दोस्तों, आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी, जिसने सभी का दिल जीत लिया। 80 साल की भागीरथी देवी ने उजड़े जंगल को नया जीवन दिया, उनकी इस अद्भुत पहल के लिए डीएम ने उन्हें सम्मानित किया, जिसने सूने-सुन्ने जंगल में फिर से हरियाली बिखेरी। कैसे बनी भागीरथी देवी अपने पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा और मिसाल। जी हां दोस्तो 80 साल की भागीरथी ने कर दिखाया वो कमाल। जहां थी वीरानी, वहां फिर से बसा दिया हरियाली का ख्याल। दोस्तो चंपावत जिले की 80 वर्षीय भागीरथी देवी ने उजड़े जंगल को नई जिंदगी है, जिसके लिए भागीरथी देवी को चंपावत जिलाधिकारी ने सम्मानित किया। भागीरथी देवी के इस कार्य की हर कोई सराहना कर रहा है। चंपावत जिले के मानर क्षेत्र का जंगल अवैध कटान और उपेक्षा के कारण समाप्ति की कगार पर था। ऐसे में भागीरथी देवी ने बिना किसी सरकारी सहायता के अकेले ही पौधरोपण का संकल्प लिया। दोस्तो भागीरथी देवी ने हजारों पौधे रोपकर वर्षों तक उनकी देखभाल की, जिस पर चंपावत जिलाधिकारी मनीष कुमार ने भागीरथी देवी के पर्यावरण संरक्षण के संकल्प एवं वनों को पुनर्जीवन देने के बेहतरीन कार्य को देखते हुए जिला मुख्यालय बुलाया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों के समक्ष भागीरथी देवी को सम्मानित कर युवाओं को भी उनका अनुसरण कर पर्यावरण संरक्षण की अपील की है।
दोस्तो भागीरथी देवी मूल रूप से चम्पावत जिले के दूरस्थ ग्राम मानर मल्ला (खेतीखान) की रहने वाली है। जिले के दूरस्थ मानर क्षेत्र का जंगल अवैध कटान और उपेक्षा के कारण समाप्ति की कगार पर था, जिसे सवारने का 80 साल की भागीरथी देवी ने बीड़ा उठाया। दोस्तो अब आपको बताता हूं कि कैसे 80 साल की भागीरथी देवी ने पेश की मिसाल। दोस्तो 80 साल की भागीरथी देवी ने अपने लंबे संघर्ष के बाद जंगल के विभिन्न क्षेत्र में वृक्षारोपण कर उसे दोबार से हर भरा बनाकर एक मिसाल पेश की. भागीरथी देवी ने कड़ाके की ठंड और तेज धूप की भी परवाह नहीं करती थी, वो हर हाल में जंगल जाती थी और पौधों को पानी देती थी। भागीरथी देवी ने अपने बच्चों की तरह इस पेड़ों की सुरक्षा की और उन्हें विकसित किया। दोस्तो उम्र के इस पड़ाव पर भागीरथी देवी के पर्यावरण व वनों के संरक्षण के समर्पण की कहानी सुन जिले के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने भागीरथी देवी को जिला मुख्यालय में आमंत्रित कर सम्मानित किया है. जिलाधिकारी मनीष कुमार के अनुसार भागीरथी देवी का पर्यावरण संरक्षण हेतु किया गया कार्य युवाओं के लिए प्रेरणा दायक है।
दोस्तो जिलाधिकारी के अनुसार, भागीरथी देवी के द्वारा वनों के संरक्षण के लिए निस्वार्थ भाव से किए समर्पित किया जिसके बुते अब उस क्षेत्र का जंगल लहलहा रहा है। उनकी मेहनत का नतीजा है कि आज उजड़ने की कगार में पहुंचा वन क्षेत्र सघन हरित वन में तब्दील हो चुका है, जहां पेड़-पौधों के साथ पक्षियों और वन्यजीवों की मौजूदगी भी बढ़ गई है। इसके साथ ही जिलाधिकारी मनीष कुमार ने भागीरथी देवी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भाव से कोई भी व्यक्ति बड़ा बदलाव ला सकता है। जिलाधिकारी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर उसकी देखभाल सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी मनीष कुमार के अनुसार भागीरथी देवी की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। तो दोस्तों, ये कहानी सिर्फ एक जंगल की हरियाली लौटाने की नहीं है। ये कहानी है जज़्बे की, हौसले की और उस जुनून की, जो उम्र की सीमाओं को भी पीछे छोड़ देता है। 80 साल की भागीरथी देवी ने ये साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सूखी धरती भी फिर से हरी हो सकती है और एक अकेला इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। आज जरूरत है कि हम सब भी इस सोच को अपनाए, एक पौधा लगाएं, उसे बचाएं और प्रकृति को लौटाएं उसका हक।