Dehradun वीडियो बना सबूत,अस्पताल में हड़कंप! | Coronation Hospital | CM Dhami | Uttarakhand News

Spread the love

राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी, जहां जिंदगी बचाने का दावा किया जाता है। वहीं दर्द से तड़पती एक युवती घंटों मदद की गुहार लगाती रही लेकिन उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था। पर्ची और प्रक्रिया के बीच इंसानियत कहीं खोती नजर आई। Girl Crying Video Dehradun Hospital मामला बढ़ा तो सीधे जिलाधिकारी ने अस्पताल में छापा मार तो कैसी मिली व्यवस्था बताउँगा पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो आपने मुझे उत्तराखंड के दूरदराज के पहाड़ी और दुर्मम क्षेत्रों में धड़ाम हो चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में खबर बताते और सवाल करते देखा और सुना होगा। हां वहीं कहीं डंडी कंडी डोली के सहारे अस्पताल तक पहुंचते मरीज या उनको पहुंचाते उनके परिजन कई पहाड़ी अस्पतालों में मरीज की मौत इसलिए हो जाती है कि सुविधाएं नहीं खास गर्भवती महिलाों के लिए सबसे बड़ी परेशानी हैं, लेकिन तब क्या हो जब पहाड़ में दूरदराज की तो छोड़िये, देहरादून में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर चली जाय मै नहीं ये वीडियो देखिए फिर आगे बात होगी। एक्सीडेंट में गंभीर घायलावस्था में जब यह युवती इलाज के लिए देहरादून के जिला अस्पताल कोरोनेशन पहुंची तो उपचार के बजाय स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, मेडिकल स्टाफ की हीलाहवाली, पुरानी टूटी व्हील चेयर मिली मै नहीं कह रहा ये वीडियो कह रहा है। जो अभी सबके मोबाइल पर पहुंच रहा है क्या बोला इसमें कैसी व्यवस्था है सुना तो आपने होगा।

दोस्तो मरीज की जुबानी ये कि वो कहती है कि दोस्तो मै कोरोनेशन में आ रखी हूं। थोड़ी देर पहले मेरा एक्सीडेंट हुआ। मेरे पैर में एक कार वाले ने गाड़ी चढा दी यहां कोरोनेशन में आ रखी हूं मै यहां कुछ भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। व्हील चेयर भी बहुत पुरानी दे रखी है जो चल नहीं रही है बैक से चल रही है कभी फ्रंट से नहीं चल रही है। बड़ी गंदी तरह से मेरा एक्सीडेंट हो रखा है। पूरा पैर मेरा कांप रहा है अभी एमेरजेंसी गई एमेरजेंसी वालों ने पर्ची काटने के लिए भिजवा रखा है। किसी की कितनी बड़ी एमेरजेंसी हो रखी होगी ये पहले ओपीडी में भिजवाएंगे। मेरा दोस्तो पर्ची कटाने के लिए जा रखा है मेरी आफत आ रखी है एमेरजेंसी इधर भिजवा रहे हैं फिर कहेंगे ऑर्थो के पास जाओ एक्सरे करवाएंगे। बहुत गंदी कर रखी है इन्होंने डिस्ट्रीक्ट हॉस्पीटल की हालत। दोस्तो ये तस्वीर तब है जब राजधानी में सभी लोग यानि की स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य सचिव यहां तक की मुख्यमंत्री बैठते हैं। फिर आप दूरदराज के गांव में बने अस्पतालों की हालत का अंदाजा तो लगा ही सकते हैं। वैसे दोस्तो इस वित्तिय साल में जो मार्च तक चलेगा स्वास्थ्य विभाग के के खाते में 4 हजार 8 सौ 48 करोड़ रुपया। अब इस बजट क्या होता होगा बल, कहां जाता होगा। बताना आप क्योंकि ये वीडियो स्वास्थ्य व्यवस्था की चमकती व्यवस्था पर किसी बड़े तमाचे से कम नहीं है। दोस्तो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सरकारी अस्पतालों की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। कोरोनेशन अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दर्द से तड़पती एक युवती को समय पर इलाज नहीं मिल सका, सिर्फ पर्ची काटने के लिए भेज दिया गया। वो रोती रही लेकिन किसी ने उसकी पीड़ा किसी ने नहीं सुनी। ये तो बस एक बानगी भर लगती है दोस्तो क्योंकि यहां से मिल रही शिकायतों के बाद देहरादून के डीएम सविन बंसल ने औचक नीरीक्षण किया तो उनको भी कई खामिलाया मिली।

