दोस्तों, क्या सच में देहरादून अब पहले जैसा नहीं रहा? क्या देवभूमि की पहचान पर नशा और जमीन माफिया भारी पड़ रहे हैं? और क्या यूपी ने उत्तराखंड को आईना दिखाने का काम कर रहा है। ये सवाल अपने उत्तराखंड में पूछे जाते थे लेकिन अब उत्तराप्रदेश वाले भी उत्तराखंड को लेकर बड़े बड़े खुलासे कर रहे हैं। मामला उत्तर प्रदेश के एक छात्र की हत्या का था तो यूपी वालों ने देहरादून पर चढाई कर दी, ले गाड़ियों का रैला, पोस्टर बैनर, नारे और नसीत भी तमाम दिखी जिसके बाद सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा? पूरी खबर बताउंगा आपको अपनी रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो अपनी देवभूमि की हालत पर उत्तरप्रदेश वाले भी तरस खा रहे हैं। वहां तो हालात ठीक हो गए बल कानून व्यवस्था के लेकिन उत्तराखंड में हालात बद से बतर हो गए। दोस्तो ये कहना है भाकियू नेता राकेश टिकैत का। टिकैत के एक बयान ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—उन्होंने साफ कहा कि देहरादून बदल चुका है, शिक्षण संस्थानों के आसपास नशे का कारोबार बढ़ रहा है और पूरी पीढ़ी खतरे में है। जी हां दोस्तो आखिर क्यों उठ रहे हैं ये सवाल? क्या है पूरा मामला और क्यों गूंज रही है ये आवाज पूरे उत्तराखंड में? उत्तरप्रदेश वाले कभी धमकी देते हैं और अब तो बोर्डर ही जाम कर दिया।
दोस्तो राजधानी देहरादून में मुजफ्फरनगर के रहने वाले छात्र दिव्यांशु जटराना की हत्या के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। किसानों ने मामले में मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग की, जिसके बाद 13 सदस्यीय कमेटी को सीएम धामी ने मुलाकात का वक्त दिया. इसके बाद हुई बातचीत में दिव्यांशु हत्याकांड को लेकर विस्तार से बात हुई। सीएम धामी से मुलाकात के बाद देहरादून में किसानों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है। अब मामले में न्याय मिलने तक 13 समिति कमेटी सक्रिय रहेगी लेकिन दोस्तो इससे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान देहरादून ISBT के पास स्थित आशारोड़ी चौकी पर जुटने शुरू हो गए. सभी किसान दिव्यांशु जटराना को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ हत्या के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं। किसानों की बढ़ती संख्या और आक्रोश को देखते हुए देहरादून पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और किसान नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता हुई। दोस्तो पहले SP सिटी स्तर पर बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनने पर देहरादून के SSP प्रमेंद्र डोभाल खुद धरना स्थल पर पहुंचे और किसान नेता राकेश टिकैत सहित अन्य नेताओं से बातचीत की. लंबी बातचीत के बाद एक सहमति बनी, जिसके तहत किसानों की 13 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगी.
प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जैसे ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय तय होगा, कमेटी को जानकारी दे दी जाएगी। इसके बाद धरना स्थल पर केवल कमेटी के सदस्य ही रुकेंगे, जबकि बाकी किसान वापस लौट जाएंगे। वहीं, किसानों ने तय किया कि कमेटी लगातार सरकार और पुलिस के साथ संपर्क में रहकर दिव्यांशु हत्याकांड की जांच और कार्रवाई की निगरानी करेगी, ताकि दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कदम उठाए जा सकें। वैसे दोस्तो दिब्यांशु हत्याकांड की पुलिस जांच तेजी से जारी है। कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार आरोपियों पर इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। साथ ही उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। दिव्यांशु हत्याकांड ने सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का गुस्सा, राकेश टिकैत के तीखे बयान और यूपी से आए भारी जनसमूह ने साफ कर दिया कि अब लोग चुप बैठने वाले नहीं हैं। सरकार ने कमेटी बनाकर पहल जरूर की है, लेकिन असली परीक्षा अब न्याय की है—क्या दोषियों को सजा मिलेगी? क्या देवभूमि की छवि को बचाया जा सकेगा? और सबसे बड़ा सवाल—क्या आने वाले समय में ऐसे मामलों पर सख्ती दिखेगी?