कोविड महामारी के कारण इस बार भी चारधामों में सीमित संख्या में ही दर्शन होंगे। सरकार की ओर से शीघ्र ही यात्रा शुरू करने की अधिसूचना जारी करने बाद देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की ओर से आज एसओपी (मानक प्रचालन प्रक्रिया) जारी की जाएगी। कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार यात्रा की तैयारियों में जुटी गई है।
यात्रा रोक हटाने से सरकार को राहत
28 जून को हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के खतरे और सरकार की आधी अधूरी तैयारियों के चलते चारधाम यात्रा पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापस लेकर सरकार फिर से हाईकोर्ट पहुंची। अब कोर्ट की ओर से यात्रा पर से रोक हटाने से सरकार को राहत मिली है।
पिछले साल की तरह इस बार भी केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम में दर्शन के लिए यात्रियों की संख्या सीमित होगी। देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट पर पंजीकरण करने के बाद यात्रियों को प्रतिदिन ई-पास जारी किए जाएंगे। जिसमें कोविड जांच की निगेटिव रिपोर्ट के साथ कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने पर ही दर्शन की अनुमति होगी।
यात्रा के लिए तैयारियां पूरी
चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि सरकार की ओर से यात्रा शुरू करने की अधिसूचना जारी की जाएगी। जिसके बाद बोर्ड की ओर से चारधामों में कोविड प्रोटोकाल का पालन करने के लिए एसओपी जारी की जाएगी। यात्रा के लिए तैयारियां पूरी है।
मजबूत पैरवी होती तो पहले खुल जाती चारधाम यात्रा
सरकार की ओर से मजबूत पैरवी होती तो चारधाम यात्रा के द्वार पहले ही खुल जाते। लेकिन यात्रा संचालन करने के लिए सरकार की तरफ से कमजोर होमवर्क भी दिखाई दिया। अब कोर्ट ने रोक हटाई तो यात्रा की राह में मौसम की चुनौतियां भी खड़ी है। चारधाम यात्रा के लिए लगभग डेढ़ माह ही समय बचा है। भारी बारिश से चारधाम यात्रा के सड़क मार्गों की हालत खराब है। कई संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बरकरार है।
25 जून को मंत्रिमंडल में सरकार ने यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया
जून माह में केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के कपाट खुल गए थे। कोविड महामारी के कारण यात्रा का संचालन न होने से किसी भी यात्रियों को चारधाम में दर्शन के लिए जाने की अनुमति नहीं थी। 25 जून को मंत्रिमंडल में सरकार ने यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया था। जिसमें पहले चरण में चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी जिले के स्थानीय लोगों को दर्शन करने की अनुमति दी गई।
जबकि दूसरे चरण में 11 जुलाई से प्रदेश से बाहर के यात्रियों को चारधाम यात्रा आने की अनुमति देने का निर्णय लिया था। हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के खतरे और चारधामों में व्यवस्थाएं न होने पर यात्रा पर रोक लगाई थी। हाईकोर्ट में मजबूत ढंग से पैरवी की होती तो चारधाम यात्रा के द्वार पहले ही खुल गए होते। हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दायर कर दी।
दबाव बढ़ने पर सरकार दोबारा हाईकोर्ट पहुंची। लेकिन सुप्रीमकोर्ट में मामला विचाराधीन होने पर कोर्ट ने सुनवाई से इनकार दिया। जिससे सरकार ने बैकफुट पर आकर सुप्रीमकोर्ट से एसएलपी वापस ली और फिर हाईकोर्ट से यात्रा पर रोक हटाने का आग्रह किया।
चारधाम यात्रा के लिए अब डेढ़ माह का समय बचा है। नवंबर माह तक चारधामों के कपाट छह माह के लिए बंद हो जाएंगे। मौसम की चुनौतियों के बीच यात्रा को रफ्तार मिलने की संभावना कम है। बारिश से सड़कों की हालत खराब है। संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
चारधाम चार महीने बाद घूमेगा चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबार का पहिया
चार महीने के बाद चारधाम यात्रा शुरू होगी। इससे चारधाम यात्रा से जुड़े कारोबार का पहिया घूमने लगेगा। कोरोना संक्रमण को लेकर हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा पर लगाई गई रोक हटा दी है। इससे पर्यटन कारोबारियों को राहत मिली है।
केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री चारधाम यात्रा प्रदेश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश के हजारों लोगों की आजीविका चारधाम यात्रा पर निर्भर है। पिछले दो सालों से कोविड महामारी के कारण पर्यटन कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। यात्रा का संचालन बंद होने से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, टूर आपरेटर, निजी बस, टैक्सी आपरेटरों भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस साल मई माह में चारधामों के कपाट खुल गए थे।
दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को अनुमति नहीं थी। जून माह में सरकार ने चारधाम यात्रा संचालित करने का फैसला लिया था। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए चारधामों में उचित व्यवस्था न होने से हाईकोर्ट ने यात्रा पर रोक लगाई थी। अब कोर्ट ने यात्रा पर रोक हटा दी है। इससे चार महीने बाद चारधाम से जुड़े पर्यटन कारोबारियों को राहत मिली है।
कोविड महामारी के कारण दो साल से पर्यटन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। चारधाम यात्रा पहाड़ों के लोगों की एक तरह से लाइफ लाइन है। चारधाम यात्रा पर रोक हटने से कारोबारियों में नई उम्मीदों की किरण जगी है। हाईकोर्ट का फैसला जनहित में है। साथ ही प्रदेश सरकार व विपक्षी दलों के प्रयासों से यात्रा शुरू करने का रास्ता खुला है।
– संदीप साहनी, अध्यक्ष उत्तराखंड होटलियर एसोसिएशन
सरकार ने लगाया था राहत का मरहम
प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा संचालन न होने से पर्यटन क्षेत्र को दो सौ करोड़ का पैकेज देकर राहत का मरहम लगाया था। चारधाम व पर्यटन कारोबार से जुड़े 50 हजार लोगों को छह माह तक प्रति माह दो हजार रुपए की आर्थिक सहायता देेने की घोषणा की थी। अब तक 11813 लाभार्थियों के खाते में कुल 440.54 लाख की राशि दी गई। 655 पंजीकृत टूर ऑपरेटरों एवं एडवेंचर टूर ऑपरेटरों को 10 हजार रुपए प्रति आपरेटर देने की घोषणा की थी। इसमें 208 लाभार्थियों को 20.80 लाख रुपये की राशि दी गई। 630 पंजीकृत रीवर राफ्टिंग गाइड में से 209 को 20.90 लाख, टिहरी झील में 86 मोटर बोट संचालकों को 10 हजार रुपये के अनुसार 8.60 लाख की राशि दी गई।