राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक का दबाव होगा कम, बल्लूपुर-पांवटा साहिब रोड 2024 तक होगी फोर लेन

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राजधानी देहरादून पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बल्लूपुर-पांवटा साहिब सड़क परियोजना के लिए 1093 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ट्विटर पर यह जानकारी साझा की। उनके ट्वीट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की ओर से गडकरी का आभार व्यक्त किया। दो चरणों में प्रस्तावित प्रोजेक्ट अगले दो साल में 2024 तक पूरा होगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एनएच 72 बल्लूपुर-पावंटा साहिब सड़क को फोर लेन बनाने के साथ इसे दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ने की परियोजना तैयार की है। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में बनेगा। पहले चरण में 52 किमी लंबे हाईवे को फोर लेन में बदला जाएगा।

प्रोजेक्ट के तहत भीड़ भाड़ वाले शहर पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुुद्धोवाला के बीच 25 किमी लंबाई का ग्रीन फील्ड तैयार होगा। नए मार्ग के बनने से सात किमी की दूरी कम हो जाएगी। इससे मार्ग पर चलने वालों के समय और ईंधन की बचत होगी।

25 गांव प्रभावित होंगे

प्रथम चरण में कार्य पांवटा के वाता पुल से शुरू होगा और शिमला बाइपास व धर्मावाला अंतिम गांव मेदनीपुल तक होगा। इस पर 605.36 करोड़ की लागत आएगी। दूसरे चरण में मेदनीपुर से शुरू होकर हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुद्धोवाला, प्रेमनगर से होते हुए बल्लूपुर चौक पर खत्म होगा। इस पर 1141 करोड़ की लागत आएगी।

इस परियोजना से उत्तराखंड के 21 और हिमाचल के चार गांव प्रभावित होंगे। निजी नाप भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अग्रिम चरण में है। नौ गांवो में मुआवजा आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शेष की प्रक्रिया अगले 15 दिन पूरी हो जाएगी। पहले चरण की वनीय स्वीकृति दो तीन दिन में मिलने की संभावना है।

दोनों पैकेज की निविदाएं की
एनएचएआई ने परियोजना के दोनों पैकेज की निविदाएं कर ली हैं। अगले 25 से 30 दिन में बोलीदाता भी तय हो जाएंगे। अगले तीन महीनों यानी जून महीने से प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ हो जाएगा।
ईंधन बचेगा, दबाव घटेगा, पर्यटकों को मिलेगी सुविधा
इस परियोजना के निर्माण से दिल्ली से आने वाले पर्यटकों को भीड़भाड़ वाले दून शहर में दाखिल नहीं होना पड़ेगा। वे दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे (जिस पर कार्य शुरू होने वाला है) से होकर ग्रीन फील्ड फोरलेन से मसूरी या अन्य पर्यटक स्थलों को जा सकेंगे। औद्योगिक क्षेत्र होने के नाते कारोबारियों और परिवहन को भी सुविधा होगी। करीब सात किमी की दूरी कम हो जाएगी। इससे ईंधन और समय दोनों बचेंगे। साथ ही ट्रैफिक का दबाव कम होगा।