Dehradun दिल दहला देने वाली कहानी! | Hit And Run | Justice | Police | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो दिल को दहला देने वाली ये खबर है इस में तीन किरदार हैं मां, मरा हुआ बेटा और पुलिस। दोस्तो देहरादून की ये कहानी आपको अंदर तक झकझोर देगी। एक तरफ जहां पुलिस ने “जादू की छड़ी नहीं है” कहकर केस बंद कर दिया, तो दूसरी तरफ एक मां ने हार नहीं मानी, अपने बेटे के लिए वो खुद जासूस बन गई और डेढ़ साल की मेहनत के बाद आखिरकार उसने वो सच सामने ला दिया, जिसे सिस्टम नहीं सुलझा पाया। पुलिस नहीं नहीं ला पाई। पूरी खबर कैसे मां ने पड़ताल कर बंद हो चुके बेटे की मौत के केस को दूबारा खुलवा दिया बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो ये कहानी ये खबर सिर्फ एक केस की नहीं, बल्कि एक मां के उस जज्बे की है, जिसने इंसाफ के लिए हर हद पार कर दी। आखिर क्या था पूरा मामला और कैसे मां ने ढूंढ निकाला अपने बेटे का कातिल। हर रोज दोस्तो कई सड़क दुर्घटनाओं की खबरें सामने आती है, ऐसे में कईयों की जान भी चली जाती है। कुछ मामलों में तो पुलिस जांच कर आरोपी को पकड़ लेते हैं, मगर कई ऐसी भी सड़क घटनाएं है, जिनकी फाइल पुलिस ठंडे बस्ते में डालकर भूल जाती है। एक ऐसा ही घटना देहरादून में हुई थी आज तकरीबन 2 साल पहले, तरीख थी 16 फरवरी 2024, जब क्षितिज को एक तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी थी, ये घटना तब घटी जब वह प्रेमनगर इलाके में सड़क को पार कर रहा था। इस सड़क दुर्घटना ने उस नौजवान युवक की जान ले ली और उसकी मां ललिता चौधरी ने अपना बेटा खो दिया।

दोस्तो आपको बता दूं कि क्षितिज की उम्र 18 साल थी. वह एक भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था। जब उसका एक्सीडेंट हुआ तो तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां अगले दिन उसकी मौत हो गई। बेटे के जाने के बाद परिवार को एक आखिरी उम्मीद जो थी वह पुलिस से थी, मगर जब बेटे की मौत मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। साथ ही पुलिस ने कहा कि जांच के बावजूद भी आरोपी का पता नहीं चल सका। इसके बाद मृतक युवक की मां ने अपने बेटे को इंसाफ और आरोपी को सजा दिलाने की कसम खा ली ये इसलिए था क्योंकि आज से दो साल पहले जब ये हादसा हुआ था तब देहरादून में पुलिस ने रोती-बिलखती मां को ये कहकर केस बंद कर दिया कि उनके पास जादू की छड़ी नहीं है फिर उस मां ने खुद बेटे के कातिल को ढूंढ निकाला। दोस्तो एसएसपी ने मामले की दोबारा जांच के आदेश पड़े। दोस्तो एक सवाल ये जिसका जवाब सभी जानना चाहते होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है जहां पुलिस के पास इतने इंतजाम होने के बाद वो नहीं कर पाई तो एक मां ने कातिल खोज निकाला। बीते इन दो सालों में मरे हुए बेटे के गुनहगारों तक पहुंचने के लिए एक मां ने ऐसा क्या किया कि पुलिस भी देखती रह गई। दोस्तो इसका जवाब भी है, दोस्तो जब पुलिस से नाउमीदी मिली तो उसके बाद ललिता चौधरी का हर रोज सिर्फ एक की काम था, वह घर से सुबह निकल जाती थी और पूरे दिन घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालती रहती। लोगों से पूछताछ और घंटों वीडियो देखने के बाद करीब 10 संदिग्ध लोगों की उन्होंने पहचान की और फिर उन सभी के बारे में जानकारी जुटाने में लग गई।

दोस्तो बेटे को खोने के गम और पुलिस की कार्यप्रणाली ने ललिता को अंदर तक झकझोर दिया। महीनों तक वह सड़कों पर भटकती रहीं और खुद सीसीटीवी फुटेज खंगाले। उन्होंने 10 संदिग्ध वाहनों के नंबर भी पुलिस को दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डेढ़ साल के संघर्ष के बाद आखिरकार मां की तपस्या रंग लाई और उसने खुद उस अज्ञात वाहन और उसके मालिक अंकित चौहान का पता लगा लिया। ललिता ने शनिवार को एसएसपी कार्यालय में साक्ष्यों के साथ प्रार्थना पत्र सौंपा। एसएसपी ने एफआर दरकिनार कर पुनः जांच के आदेश दिए। दोस्तो यहां थोड़ा पुलिस की कार्यशैली पर सवाल हैं क्योंकि पुलिस ने क्यों इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई, क्या पुलिस ऐसे वाहनों को नहीं पकड़ पाती क्या पुलिस के पास ऐसा कोई इंतजाम या ट्रेनिंग नहीं कि वो बिना नंबर प्लेट वाले उस ट्रक के मालिक या चालक तक नहीं पहुंच सकती थी। क्योंकि यहां पुलिस गंभीरता पर सवाल इस लिए भी क्योंकि पुलिस ने इस बात को क्या स्विकारा था की इस मामले को सुलझाना उनके बस की बात नहीं है। दोस्तो ऐसे मामले में क्या पुलिसिया इस रवैये पर सवाल नहीं होना चाहिए। सवाल ही नहीं पुलिस के ऐसे अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जो आम जन के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं। इस मामले ने तो यही बताया क्योंकि कानून के हाथ लंबे होते हैं बल तो पुलिस के हाथ किसने बांध रखे थे वहां तक पहुंचने के लिए जहां मर चुके अपने बेटे के लिए एक मां पहुंच गई। वैसे बड़ा गजब का करनामा है ये अपनी मित्र पुलिस का अब आगे कुछ करगे पुलिस या सब कुछ आम आदमी को ही करना होगा। गवाह सबूत यहां तक की कातिल तक खोजने का काम आखिर क्यों समझ में नहीं आता आप बतानेा