रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि से बड़ी खबर सामने आ रही है। मुनि महाराज की डोली यात्रा के दौरान मैदान में प्रवेश को रोकने वाला गोल गेट तोड़ने की घटना के बाद प्रशासन सख्त हो गया है। अब गेट तोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। Protest against Agastyamuni Stadium आइए जानते हैं इस घटना की पूरी कहानी और क्यों प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है, पूरी खबर देखिए केसे मुनि महाराजर की यात्रा पर बवावल की वजह। दोसतो अगस्त्यमुनि महाराज की डोली ने हजारों भक्तों के साथ अगस्त्यमुनि मैदान में प्रवेश कर लिया है। इससे पहले आक्रोशित भक्तों ने गोल गेट को तोड़ दिया। इस गेट को तोड़ने में भक्तों को करीब साढ़े तीन घंटे का समय लग गया। इस दौरान आक्रोशित भीड़ की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई. वहीं, डीएम प्रतीक जैन ने गेट तोड़ने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की बात कही, अब आपको बताता हूं कि क्या है मामला? गैर कीजिएगा, दोस्तो केदारघाटी के अगस्त्यमुनि में प्रसिद्ध अगस्त्य मंदिर में मुनि महाराज विराजते हैं। यहां अगस्त्य या अगस्तमुनि महाराज के नाम पर खेल मैदान है। जहां पर प्रशासन की ओर से स्टेडियम निर्माण करवाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण नहीं चाहते कि इस स्थान पर स्टेडियम का निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि ये खेल मैदान मुनि महाराज का है, जहां पर बच्चों को खेलने कूदने में आसानी होती है।
अगर यहां स्टेडियम का निर्माण किया जाता है तो यहां के लोगों को बाहरी लोगों के हाथों की कठपुतली बनना पड़ेगा। ऐसे में स्टेडियम निर्माण के विरोध में बीते एक महीने से खेल मैदान में मुनि महाराज की गद्दीस्थल के पास ग्रामीण धरने पर बैठे हुए हैं, इतना भर नहीं है लोगों की नारजगी। उनकी श्रद्धा को लेकर है। ग्रामीणों ने इस बार 15 साल बाद अगस्त्यमुनि महाराज की डोली दिवारा यात्रा का आयोजन किया है, जिसके तहत मकर संक्रांति के पर्व पर अगस्त्य मंदिर से मुनि महाराज की डोली को खेल मैदान मेंं स्थित गद्दीस्थल पर जाना था, लेकिन खेल मैदान का गेट गोल आकार का होने के चलते डोली अंदर को प्रवेश नहीं कर पाई। ऐसे में ग्रामीणों ने मकर संक्रांति पर्व पर यानी 14 जनवरी को करीब पांच घंटे तक केदारनाथ हाईवे पर गोल गेट को तोड़े जाने की मांग की, लेकिन गेट नहीं तोड़े जाने पर डोली वापस मंदिर को लौटी। इस दौरान केदारनाथ हाईवे पर जाम लग गया था जिसमें वाहन घंटों तक फंसे रहे। जिससे यात्रियों से लेकर अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, गुरुवार यानी 15 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डोली ने दोबारे अगस्त्यमुनि खेल मैदान में अपने गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान किया। रास्ते में गोल गेट टूटा न मिलने पर मुनि महाराज के सेवक और श्रद्धालु आक्रोशित हो गए. मेन गेट तोड़ने को लेकर सवा 12 बजे के आसपास लोगों ने प्रयास शुरू किया, लगातार कई घंटे तक प्रयास के बाद करीब शाम चार बजे श्रद्धालु गेट तोड़ने में सफल रहे। इसके बाद मुनि महाराज की डोली अपने नेजा-निशानों के साथ अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल के लिए रवाना हुई।
डोली के अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान पहुंचने पर हजारों श्रद्धालु वहां जमा हो गए। सबसे पहले डोली ने स्टेडियम निर्माण स्थल पर पहुंचकर कुछ देर तक नृत्य किया। इसके बाद डोली गद्दीस्थल में विराजमान हुई, जहां मुनि महाराज के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। यहां पुजारियों ने मुनि महाराज को भोग भी लगाया। सामाजिक कार्यकर्ता कहना ये कि साल 2004 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष के हस्ताक्षर से मुनि महाराज की भूमि को खेल विभाग को हस्तांतरित किया गया था, जिसके कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। यह भूमि पिछले करीब पांच दशकों से मुनि महाराज की रही है। प्रशासन को हठधर्मिता छोड़नी होगी, अन्यथा इससे बड़ी आपदा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जब इतना बड़ा मामला ये बन गया तो प्रशासन की कार्यशैली को लेकर पहले से कई सवाल उठ रहे थे, ऐसे में एक तरफ प्रशाशनिक कार्यशैली तो दूसरी तरफ लोगों की आस्ता का केंन्द्र मुनि महाराज की यात्रा एसे में प्रतीक जैन, डीएम, रुद्रप्रयाग कहते हैं कि धार्मिक भावनाओं की आड़ में कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं। जिन लोगों ने गेट तोड़ने का काम किया है, उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिसमें गुंडा एक्ट भी शामिल रहेगा। दोस्तो गेट एसडीएम एसएस सैनी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के बगल से कोई गोल गेट नहीं था और डोली संचालन समिति के पदाधिकारियों से वैकल्पिक मार्ग से जाने को कहा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित लोग मामले को अनावश्यक रूप से तूल देकर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास कर रहे हैं। ड्रोन कैमरों के माध्यम से गेट तोड़ने वालों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।