इधर मुख्यमंत्री धामी ने पेपर लीक मामले की CBI जांच की संस्तुति दी और उधर त्रिवेंद्र सिंह रावत के घर मिठाइयाँ बंटने लगीं, पटाखे फूटे। सवाल ये है कि CBI की संस्तुति पर जश्न क्यों मनाया जा रहा है?क्या ये ‘इंसाफ’ की जीत है या ‘सियासत’ की चालाकी?जो मामला बेरोजगारों की आंखों में आंसू और भविष्य में अंधेरा भर गया। Uttarakhand Paper Leak Case उसी पर जश्न और सियासी गुलाल क्यों उड़ रहा है? आज बात होगी उस सियासत की, जो युवाओं की उम्मीदों पर सवार होकर जश्न मना रही है। आज बात होगी ऐसे पूर्व मुख्यंत्री जिसके जिसके कार्यकाल में हाकम सिंह जैसे नकल माफिया फले फूले आज वो नेता के यहां जश्न इस बात का कि पेपर लीक मामले में उन्होंने सीबीआई जांच की मांग वाला बयान दिया। इसी पर पड़ताल करने जा रहा हूं, ये रिपोर्ट देखिए — और खुद तय कीजिए, ये कौन सी राजनीति है और किसके लिए? और क्या कहता है ये जश्न। दोस्तो अब फैसला किसने लिया कियों लिया ये तो सब जानते ही हैं, लेकिन क्या ऐसा भी हो सकता है जैसा पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के यहां दिखाई दिया। कैसे श्रेय लेने की सियासत हो रही है, सोमवार को जैसे ही पेपर लीक मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की संस्तुति दी, वैसे ही पूर्व सीएम और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के घर जश्न जैसा माहौल देखने को मिला।
त्रिवेंद्र रावत ने मौके को भुनाते हुए कहा कि सरकार ने उनकी बात को माना है, इसके लिए सरकार धन्यवाद की पात्र है, अच्छा जी दोस्तो उत्तराखंड में पेपर लीक और बेरोजगार युवाओं के आंदोलन के मामले में जमकर सियासत देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां उत्तराखंड की धामी सरकार ने तकरीबन 8 दिन से धरने पर बैठे बेरोजगार युवा संगठनों के सामने हार मानते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति दे दी है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा जैसे ही सीबीआई जांच की मंजूरी दी गई, ठीक उसी समय पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के घर ढोल बाजे बजने लगे। त्रिवेंद्र रावत की जय जयकार होने लगी और देहरादून डिफेंस कॉलोनी स्थित पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के घर खूब आतिशबाजी की जाने लगी और जमकर जश्न मनाया गया लेकिन जश्म किस बात का मुझे पता नहीं चला, लेकिन देहरादून के कुछ पत्रकार सोसल मीडिया पर इस जश्न को कैसे देखते हैं वो वो दिखा रहा हूं। उसके बाद आप खुद समझ जाएंगे कि मामला क्या है।
उत्तराखंड के वरिष्ट पत्रकार अपने फेसबुक पोस्ट में त्रिवेद्र रावत के घर इस जश्न को कैसे देखते हैं वो लिखते हैं, जों बोलूंगा सच बोलूंगा, भली लगे या बुरी ये किस बात का जश्न चल रहा हैं मेरी समझ से परे हैं। केवल बयान देने से क्या CBI हो जाती हैं क्या, नहीं ना, बीजेपी वालों क्यों नेता की फ़जीहत करवाते हो Trivendra Singh Rawat ईमानदार नेता हैं उन्होंने युवाओं के दर्द क़ो मानते हुए जब पत्रकार द्वारा सवाल पूछा गया तब बयान दिया गया खुद से बयान जारी थोड़े किया ऐसे मे इस तरह के ढ़ोल तशे बजाये जा रहें हैं पूर्व सीएम के घर पर आंदोलन चल रहा था जैसे बीजेपी के इन कार्यकर्ताओ ने CBI दिलाने का आंदोलन किया हो नहीं ना जीत युवाओं की हैं उन्हें जश्न मनाने दो आंदोलन उनका हैं CBI की मांग उनकी थी, सड़क पर वो थे किसी और क़ो उसका श्रेय नहीं जा सकता। फैसला धामी सरकार का हैं और जश्न कहा मन रहा हैं। क्या केवल बयान देने से CBI हो जाती हैं अगर हो जाती हैं तो NH 74, छात्रवृत्ति घोटाले पर CBI क्यों नहीं हुई। आपने बयान दिया बस जश्न मनाने जा हक उनका ही हैं जों 8 दिन तक गर्मी बरसात मे सड़को पर थे। इतना भर नहीं है एक और पत्रकार की पोस्ट को आपके साथ साझा कर रहा हूं। इसके अलावा में और कुछ सवाल करूं उससे पहले आप ये मामले को देखिए सीबीआई जांच को लेकर रावत जी का नजरिया क्या रहा है।
ये सवाल जो कांग्रेस के हवाले से पत्राकारों ने त्रिवेंद्र सिह रावत से किया तो उनका जवाब क्या था आपने सुन लिया लेकिन मामला मै आपको याद दिला देता हूं। ये मामला 2020 का है अगर में गलत नहीं हूं तो तब के उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने खिलाफ सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। तब दोस्तो उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस रवींद्र मैठाणी ने तब के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर एक पत्रकार द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों की जांच के आदेश दिए थे। आज मुख्यमंत्री धामी के सीबीआई जांच के फैसले का श्रेय त्रिवेंद्र रावत ले रहे कि उन्होने मांग की तो धामी ने फैसाला ले लिया। दोस्तो जब पेपर लीक पर हाकम सिंह गिरफ्तारी पर सवालों और सियासत गर्माई थी हाकम सिंह का त्रिवेद्र रावत के कनेक्शन को जोड़ा गया। साल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के दौरान हाकम सिंह की मां के लिए विशेष हेलीकॉप्टर भेजा गया था। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र और हाकम सिंह के बीच रिश्तों पर सवाल खड़े किए हैं। तब सवाल पूछ गया कि आखिरकार एक साधारण महिला के लिए राज्य सरकार को हेलीकॉप्टर भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और क्या इसके पीछे कोई खास राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंध छिपे थे?तो उत्तराखंड की राजनीति में सीबीआई जांच के फैसले ने जहां एक ओर युवाओं को उम्मीद दी है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में हलचल भी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री धामी के इस फैसले पर जहां सवाल उठ रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की प्रतिक्रियाएं भी कई संदेश दे रही हैं। अब देखना यह होगा कि यह जांच कितना सच सामने लाती है, और क्या इससे राज्य की व्यवस्था में भरोसा बहाल हो पाएगा। फ़िलहाल इतना ही — आप बने रहिए हमारे साथ, हर अपडेट के लिए।