अंकिता एक नाम, जो आज भी इंसाफ की राह देख रहा है। वक्त बीतता गया, लेकिन सवाल आज भी वहीं के वहीं हैं—आख़िर अंकिता को इंसाफ क्यों नहीं मिला? इन्हीं सवालों के साथ आज पौड़ी पहुंचीं जानी-मानी ब्लॉगर, जिन्होंने अंकिता के परिवार से मुलाकात कर उनके दर्द को सुना और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े किए। उत्तराखंड की चर्चित ब्लॉगर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर ज्योति अधिकारी पौड़ी जिले में अंकिता भंडारी के गांव पहुंचीं। उन्होंने यहां अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और लंबे समय तक परिवार के साथ बातचीत की। इस मुलाकात की जानकारी ज्योति अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की। परिजनों से बातचीत के दौरान ज्योति अधिकारी ने कहा कि अंकिता का परिवार पिछले चार वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। उन्होंने इस पूरे मामले को बेहद पीड़ादायक बताते हुए कहा कि अंकिता के साथ हुई घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। ज्योति अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वह हर हाल में अंकिता के परिवार के साथ खड़ी हैं और उनके दुख में सहभागी बनने के उद्देश्य से ही वह गांव पहुंचीं। ज्योति अधिकारी ने सोशल मीडिया पर अंकिता के परिवार और उनके घर को लेकर फैल रही बातों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब वह खुद परिवार के घर पहुंचीं, तब उन्हें उनकी वास्तविक परिस्थितियों का अंदाजा हुआ। उन्होंने बताया कि परिवार बेहद सीमित संसाधनों में जीवन यापन कर रहा है और उनकी एकमात्र मांग है कि अंकिता को इंसाफ मिले। ज्योति अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी इस न्याय की लड़ाई में परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी।
दोस्तो ब्लॉगर ने बताया कि वह पहले भी अंकिता के परिजनों से मिलने की इच्छा रखती थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से यह संभव नहीं हो सका। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत इन दिनों काफी खराब है, जिससे परिवार की मानसिक और शारीरिक परेशानियां और बढ़ गई हैं। इसके अलावा दोस्तो इस दौरान ज्योति अधिकारी ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से मिले सहयोग से एकत्र की गई धनराशि अंकिता के माता-पिता को आर्थिक मदद के रूप में सौंपी। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की आवाज उठाने के कारण उन्हें छह दिन जेल में भी रहना पड़ा था, लेकिन वह पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। उनका कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज और बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। दोस्तो इस मुलाकात के दौरान अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने एक बार फिर जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि मामले में सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन सबसे अहम पहलू अब भी सामने नहीं आया है। उनका कहना था कि कथित वीआईपी की पहचान उजागर होना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि घटना के दिन यमकेश्वर की विधायक रेणु बिष्ट की कॉल डिटेल की पूरी जांच की जाए, साथ ही भाजपा से जुड़े जिन लोगों के नाम कथित वीआईपी के तौर पर सामने आ रहे हैं, उनकी कॉल डिटेल और लोकेशन भी खंगाली जाए, ताकि सच सामने आ सके। वीरेंद्र भंडारी ने साफ कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाया नहीं जाना चाहिए, तभी उनकी बेटी को न्याय मिल पाएगा। दोस्तो गौर करने वाली बात ये कि ज्योति अधिकारी उत्तराखंड की जानी-मानी ब्लॉगर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हैं। इससे पहले वह अंकिता भंडारी मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल रही हैं। इसी दौरान उन पर दरांती लहराने, आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल और लोक देवताओं को लेकर टिप्पणी करने जैसे आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया था और कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। दोस्तो जैसा की पूरी देश जानता अंकिता भंडारी हत्याकांड सितंबर 2022 में पौड़ी गढ़वाल जिले में सामने आया था। वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्या और उसके दो साथियों ने अंकिता को चीला नहर में फेंक दिया था। यह भी आरोप सामने आए थे कि कथित वीआईपी को ‘एक्स्ट्रा सर्विस’ देने से इनकार करने पर अंकिता की हत्या की गई। इस मामले में पुलकित आर्या, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को गिरफ्तार किया गया था और मई 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाल के दिनों में बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर की बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित रूप से किसी वीआईपी का जिक्र किया गया था। इसके बाद कांग्रेस और कई सामाजिक संगठनों ने उस वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी। इसी क्रम में हुए एक प्रदर्शन के दौरान ज्योति अधिकारी भी शामिल हुई थीं, जिसके बाद उनसे जुड़ा विवाद और गहरा गया। यह पूरा मामला एक बार फिर अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है।