उत्तराखंड में माफिया से चंदा लेने को लेकर बचे सियासी बवाल के बाद हुआ भू-माफिया नेटवरर्क का पर्दाफाश बीजेपी नेता की हो गई गिरफ्तारी। BJP leader’s connection with mafia इस खबर से एक बार फिर बीजेपी की बेचैनी बढ़ सकती है, इस खबर से क्या हरक सिंह रावत के बयान को बल मिलता है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था माफिया और सियासत के गठजोड़ का खबर बेहद अहम है दगड़ियो। दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत के सियासत के माफिया कनेक्शन के बयान की आग शांत भी नहीं हुई है कि अब एक और खबर ने प्रदेश भर में हड़कंप मचा दिया है। दोस्तो खबर ये है कि रुड़की में हाल ही में जो कुछ घटित हुआ, उसने न केवल स्थानीय राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि राज्य भर में एक बार फिर भू-माफिया और सत्ता के गठजोड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा पार्षद मनीष बॉलर की एसटीएफ द्वारा गिरफ्तारी ने न केवल प्रशासन को अलर्ट मोड में डाला है, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर भी हलचल मचा दी है।
आपको पूरा खेल समझाने जा रहा हूं पूरा मामला बताने जा रहा हूं। मामले की शुरूआत कहां से हुई एसटीएफ की छापेमारी और बीजेपी नेता की गिरफ्तारी कैसे हुई ये सब मै आगे आपको बताने जा रहा हूं। दगड़ियों स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जमीनी फर्जीवाड़े के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए भाजपा पार्षद मनीष बॉलर को हिरासत में लिया। आरोप है कि बॉलर और उनके सहयोगियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीनें बेचीं, और इस अवैध नेटवर्क का संचालन एक संगठित ढंग से वर्षों से किया जा रहा था। दोस्तो इतना भर नहीं आगे जो बात मै आपको बताने जा रहा हूं। उसे सुन और देख कर आपके पैरों तले की जमीन खिसक जाएगी क्योंकि अब तक हम सब ने ये देखा की सियासत का माफिया से गठजोड़ है। माफिया से चंदा आता है और पार्टियां चलती हैं। जैसा हरक सिंह रावत ने बीजेपी के पार्टी फंड को लेकर कहा लेकिन यहां एक और बात आपको बताने जा रहा हूं, एक अवैध नैटवर्क का जिक्र मेने इससे पहले किया कि कैसे फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीनें बेचीं।
जो लोग ये काम कर रहे थे ना उनका इस गिरोह का कनेक्शन कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि गैंग से भी जोड़ा जा रहा है, जी हां दोस्तो जो गैंग पश्चिमी उत्तराखंड में लंबे समय से जमीन कब्जाने, धमकी देने और फर्जीवाड़े जैसी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय है। अब आता हूं राजनीति और अपराध के गठजोड़ पर पर या यूं कहूं कि राजनीति और माफिया के गठजोड़ पर इस पूरे मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है दगड़ियो जब इससे पहले प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का एक बयान फिर से सुर्खियों में आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि “भाजपा के कई नेता भू-माफियाओं से चंदा लेकर पार्टी चला रहे हैं। अब जब भाजपा के एक मौजूदा पार्षद की गिरफ्तारी इसी श्रेणी में हुई है, तो सवाल लाजिमी है, तो सवाल ये है कि क्या राजनीति में भू-माफियाओं की घुसपैठ गहरी हो चुकी है? दगड़ियों हरक सिंह रावत के बयान को जहां बीजेपी वाईट मनी कहकर टाल रही है लेकिन अब परिस्थितियाँ कुछ और ही कह रही हैं।
इसका एक सामिजक पहलु भी देखने को मिला दोस्तो कि मनीष बॉलर की गिरफ्तारी के तुरंत बाद वाल्मीकि समाज के सैकड़ों लोग गंगनहर कोतवाली पहुंचे और गिरफ्तारी को “पक्षपातपूर्ण और साजिशन” बताया, उनका कहना है कि पार्षद को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई केवल एक समुदाय विशेष तक सीमित दिख रही है। इधर स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है, और एसएसपी हर कदम पर नजर बनाए हुए हैं। अब देखना होगा कि बीजेपी तरफ से इस मामले पर क्या रिएक्शन होता आता है, लेकिन विपक्ष वाले ऑफ रिकॉर्ड तो कहने भी लगे है कि “यह पहली गिरफ्तारी नहीं है। भाजपा के कई नेता ज़मीनी घोटालों में लिप्त हैं, लेकिन कार्रवाई तब होती है जब बात सार्वजनिक हो जाती है। इससे साफ है कि भाजपा में भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।
प्रशासन का कहना है कि मामला संवेदनशील है और किसी भी प्रकार के जातीय या राजनीतिक दबाव के बिना जांच की जा रही है। एसटीएफ ने मनीष बॉलर से पूछताछ शुरू कर दी है, और जल्द ही अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी भी संभव है। कहा जा रहा है कि फर्जी रजिस्ट्री, कब्जा, और अवैध निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की स्क्रूटनी जारी है, और इस पूरे गिरोह की राजनीतिक और आपराधिक कड़ियाँ धीरे-धीरे सामने आ सकती हैं। दगड़ियो मनीष बॉलर की गिरफ्तारी कोई मामूली घटना नहीं है। यह उस सिस्टम की पोल खोलती है, जिसमें राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर वर्षों तक अवैध कारोबार को संरक्षण दिया गया। हरक सिंह रावत का बयान अब भविष्यदर्शी लगता है। अगर वाकई भाजपा नेतृत्व इस गिरफ्तारी को “अपवाद” कहकर टालता है, तो यह उनके लिए भविष्य में बड़ा राजनीतिक संकट भी खड़ा कर सकता है। इस प्रकरण में केवल एक पार्षद ही नहीं, बल्कि सत्ता, समाज और कानून की नाजुक संतुलन व्यवस्था भी कठघरे में है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस केस को निष्पक्षता से अंजाम तक पहुँचाएगा, या यह भी राजनीतिक ‘मैनेजमेंट’ का हिस्सा बनकर दफन हो जाएगा।