Dehradun सड़क पर उतरी महिलाएं तो लेना पड़ा एक्शन! | LPG Shortage | Protest | Uttarakhand News

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दोस्तों, देहरादून में एक बार फिर लोगों का धैर्य फूट पड़ा और वजह है घरेलू गैस सिलेंडर की लगातार किल्लत! देहरादून के भुड्डी गांव की महिलाएं उठीं और शिमला बाईपास पर सड़क जाम कर दिया। ट्रैफिक पूरी तरह ठप, नारेबाजी और हंगामा। प्रशासन ने आखिरकार बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। आखिर इतनी गंभीर समस्या के बावजूद इतनी देर तक गैस की आपूर्ति क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया? और अब एक्शन हुआ तो क्या हुआ बहताउंग आपको पूरी खबर। देहरादून के भुड्डी गांव में घरेलू गैस सिलेंडर की लगातार किल्लत से लोगों का धैर्य के जवाब देने की हैं। महिलाओं ने Shimla Bypass पर सड़क जाम कर दिया और गैस एजेंसी संचालक व जिला आपूर्ति विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सड़क पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोस्तो ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई दिनों से भुड्डी गांव और आसपास के इलाकों में गैस सिलेंडर की डिलीवरी पूरी तरह ठप है। लोगों का कहना है कि उन्होंने 15 से 20 दिन पहले सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन अब तक सप्लाई नहीं हुई। रोज एजेंसी के चक्कर लगाने के बावजूद हर बार “स्टॉक नहीं है” कहकर वापस भेज दिया जाता है।

दोस्तो हालात ऐसे हो गए हैं कि कई परिवारों को खाना बनाने के लिए लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाएं सड़क पर उतर आईं और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने एजेंसी संचालक के खिलाफ नारे लगाए और आपूर्ति विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की। कुछ ही देर में आदमी भी इस प्रदर्शन में शामिल हो गए और सभी ने मिलकर सड़क पर बैठकर ट्रैफिक रोक दिया। दोस्तो प्रदर्शन के चलते Shimla Bypass पर लंबा जाम लग गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं, जिससे आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोस्तो जब हंगामा बढा तो पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे सड़क खाली नहीं करेंगे। दोस्तो करीब दो घंटे बाद प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम खोल दिया गया लेकिन अभी खबर यहीं खत्म नहीं होती है। आगे देखिए वो बड़ा फैसला और विवाद की असल जड़ क्या थी। शाम होते होते जिला प्रशासन की एक प्रेस रीलीज होती है जिसमें कहा जाता है कि एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुचारु बनाए रखने हेतु जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई करते हुए मैसर्स हीरा गैस सर्विस के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की गई है। कहा गया गया।

जिलाधिकारी सविन बंसल के संज्ञान में लंबे समय से उक्त गैस एजेंसी के विरुद्ध वितरण संबंधी अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में एजेंसी द्वारा गैस वितरण में अनियमितताएं पाए जाने की पुष्टि हुई। साथ ही दोस्तो उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसे प्राथमिकता में रखते हुए मैसर्स हीरा गैस सर्विस के सभी लगभग 14,000 गैस कनेक्शनों को निकटवर्ती गैस एजेंसियों—अनिल इंडेन गैस सर्विस एवं आर्केडिया इंडेन गैस सर्विस—में स्थानांतरित कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने साफ कर दिया कि जनपद में गैस वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी गैस एजेंसियों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा निरंतर निगरानी रखी जा रही है तथा भविष्य में भी इस प्रकार की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दोस्तो जिस गैस एजेंसी खिलाफ कार्रवाई की गई है इस पर इससे पहले भी कई तरह के आरोप लगे हैं  और इसी का नतीजा है कि पहले जनता का गुस्सा फुटा फिर प्रशासन ने एजेंसी के खिलाफ ये बड़ा एक्शन ले लिया, लेकिन दोस्तो बस इतना भर है या और एजेंकियां मौजूदा वक्त में जनता को परेशानी में डालने का काम कर रहे हैं। क्या जिला प्रशासन सभी गैस एंजेसियों पर विशेष जांच बिठाएगा। दोस्तों, देहरादून के भुड्डी गांव की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि मूलभूत सुविधाओं की कमी कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। जनता का गुस्सा जब सीमा पार कर जाता है, तो प्रशासन को भी बड़े और ठोस कदम उठाने पड़ते हैं।जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा हीरा गैस सर्विस के खिलाफ जो सख्त कार्रवाई की गई, वह एक संदेश भी है—भले ही समस्या पैदा करने वाली एजेंसियां कितनी भी बड़ी हों, जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।लेकिन सवाल अब भी बरकरार है—क्या सिर्फ एक एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई से पूरी गैस आपूर्ति व्यवस्था सुचारु होगी, या जनता को अब भी हर समय सतर्क रहना पड़ेगा? क्या प्रशासन बाकी एजेंसियों पर भी कड़ी निगरानी रखेगा, ताकि भविष्य में ऐसी असुविधा फिर से न हो?