चमोली जिले के नंदानगर में आई भीषण आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। आपदा ने इंसानी जिंदगियों को झकझोर कर रख दिया है। पहाड़ों की खूबसूरती के बीच बसे गांव अब खामोशी और मातम में डूबे हुए हैं। Chamoli Nandanagar Disaster जिसमें कुंतरी गांव की कांता देवी और उनके जुड़वा बच्चों की दुखद कहानी भी शामिल है। जब यहां खोजबीन टीम ने मलबे में दबे कांता देवी और उनके बच्चों के शवों को निकाला, तो वहां मौजूद सभी की आंखों में आंसू आ गए। मलबे में दफन कांता देवी ने अपने दोनों बच्चों को सीने से लगाकर रखा था। कुंवर सिंह की पत्नी कांता देवी (38) और उनके 10 साल के जुड़वां बेटे अब इस दुनिया में नहीं रहे. ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि जब रेस्क्यू टीम कुंवर सिंह के मकान के अंदर पहुंची तो वहां का मंजर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं, क्योंकि कांता देवी अपने दोनों बेटों विशाल और विकास को सीने से कसकर लगाए हुए मलबे में दबी हुई थीं। मानों आखिरी सांस तक मां ने अपने बच्चों को बचाने की कोशिश की हो, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
विकास और विशाल कक्षा चार में पढ़ते थे। कुंवर सिंह मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे और हाल ही में उन्होंने नया मकान बनवाया था, लेकिन आपदा ने उनकी खुशियों को छीन लिया। श्रीनगर मेडिकल कालेज में भर्ती कुंवर सिंह ने स्थानीय लोगों से बातचीत में बताया कि सैलाब आने से पहले पत्नी और बच्चों को सुरक्षित घर से बाहर भेज दिया था। इसके बाद भी उनकी जान नहीं बच सकी। कमरे में कुंवर सिंह का आधा शरीर मलबे में दबा हुआ था। चेहरे पर भी मिट्टी जमा थी, लेकिन रोशनदान से उन्हें सांस लेने में मदद मिलती रही। कुंवर सिंह को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनकी पत्नी कांती देवी सहित दोनों बेटे मलबे में दबे हुए हैं। लेकिन अब जब उनकी पत्नी और दोनों जुड़वा बच्चों के शव मिले तो पूरा गांव बिलख पड़ा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार इस आपदा में हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। चमोली की इस त्रासदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पहाड़ों की गोद में बसी जिंदगी कितनी असुरक्षित है।