Ankita केस में पूर्व सैनिकों का बड़ा कदम! | Ankita Bhandari Case | Uttarakhand News

Spread the love

अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड़! अब पूर्व सैनिकों ने भी उठाया अंकिता को न्याय की मांग को लेकर बड़ा कदम और पहाड़ में गुस्से का तांडव देखने को मिलाॉ। पूरे क्षेत्र में उबाल है और लोग बार-बार सड़कों पर उतरकर न्याय की आवाज उठा रहे हैं, लेकिन कहा पहुंची इस पूरे में जांच कैसे फंस गई बीजेपी कांग्रेस के झाल में बताउंगा आपको पूरी खबर और उन तस्वीरों को दिखाओगा जिन तस्वीरों ने अब कह दिया है’उत्तराखंड आज शर्मसार है, बेटी अंकिता का हम परिवार है। दोस्तो अब कैसे आपको कौन सी तस्वीर पहले दिखाउं समझ नहीं आ रहा है। लेकिन हां में आपको अंकिता मामले में वीआईपी के खुलासे के शोर को दिखाउं उससे पहले मै आपको उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों के उस कदम के बारे में बताना चाहता हूं, जिसमें पहले पूर्व सैनिक सिर्फ आवाज उठा रहे थे, अब वो क्यों मोर्चा खोलने को मजबूर हो गए। दोस्तो ये दोनों तस्वीरें देहरादून की हैं जहां एक तरफ अंकिता मामले कुछ नया होने का इंतजार लगातार बना है, लेकिन उधर दूसरी ओर पूर्व सैनिक संगठनों से जुड़े लोग सड़कों पर उतरे गए। परेड ग्राउंड से उठी यह आवाज़ सिर्फ़ विरोध नहीं थी, बल्कि उस इंसाफ़ की माँग थी जो अब तक अधूरा है, लेकिन जिस तरह इस मामले की कहानी आगे बढ़ रही है, उसमें एक के बाद एक बलि दी जाती दिख रही है। कहीं राजनीतिक बलि.कहीं अंकिता के माँ-पिता की उस उम्मीद की बलि, जो उन्हें न्याय से जोड़े हुए है और कहीं लाखों लोगों की आवाज़ों और प्रशासन से की गई अपीलों की बलि यह वही देवभूमि है जहाँ देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए होने वाली पशु बलि पर प्रतिबंध है, लेकिन सत्ता की सुविधा के लिए उम्मीदों, सवालों और इंसाफ़ की बलि पर कोई रोक नज़र नहीं आती ये शब्द मेरे नही हैं ना ही ये लाइ मेरे द्वार लिखि गई हैं। ये सिर्फ मै आपको बता रहूं हूं, दरअसल इन सब बातों के जरिए लोग अपनी आवाज सोसम मीडिया में लिख रहें इन तस्वीरों को साझा करते हुए, लेकिन मुझे लगा कि इस वैले एँगल को आप तक पहुचाना चाहिए।

इसके अलावा देहरादून की सड़क पर पूर्व सैनिकों ने पैदल मार्च निकाला, मार्च पूरी तरह मौन था, लेकिन हाथों में लिए बैनर चिल्ला रहे थे, उन पर लिखा था,, “उत्तराखंड आज शर्मसार है, बेटी अंकिता का हम परिवार है” ये मार्च गौरव सेनानी पूर्व सैनिक एवं पूर्व अर्धसैनिक एसोसिएशन के बैनर तले परेड ग्राउंड से शुरू हुआ और फिर बढ़ता चला गया, लेकिन दोस्तो ये तस्वीर उस सियासी तस्वीर से बिलकुल अलग थी। जहां बार ये कह दिया जाता है कि ये फलानी पार्टी की साजिश है ये है वो है, लेकिन जब आपको अंकिता को न्याय को लेकर आक्रोश की तस्वीरें देखनी है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है। कुछ तस्वीरें और दिखा रहा हूं और उससे सियासी कनेक्शन भी जोड़ रहा हूं। उत्तराखंड में अंकिता भण्डारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा सीबीआई जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न जिलों, ब्लॉकों और तहसीलों में कांग्रेस की न्याय यात्रा जारी है। आज यह न्याय यात्रा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के नेतृत्व में बागेश्वर पहुँची। दोस्तो जब जनता आक्रोश में नारे लगा रही थी, तब भारी आवाज में करन माहरा अंकिता केस में कांग्रेस की बड़ी मांग करते दिखाई दिए, पूर्व अध्यक्ष ने आरोप तमाम लगाए। दोस्तो बागेश्वर नगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर विशाल जन जुलूस निकाला और राज्य की धामी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी और सरकार द्वारा हाल ही में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। तो पूर्व सांसद राज्य सभा ने कह दिया अंकिता मामले में वीआईपी को बचाया जा रहा है। दोस्तो एक तरफ जहां प्रदेश की महिलाओं के तमाम सवाल है। वहीं इस जनसैलाब से जो आवाज निकली वो शायद दूर तक जाए। महिलाओँ का साफ कहना ये कि अंकिता भण्डारी मामले में सरकार की मंशा साफ नहीं दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र सीबीआई जांच नहीं कराई जाती, तब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल सकता। अब इस सियासी हो हल्ले के बीच मेरे को दो तस्वीरें दिखाई और दी। जहां एक तरफ दिन के उजाले में रानीखेत की जनता और खासकर महिला ने अंकिता को न्याय की मांग को तेज किया। उधर एक तस्वीर रात के अंधेरे की भाई, वो तस्वीर दिखाउं उससे पहले आप रानीखेत की सड़कों पर उमड़े इस सैलाब को देखिए और सुनिए नारों को क्या मांग रही पहाड़ की जनता अब बात अगर रात के अंधरे में कैन्डल मार्च अब बात पूरानी हो चली है, लोंगों ने हाथों में मशाले उठा ली हैं, हालांकि नैनीताल अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन लोगों की हाथ में थी तो कैंडिल ही लेकिन सवाल तमाम थे। नैनीताल में स्थानीय सड़कों पर उतर आए और अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग की। यह नई नाराजगी नहीं है। अंकिता की हत्या के दिन से ही उत्तराखंड के लोग, उनके माता-पिता सहित, केवल एक ही चीज़ की मांग कर रहे हैं—सीबीआई जांच साल बीत चुके हैं, प्रदर्शन कभी रुके नहीं, लेकिन सरकार अभी तक कोई स्पष्ट नहीं रख पाई है। न कोई स्पष्टता, न कोई समाधान, यही कारण है कि लोग बार-बार सड़कों पर उतर रहे हैं। देहरादून से लेकर नैनीताल तक। देहरादून, नैनीताल और राज्य के अन्य हिस्सों में पहले ही प्रदर्शन हो चुके हैं। रनिकेत में आज का मार्च इस बात का संकेत है कि जनता का गुस्सा कम नहीं हुआ है और लोग अब भी जवाब और जवाबदेही की मांग के लिए सड़कों पर हैं।