जी हां दोस्तो जिलाधिकारी सविन बंसल ने कोरोनेशन का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के हर वार्ड और अनुभाग का बारीकी से जायजा लेने के साथ ही मरीजों और तीमारदारों से सीधी बातचीत की। बाल चिकित्सा वार्ड में बच्चे के हाथ में मोबाइल देखकर अभिभावकों से ऐसा नहीं करने को कहा। इसके अलावा डीएम ने अस्पताल में निर्माणाधीन ब्लड बैंक के कामों का निरीक्षण भी किया और कार्यदाई संस्था को 15 दिन के भीतर कार्य पूरा करने को कहा उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सेंट्रल पैथोलॉजी का समय अब 11 बजे से लेकर 1 घंटे बढ़ाकर 12 बजे किए जाने को भी कहा. इसके अलावा उन्होंने पीपीपी मोड पर संचालित चंदन लैब के निरीक्षण के दौरान तीन माह के दिन और रात में लिए गए सैंपल की रिपोर्ट तलब की। इसके साथ ही अनुबंध के अनुसार कार्य नहीं किए जाने पर आधा भुगतान रोकने को कहा है। दरअसल अनुबंध के अनुसार लैब की ओर से 24 घंटे कार्य नहीं किया जा रहा था जिसके बाद इस लैब का आधा भुगतान रोक दिया गया है। दोस्तो जिलाधिकारी सविन बंसल ने अस्पताल में गायनी डॉक्टर नहीं होने से अन्य अस्पतालों में मरीजों को रेफर किए जाने की शिकायत पर उप जिलाधिकारी सदर और प्रभारी अधिकारी स्वास्थ्य व सीएमओ को इस संबंध में संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने मौके पर ही किचन, गायनी ओटी, वेयरहाउस, ओपीडी मरम्मत के लिए 10 लाख रुपए स्वीकृत किए. उन्होंने इमरजेंसी और सामान्य वार्ड का निरीक्षण भी किया। दोस्तो इतना एक्टिव जिलाधिकारी होने के बाद स्वास्थ्य महकमे के हमारे जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं इसलिए तो ये तस्वीर सामने आई है। तो देखा आपने राजधानी के सबसे बड़े जिला अस्पताल की हकीकत। एक घायल युवती दर्द से कराहती रही। व्हीलचेयर टूटी, इमरजेंसी में पर्ची का झंझट और सिस्टम मानो संवेदनहीन। Dehradun में बैठा पूरा स्वास्थ्य तंत्र, करोड़ों का बजट, बड़ी-बड़ी योजनाएं लेकिन ज़मीनी सच्चाई क्या है — ये वायरल वीडियो बता रहा है। जब मामला बढ़ा तो जिलाधिकारी Savine Bansal को खुद औचक निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंचना पड़ा। व्यवस्थाओं की पोल खुली लैब का भुगतान रोका गया। निर्माण कार्यों को समयसीमा दी गई। मरम्मत के लिए धनराशि स्वीकृत हुई।क्या हर बार सिस्टम को जगाने के लिए किसी पीड़ित का वीडियो वायरल होना जरूरी है? क्या इमरजेंसी में इलाज से पहले पर्ची ही प्राथमिकता रहेगी?ये सिर्फ एक अस्पताल की कहानी नहीं ये उस व्यवस्था का आईना है जिस पर आम आदमी अपनी जान का भरोसा करता है।फिलहाल कैमरे पर कैद ये तस्वीरें बहुत कुछ कह रही हैं अब देखना ये है कि जिम्मेदार सिर्फ कार्रवाई का आश्वासन देंगे 8या सच में हालात बदलेंगे।