जी हां दोस्तो सादगी और पहाड़ी संस्कृति की मिसाल, कैसे बन गया एक आईएएस अधिकारी। दोस्तों, अक्सर अफसरशाही को लोग औपचारिक और दूरी भरी समझते हैं, लेकिन उत्तराखंड में एक IAS अधिकारी हैं जिन्होंने दिखा दिया कि सादगी और लोक संस्कृति का मेल भी सुर्खियों में आ सकता है। कभी वो पहाड़ के पारंपरिक धारे से पानी पीते नजर आते हैं, तो कभी गांव की चौपाल में बैठकर सीधे जनता की समस्याएं सुनते हैं। बंशीधर तिवारी का ये अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है और लोगों के लिए सादगी और पहाड़ी संस्कृति की एक जीवंत मिसाल बन गया है। कैसे हुआ ये सब और कौन हैं आईएएस अधिकारी बंशीधर तिवारी। दोस्तो अक्सर अफसरशाही को औपचारिकता और दूरी से जोड़ा जाता है, लेकिन कुछ अधिकारी अपनी सादगी और जमीन से जुड़े व्यवहार से अलग पहचान बना लेते हैं। ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं बंशीधर तिवारी, पहाड़ के पारंपरिक जलस्रोत ‘धारे’ से पानी पीते उनका एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसे लोग एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की सादगी और स्थानीय संस्कृति से जुड़ेपन की मिसाल के रूप में देख रहे है। दोस्तो वैसे ये एक मात्र तस्वीर नहीं है इनकी एक और तस्वीर है उसकी बाद इसके बाद करुंगा गौर कीजिएगा। दरअसल गैरसैंण में उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। ये वीडियो राज्य के सूचना महानिदेशक और मुख्यमंत्री के अपर सचिव आईएएस बंशीधर तिवारी से जुड़ा बताया गया, वैसे थोड़ा हैरानी भी होती है कि एक राज्य सूचना महानिदेशक। मुख्यमंत्री के अपर सचिव हों वो आचुली से पानी पी रहे हैं।
दोस्तो हाल में गैरसैँण में सपन्न हुए बजट सत्र के दौरान गैरसैंण में पत्रकारों से बातचीत के बीच बंशीधर तिवारी कुछ देर के लिए पहाड़ के पारंपरिक जलस्रोत ‘धारे’ के पास रुके और वहीं से पानी पीते नजर आए। उस समय मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पल को कैमरे में कैद कर लिया। बाद में यह वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा होने लगीं, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गईं और आज तिवारी जी की चर्चा पहाड़ से लेकर देहरादून तक खूब हो रही है। दोस्तो ये वीडियो सामने आने के बाद कई लोग इसे पहाड़ी संस्कृति और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़ाव की झलक के रूप में देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक वरिष्ठ अधिकारी का इस तरह पारंपरिक जलस्रोत से पानी पीना स्थानीय संस्कृति के प्रति अपनापन और सादगी को दर्शाता है। वैसे दोस्तो बंशीधर तिवारी पहले भी अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रह चुके हैं वो साल 2024 का था जब तिवारी जी ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित चौपाल कार्यक्रमों के दौरान वह ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते दिखाई दिए थे। उस समय राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को गांवों में जाकर चौपाल लगाने और लोगों से सीधे संवाद करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा उनकी एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर खूब साझा की गई थी, जिसमें वह स्कूली बच्चों के साथ साधारण ढंग से बैठकर भोजन करते दिखाई दे रहे थे।
दोस्तो हालिया वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे सादगी और पहाड़ी परंपरा से जुड़ाव का प्रतीक बताते हुए कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। वैसे कहते हैं असली पहचान पद में नहीं, व्यवहार में दिखाई देती है जब बड़ा अधिकारी भी गाँव के नल से उसी सादगी से पानी पीता है जैसे एक आम पहाड़ी ग्रामीण, तब समझ आता है कि जमीन से जुड़े लोग ही दिल जीतते हैं। दोस्तों, असली नेतृत्व और सादगी का परिचय पदनाम से नहीं, व्यवहार से मिलता है। बंशीधर तिवारी ने हमें दिखा दिया कि एक वरिष्ठ IAS अधिकारी भी पहाड़ी संस्कृति और लोक जीवन से जुड़कर कितनी सहजता और अपनापन दिखा सकता है। चाहे वह धारे का पानी हो, गांव की चौपाल हो या बच्चों के बीच बैठकर साधारण भोजन—इन पलों में छुपी है असली इंसानियत और जमीन से जुड़ाव यही वो संदेश है जो हमें याद रखना चाहिए: सच्ची पहचान केवल पद और अधिकार में नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े होने और जनता के करीब होने में होती है। यही वजह है कि बंशीधर तिवारी की ये सादगी पहाड़ से लेकर देहरादून तक लोगों के दिलों में जगह बना चुकी है।