प्रदेश सरकार ने राज्य के कुछ विशेष क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन (डेमोग्राफिक चेंज) पर सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की आशंका पर कुछ राज्य आंदोलनकारियों और क्षेत्रीय दलों ने भी पलटवार किया है। उनका कहना है कि सांप्रदायिक माहौल तो बहाना है, असल मुद्दा चुनाव से पहले जनता का ध्यान भटकाना है।
पलायन को रोकने के लिए कोई ठोस तरीका नहीं
सरकार सख्त भू कानून, रोजगार, गैरसैंण स्थायी राजधानी, भू-कानून, लोक आयुक्त और परिसीमन से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का शिगूफा छोड़ रही है। जिसके पास पलायन से खाली हो रहे गांवों के कोई ठोस नीति नहीं है। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी का कहना है कि रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पहाड़ के गांव खाली हो रहे हैं। जनसांख्यिकीय परिवर्तन या सांप्रदायिकता से पलायन का कोई लेना देना नहीं है। सरकार धुव्रीकरण की राजनीति कर रही है। उसके पास पलायन को रोकने के लिए कोई ठोस तरीका नहीं है।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि पहाड़ के लोग भी पलायन कर कुछ विशेष मैदानी क्षेत्रों में आए हैं। असल में सरकार बेरोजगारों को रोजगार देने, जनभावना के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने, प्रदेश में सख्त भू-कानून लागू करने, क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थिति के आधार पर परिसीमन कराने और लोक आयुक्त की नियुक्ति जैसे असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। यदि पलायन को लेकर सरकार पूरी तरह से ईमानदार है तो 1950 को कटऑफ डेट मानते हुए मूल निवास प्रमाण पत्र को लागू करे। पहाड़ों में जमीन की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए सख्त भू-कानून लागू करे।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय प्रवक्ता विजय कुमार बौड़ाई का कहना है कि प्रदेश में अवैध तरीके से आने वाले लोगों को चिह्नित किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार को ठीक चुनाव के समय इसकी याद आई है।
राज्य में जनसंख्या असंतुलन और पलायन की बात करके भाजपा ने नया पैंतरा फेंका है। चुनाव नजदीक आता देखकर वह राज्य के मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बात कर रही है। राज्य में यदि जमीनों की बाहरी व्यक्तियों की ओर से लूट खसोट हो रही है तो यह भाजपा से ही पूछा जाना चाहिए कि इसका रास्ता किसने खोला है। भाजपा को इसके लिए पहले अपने पूर्व मुख्यमंत्री से हिसाब मांगना चाहिए।
– सुरेंद्र कुमार, राज्य आंदोलनकारी और पूर्व सीएम हरीश रावत के सलाहकार
भाजपा का तथाकथित जनसंख्या नियंत्रण का दावा मात्र एक ढकोसला है। इसके पीछे भाजपा की द्वेष को बढ़ावा देने की राजनीति छुपी हुई है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर वोटों की खेती करना चाहती है। यह प्रदेश की एकता और अखंडता के लिए घातक साबित हो सकता है। जनसंख्या नियंत्रण के पीछे ओबीसी वर्गों में आने की चाह वाले लोगों को रोकने की मंशा भी दिखाई देती है। यदि भाजपा राज्य की हितैषी है तो उसे उत्तराखंड को ओबीसी राज्य घोषित करने की मांग करनी चाहिए। जिससे यहां के लोगों को संविधान का विशेष संरक्षण मिल सके।
– धीरेंद्र प्रताप, चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक
यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है। राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि इस मुद्दे को समाज के बीच में ले जाकर एक राय बनाई जाए। सरकार की ओर से स्पष्ट भी नहीं है कि वह कहना क्या चाहती है। यदि वह जनसंख्या असंतुलन की बात कह रही है कि तो इस पर भी समाज के विभिन्न वर्गों की राय के साथ आगे बढ़ा जाना चाहिए। सरकार को संवेदनशीलता, पारदर्शिता, संवाद और सामाजिक भागीदार के साथ इस मुद्दे पर आगे बढ़ना चाहिए।