाने पर खड़ा है। गंगा घाटों की पवित्रता और धार्मिक गरिमा को लेकर उठी मांगों के बीच धामी सरकार अब ऐसे संकेत दे रही है, जिससे सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। क्या कुंभ से पहले हरिद्वार के कुछ इलाकों में गैर हिंदुओं की एंट्री पर सख्त रोक लगेगी? और क्या 1916 के कानून को एक बार फिर पूरी मजबूती से लागू करने जा रही है सरकार? दोस्तो उत्तराखंड की धामी सरकार हरिद्वार को लेकर एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। दरअसल, हरिद्वार की गंगा सभा और साधु संतों ने धामी सरकार से कुंभ मेले से पहले हरिद्वार के एक विशेष इलाके में गैर हिंदुओं की एंट्री को पूरी तरह से बंद करने की मांग की है।
सीएम धामी ने इशारों ही इशारों में साफ कर दिया है कि राज्य सरकार आने वाले समय में हरिद्वार को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। दोस्तो साल 2027 के शुरुआती दिनों में ही हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन होना है। ऐसे में हिंदूवादी छवि स्थापित करने में लगे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आगे गंगा सभा और कुछ अन्य संगठनों ने यह मांग की थी कि हरिद्वार में 100 से अधिक गंगा घाटों के आसपास गैर हिंदू लोगों का आना-जाना पूरी तरह से प्रतिबंध किया जाए। गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इसको लेकर बाकायदा एक पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखा है। इसके साथ ही कुछ साधु संतों ने भी इसे हरिद्वार के लिए बेहद जरूरी बताते हुए राज्य सरकार से निर्णय लेने की मांग की है। दोस्तो इधर मंगलवार को अचानक दो यूट्यूबर, लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने के चक्कर में हरिद्वार के हर की पौड़ी गंगा घाट पर शेख की वेशभूषा में पहुंच गए थे, जिसके बाद हरिद्वार प्रशासन और गंगा सभा में हड़कंप मच गया था। हालांकि, पुलिस ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों वीडियो बनाने के चक्कर में हरिद्वार के हर की पौड़ी पहुंच गए थे। गिरफ्तार युवक अपना एक यूट्यूब चैनल चलते हैं और पुलिस पूछताछ में यह बात निकाल कर सामने आई थी कि दोनों ही युवक हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र के रहने वाले हैं। इसमें एक का नाम नवीन कुमार तो दूसरे का नाम प्रिंस बताया गया है. दोनों की उम्र 22 साल है। इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि चारधाम हो या फिर हरिद्वार का गंगा घाट या अन्य धार्मिक स्थल, सभी का एक एक्ट है और उस एक्ट के तहत जो कुछ भी बेहतर होगा, हमारी सरकार वह करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि गंगा सभा, साधु संत या अन्य संगठन हरिद्वार के स्टेकहोल्डर हैं। ऐसे में अगर उन्होंने कोई मांग की है तो राज्य सरकार उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए इसमें आगे कदम बढ़ाने जा रही है। उधर, इधर हरिद्वार में शेख वाली वेषभूषा में युवकों की घटना और उससे पहले इस मामले में सरकार को पत्र लिख चुकी गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि, आगे भविष्य में ऐसी कोई हिमाकत न कर पाए, इसके लिए भी अब यह बेहद जरूरी है कि राज्य सरकार इसमें जल्द से जल्द कोई फैसला ले, नितिन गौतम ने कहा कि, हम 1916 एक्ट के तहत ही राज्य सरकार से काम करने के लिए कह रहे है। उम्मीद है कि जल्द ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठाकर हरिद्वार की आस्था गरिमा और श्रद्धा को सुरक्षित रखने में निर्णय लेंगे। हरिद्वार नगर निगम की बायोलॉज वर्ष 1916 के माने जाते हैं, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान लागू किया गया था। यह बायोलॉज हरिद्वार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। इस बायोलॉजी के अनुसार हरिद्वार नगर निगम क्षेत्र में विशेष रूप से हर की पैड़ी और आसपास के धार्मिक क्षेत्रों में गैर हिंदू जमीन नहीं खरीद सकते। सूर्यास्त के बाद गैर हिंदू दुकानदारों या व्यापारियों को उस क्षेत्र को छोड़ना होता है। बायोलॉज के अनुसार, सूर्यास्त के बाद हर की पैड़ी क्षेत्र में किसी भी गैर हिंदू के ठहरने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि गैर हिंदू अधिकारियों की ड्यूटी भी इस क्षेत्र में नहीं लगाई जा सकती है। यदि किसी कारणवश ड्यूटी लगाई जाती है तो सूर्यास्त के बाद उन्हें वह क्षेत्र छोड़ना होता है, तो अब निगाहें धामी सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। साधु-संतों और गंगा सभा की मांग को सरकार कितनी गंभीरता से लेती है और कुंभ से पहले हरिद्वार की आस्था और गरिमा को लेकर क्या बड़ा फैसला आता है, यह देखना अहम होगा। एक तरफ धार्मिक परंपराओं और 1916 के कानून की बात है, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक और कानूनी संतुलन की चुनौती। फैसला जो भी होगा, उसका असर हरिद्वार ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की सियासत और आस्था पर पड़ेगा।