उत्तराखंड में फिर होगा दलबदल ! | Uttarakhand News | Congress Vs BJP | Karan Mahara | Harish Rawat

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उत्तराखंड में होगा फिर दलबदल!, जी हां दोस्तो 2027 की तैयारी या कांग्रेस की बिखरती दीवारें?2 तस्वीरें, 3 नाम, और उत्तराखंड की राजनीति का बदलता मूड! दगड़ियो क्या उत्तराखंड में फिर एक बड़ा दलबदल देखने को मिलेगा, क्योंकि प्रदेश का राजनीति का पारा इन दिनों हाई है। वजह? कुछ तस्वीरें, कुछ मुलाकातें और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का एक तीखा दावा, जो कुछ दिन पहले उन्होने किया था। सवाल है:क्या कांग्रेस फिर टूट की कगार पर है?क्या बीजेपी 2027 की सत्ता वापसी के लिए विपक्ष की रीढ़ तोड़ने में जुट गई है?और सबसे बड़ा सवाल — क्या कांग्रेस नेताओं के चेहरे अब दो खेमें में बंट चुके हैं?दोस्तो ये खबर बेहद अहम होने जा रही है। क्योंकि जो सियासी खुसपुहट है ना वो तो कुछ इसी ओर इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ा प्रदेश की राजनीति में होने जा रहा है। कांग्रेस के एक्टिव नेताओं क्या बीजेपी की नजर है। ये सब बताने की कोशिक करने जा रहा हूं, दोस्तो ये तो सभी जानते हैं कि बीजेपी वाले कितनी मजबूती के साथ चुनाव लड़ते हैं और बीजेपी वाले को किसी भी कीमत पर जीत चाहिए। बीजेपी की रणनीति क्या बल, बीजेपी की ‘वापसी रणनीति’: विपक्ष को भीतर से कमजोर करना? एक सवाल के तौर में पूछ रहा हूं।

बीजेपी उत्तराखंड में 2027 की रणनीति पर अभी से काम कर रही है। कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती — न जनता के बीच, और न ही विपक्ष के भीतर, जी हां बीजेपी के विपक्ष के भीतर से कुछ नीकालने की फिराक में है या कांग्रेस वाले कुछ बीजेपी के पाले में हो सकते हैं। मुख्य टारगेट: कांग्रेस के एक्टिव, ज़मीनी और फील्ड में मजबूत नेता, अब आपके मन में ये सवाल होगा कि मै ये सब क्यो कह रह हूं वो सब बताउंगा और आपके क्यों? जवाब भी दगड़ियो क्योंकि बीजेपी जानती है कि कमजोर विपक्ष ही उसकी सत्ता वापसी की सबसे मजबूत गारंटी है। अब बात करता हूं कैसे तस्वीरों का ‘सियासी तापमान’ बढ गया है। मुलाकातें जो बीजेपी को मजबूती और कांग्रेस को बेचैनी दे रही हैंसामने आई दो तस्वीरों ने सियासी गलियारों में तूफान आने वाले वाला है। सूर्यकांत धस्माना, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करते हैं, ज्योति रौतेला, महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष — वही मुख्यमंत्री से चुपचाप मीटिंग कर आती है। इन बैठकों में क्या बात हुई, यह तो सामने नहीं आया —लेकिन इतना जरूर हुआ कि इन तस्वीरों ने कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी और बीजेपी को खुला मैदान दे दिया। अब थोड़ा पिछे मुड़कर देखेगे तो मिलेगा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का दावाबड़ी टूट होगी कांग्रेस में बहुत जल्द कांग्रेस में एक और बड़ी टूट देखने को मिलेगी। कुछ चेहरे अंदर से तैयारी कर चुके हैं। बस वक्त का इंतजार है।

ये अंदाज है प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी का, ये एक सीधा संकेत था — पार्टी तोड़ने की “फील्डिंग” लग चुकी है। क्या संकेत मान लिया जाय, अब गेंद बीजेपी के पास है, और विकेट कांग्रेस के हैं। कांग्रेस के ये तीन नाम, बीजेपी के रडार पर क्यों?सूर्यकांत धस्माना — प्रदेश उपाध्यक्ष, पार्टी के पुराने चेहरे। संगठन में दमदार पकड़ और ग्राउंड वर्क में एक्टिव, ज्योति रौतेला — महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष, महिला मोर्चे में मजबूत पकड़, कई जिलों में प्रभाव। गणेश गोदियाल — गढ़वाल के सीनियर नेता, विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण चेहरा, पुराने वक्त से बीजेपी की रणनीति में संभावित टारगेट। ये तीनों नाम कहीं न कहीं बीजेपी की नजर में हैं क्योंकि ये डील ब्रेकर साबित हो सकते हैं कांग्रेस के लिए.. अब सवाल आता है कांग्रेस का क्या कांग्रेस एक और टूट झेल पाएगी?साल 2022 के चुनाव से पहले भी कांग्रेस ने कई नेता खोए और वो हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य जैसे नेता पाला बदले वाली बात तो कोई भूला नहीं होगा, तब नतीजा, कांग्रेस को कई सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा था। अब फिर वही माहौल?अगर 2025 या उससे पहले कोई बड़ा चेहरा चला गया, तो कांग्रेस को चुनाव से पहले ही पलटी का झटका ग सकता है। थोड़ा ये भी समझना होगा कि क्या भीतर से कमजोर हो रही कांग्रेस या सिर्फ सियासी दाव? कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने बेचैनी है।

संगठन में दरार की बात पहले से चल रही है, कुछ नेताओं को टिकट न मिलने का मलाल है, कुछ को तवज्जो न दिए जाने की टीस ऐसे में अगर बीजेपी इमोशनल इंजीनियरिंग + पॉलिटिकल पिचिंग करे, तो क्या होगा?सवाल ये है कि अगर ये मुलाकातें सामान्य थीं, तो कांग्रेस ने कोई सफाई क्यों नहीं दी?क्यों संगठन ने अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं जारी किया?क्या यह संकेत है कि कुछ पक चुका है, बस परोसना बाकी है? राजनीतिक पंडितों की राय ये है कि बीजेपी की टाइमिंग परफेक्ट है — जब कांग्रेस अपने संगठनात्मक चुनावों और सांगठनिक बदलावों में उलझी है। बीजेपी नेतृत्व अब ‘परसेप्शन की लड़ाई’ जीतने की तैयारी में है — और इसमें सबसे आसान टूल है कांग्रेस को भीतर से तोड़ना, तो क्या 2027 से पहले कांग्रेस होगी आधी?उत्तराखंड में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल जाएंगे। कांग्रेस अगर एक्टिव चेहरों को रोक नहीं पाई, तो अगला चुनाव सिर्फ लड़ने भर की औपचारिकता रह जाएगा, और बीजेपी?वो हर उस कमजोर ईंट को खींच रही है, जिससे विपक्ष की दीवार खुद-ब-खुद गिर जाए।