“बनभूलपुरा हिंसा मामले में इस वक्त की बड़ी खबर! तीन आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को अभी कोई राहत नहीं मिली है। इस फैसले के बाद मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। क्या यह कानूनी प्रक्रिया का सामान्य चरण है या जांच में अब भी कुछ बड़ा बाकी है? आखिर किन आधारों पर मिली जमानत और अब आगे क्या होगा? पूरी जानकारी के साथ देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट। दोस्तो हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक समेत अन्य लोगों की जमानत याचिकाओं पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने मामले में शामिल सह आरोपी मौकिन सैफी, जीयूर्रर रहमान व रईस अहमद की जमानत मंजूर कर दी है जबकि, कोर्ट ने मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को कोई जमानत न देते हुए अगली सुनवाई 17 फरवरी की तिथि नियत की है। दोस्तो 11 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास गुगलानी व सीके शर्मा ने कोर्ट को अवगत कराया कि मौकिन सैफी व अन्य का नाम न तो प्राथमिकी में है, न ही वो घटना में शामिल हैं। संदेह के आधार पर उन्हें बेवजह गिरफ्तार किया गया, उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। वहीं दोस्तो आरोपियों का ये भी कहना था कि पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए. हिंसा में शामिल कई लोगों को पूर्व में कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। दोस्तो ये मामला 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा का है जब इलाके में प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाने गई थी। तभी प्रशासन और पुलिस की टीम पर अतिक्रमणकारियों ने पथराव कर दिया था।
इसके अलावा आगजनी और फायरिंग भी की थी। हिंसा के दौरान आरोपियों ने कई गाड़ियों समेत बनभूलपुरा थाने को आग के हवाले कर दिया था। इस हिंसा कई लोगों की मौके पर मौत हो गई थी जबकि, 100 से ज्यादा लोग हिंसा में घायल हो गए थे। वहीं, अन्य की तरफ से कहा गया कि जिस दिन घटना हुई, वे मौके पर मोजूद नहीं थे। पड़ोस में रहने के खातिर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के समय वे वहां नहीं थे, उनको बेवजह इस मामले में फंसाया जा रहा है। इसलिए उन्हें प्राथमिकता की तौर पर रिहा किया जाए। दरअसल, दोस्तो अब्दुल मलिक समेत अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा हिंसा के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित तरीके और झूठे शपथपत्र के आधार पर सरकारी भूमि को हड़पने का काम किया। इतना ही नहीं उनकी ओर से नजूल भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग किया गया, फिर अवैध निर्माण कर उसे बेचा गया। जब जिला प्रशासन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने पहुंची तो उन पर पथराव किया गया, बाद में इसने हिंसा का रूप ले लिया। इसी हिंसा में पुलिस समेत अन्य लोग घायल हो गए। कईयों की जान तक चली गई आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं है। उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की है। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने निर्णय देते हुए उसकी जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि आप निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन करें।
दोस्तो साथ में निचली अदालत चार्जशीट और अन्य का अवलोकन करके निर्णय पारित करे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पूर्व के आदेश का अवलोकन करके आदेश पारित करें। इस मामले पर 2 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। आज शुक्रवार 10 जनवरी को कोर्ट ने इस पर अपना आदेश दिया है। दोस्तो मामले के अनुसार 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में टीम अतिक्रमण हटाने गई थी। पुलिस के अनुसार प्रशासन और पुलिस की टीम पर अतिक्रमणकारियों और कई अन्य लोगों ने पथराव, आगजनी और गोलीबारी की थी। हिंसा के दौरान आरोपियों ने कई गाड़ियों सहित थाने को घेरकर गोलीबारी की थी, जिसमें कई लोगों की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच के बाद पुलिस ने 100 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उन्हीं में से एक आरोपी अब्दुल मलिक था। आज उसके द्वारा जमानत प्रार्थनपत्र में यह भी कहा गया है कि जिस दिन यह घटना हुई, वो वहां नहीं था, बल्कि वो दिल्ली में था। ऐसे में उसे बेवजह फंसाकर उनके ऊपर हिंसा भड़काने और आरोपियों का साथ देने का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है। जब अपराध किया ही नहीं, तो झूठा मुकदमा किस आधार पर दर्ज किया गया है, इसलिए उसे जमानत दी जाए। अब्दुल मलिक ने ये भी कहा कि अतिक्रमण करने के मामले में उसे एकलपीठ से जमानत मिल चुकी है। आज अब्दुल मलिक के जमानत प्रार्थन पत्र की पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद पेश हुए। दोस्तो, बनभूलपुरा हिंसा मामले में आज हाईकोर्ट का फैसला आ चुका है। तीन सह-आरोपियों को जमानत मिल गई है, लेकिन मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक के खिलाफ जमानत का रास्ता अभी बंद है। अब्दुल मलिक ने कोर्ट में खुद को बेवजह फंसाया गया बताया है और दिल्ली में होने का आधार पेश किया, लेकिन न्यायालय ने इसे खारिज करते हुए निचली अदालत में सुनवाई के लिए भेज दिया है।ये मामला केवल बनभूलपुरा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन, पुलिस और अदालत की कार्रवाई के सवाल भी जनता के सामने खड़े कर रहा है। अब सवाल यही है – क्या अब्दुल मलिक को निचली अदालत से राहत मिलेगी या जांच की तलवार और भी तीखी होने वाली है? इस केस पर हर अपडेट के लिए हम आपके साथ लगातार जुड़े रहेंगे।