क्या करोड़ों के चढ़ावे में हो गया बड़ा खेला? | Kenchi Dham | HC Notice | Nainital | Uttarakhand News

Spread the love

वैसे तो कहने वाले कहते हैं की लूट मची है लूट लो जो जीतना लूटना चाहता है..जैसे लूटना चाहता है। आपने जल जंगल जमीन की लूट खसूट खूब देखी होगी। आपने सैकड़ों अजब-गजब किस्म के घपले-घोटाले जरूर अपने उत्तराखंड में जरूर देखें होगे लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि आत्मा पर चोट मारी जा रही है। दोस्तो अपनी देवभूमि में अपने धाम मठ मंदिर आत्मा ही तो हैं यहां लूट का खेल शुरू हो चुका है क्या वैसे एक मामला पहले भी आ चुका है। ऐसा ही और एक मामला और जो चौका रहा है। दोस्तो उत्तराखंड के पवित्र धामों में श्रद्धालुओं का विश्वास अपार है। इसलिए ये विश्वार करोड़ों के चंदे में बदलता है, लेकिन सवाल ये उठता है कि यह पैसा किस रास्ते से कहा जाता है? हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। क्या करोड़ों के चढ़ावे में कोई बड़ा खेला हुआ है? दोस्तो उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने बाबा नीम करौली के कैंची धाम मंदिर में कथित अव्यवस्थाओं और वित्तीय अनियमितताओं का स्वतः संज्ञान लिया है। पिथौरागढ़ के एक भक्त की शिकायत पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने राज्य सरकार, नैनीताल डीएम, एसडीएम और मंदिर ट्रस्ट को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में ट्रस्ट को सरकारी नियंत्रण में लाने और वित्तीय पारदर्शिता की मांग की गई है दरअसल भक्त ने शिकायत में कहा है कि करोड़ों के चढ़ावे का दुरुपयोग हो रहा है।

दोस्तो कोर्ट की सुनवाई के बाद प्रसिद्ध कैची धाम में गड़बड़ियों के मामले में हाईकोर्ट ने अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को न्यायमित्र अधिवक्ता नियुक्त किया है। सरकार, डीएम नैनीताल सहित अन्य पक्षकारों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई के लिए 4 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। साथ में कोर्ट ने रजिस्ट्री से कहा है कि जनहित याचिका की प्रति न्यायमित्र को उपलब्ध कराएं। दोस्तो पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला की ओर से भेजे गए पत्र पर हाईकोर्ट ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि बाबा नीम करौली द्वारा स्थापित इस धाम का संचालन करने वाले ट्रस्ट के बारे में मूलभूत जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। मंदिर ट्रस्ट का नाम, पंजीकरण, कार्यालय का पता, ट्रस्टियों की संख्या और नियुक्ति संबंधी जानकारी स्थानीय प्रशासन और रजिस्ट्रार कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। दरअसल दोस्तो कैंची धाम में हर साल करोड़ों का चढ़ावा आता है लेकिन करोड़ों रुपये के चढ़ावा और आय-व्यय का खुलासा नहीं किया जाता। विदेशी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए विदेशी श्रद्धालुओं के एफसीआरए, लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट जारी न करने पर भी सवाल उठाए गए हैं. कहा गया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ धाम का संचालन एक अधिनियम और जागेश्वर मंदिर का प्रबंधन जिला प्रशासन की निगरानी में एक समिति के माध्यम से होता है। देशभर में भी मंदिरों में निगरानी की ठोस व्यवस्था है। साथ ही दोस्तो देश के कुछ मंदिर समितियों की तर्ज पर नियंत्रण रखने की मांग भी की जा रही है यह भी कहा गया है कि धार्मिक ट्रस्टों का पंजीकरण भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत होता है। इसलिए ट्रस्ट, पंजीकरण, ट्रस्टियों के संबंध में जानकारी, संपत्ति और वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए। याचिका में मंदिर ट्रस्ट को जागेश्वर धाम और बदरी-केदारनाथ मंदिर समिति की तर्ज पर सीमित सरकारी नियंत्रण में रखने की मांग उठाई गई है।

दोस्तो कैंची धाम उत्तराखंड में है ये बाबा नीम करौली या बाबा नीब करौरी का मंदिर है, जो नैनीताल जिले में स्थित है। बाबा नीम करौली को हनुमान जी का भक्त माना जाता है। कैंची धाम मंदिर के स्थापना दिवस पर यहां बहुत बड़ा मेला लगता है. इस मेले में लाखों लोग आते हैं। वैसे उत्तराखंड वाले ज्दातर लोग इन बातों को जानते हैं कि मंदीर कहां किसका है। कैसे यहां पहुंचा जा सकता है। अगर आप नहीं जानते या आप उत्तराखंड के बाहर इस इस खबर को देख रहे हैं तो आपको बता दूं कि कैंची धाम पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा दिल्ली के बाद पंतनगर है. दिल्ली और पंतनगर दोनों स्थानों से यहां के लिए बस सेवा मिलती है। नजदीकी रेलवे स्टेशन हल्द्वानी और काठगोदाम हैं. इन स्थानों से बस, टैक्सी या निजी वाहन से जा सकते हैं हल्द्वानी से कैंची धाम पहुंचने में करीब 2 घंटे लगते हैं। नैनीताल से कैंची धाम 30 से 45 मिनट में पहुंच सकते हैं खैस यहां तो आप पहुंच ही जाएंगे जिसे बाबा बुलाएंगे लेकिन मौजूदा वक्तम में यहां चढने वाले चढावे को लेकर सवाल हो रहा है और उसके रिकॉर्ड को लेकर कोर्ट तक सवाल पूछ रहा है वैसे दोस्तो बड़ी बिडंबना ये कि इससे पहले आपको याद होगा एक मामला बाबा केदार से सामने आया था जहां कह दिया गया था कि सैकड़ों किलो सोना गायब हो गया या कर दिया गया या फिर आप इसे ऐसे पूछ सकते हैं कि कहां गया। अब कैंची धाम का चढावा क्या अब अपनी देवभूमि के मंदिर भी लूटे जाएंगे।