देहरादून में हुए चर्चित विक्रम शर्मा हत्याकांड ने अब नया मोड़ ले लिया है। क्या इस सनसनीखेज मर्डर की स्क्रिप्ट उसके अपने ही भाई ने लिखी? क्या शूटर्स की पहचान हो चुकी है? सूत्रों के मुताबिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। History Sheeter Murder Dehradun पुलिस को ऐसे सुराग मिले हैं जो आपसी रंजिश और अंदरूनी साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। आख़िर क्यों बनाया गया विक्रम शर्मा को निशाना? क्या यह गैंगवार था या फिर पारिवारिक दुश्मनी की खतरनाक परिणति? देहरादून के इस हत्याकांड की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। दोस्तो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार सुबह दिनदहाड़े एक कारोबारी विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये वो विक्रम सिंह है जिसकी हत्या के बाद उत्तराखंड पुलिस महकमें भारी फेर बदल होगा। यहां तक की देहरादून के एसएसपी को हटा दिया गया लेकिन अब जब एक तरफ हत्याकांड को अंजाम देकर फरार चल रहे हैं आरोपियों की धड़पड़ तेज हैं वहीं इस हत्याकांड को लेकिर कई नए खुलासे हो रहे हैं। यहां एक सवाल ये भी क्या इस हत्याकांड को पीछे भी कोई पूरानी दुश्मनी है या फिर पारिवारिक प्रोप्रटी को लेकर अपने ही भाई भाई को मौत के घाट उतार दिया गया। दोस्को विक्रम की हत्या एसएसपी आवास से महज 500 मीटर की दूरी पर बने सिल्वर सिटी मॉल में हुई। विक्रम शर्मा जिम से बाहर आ रहे थे, तभी तीन बदमाशों ने आकर उन्हें गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। विक्रम शर्मा प्रॉपर्टी डीलर थे गोली मारने के बाद हमलावर वहां से फरार हो गए, जिनकी तलाश की जा रही है. अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
अब थोड़ा ये जान लीजिए कि कौन थे विक्रम शर्मा? विक्रम शर्मा के पिता टाटा स्टील में नौकरी करते थे रिटायरमेंट के बाद वह देहरादून आकर बस गए थे। वह मूल रूप से देहरादून के ही रहने वाले थे विक्रम शर्मा का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था उनका छोटा भाई अरविंद भी देहरादून में ही रहता है। विक्रम शर्मा के खिलाफ दर्जनों मुकदमे दर्ज थे। झारखंड के जमशेदपुर में रहते हुए वह कई मामलों में आरोपी थे उनके खिलाफ जमशेदपुर में 20 से ज्यादा मामले दर्ज थे हालांकि, ज्यादातर मामलों में वह बरी हो चुके थे। 2017 में उन्हें जमशेदपुर पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया गया था। दोस्तो इतना भर नहीं है आगे देखिए विक्रम शर्मा का ट्रेक रीकॉड भी बेहद डरावना रहा है। वो इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जिसके इतिहास में इतने बड़े बड़े कांड हों वो उत्तराखंड में बड़ी ही शान से रह रहा था। कैसे क्या कोई सियासी कनेक्शन है इसे थोड़ा समझिए। झारखंड की दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह का आपराधिक गुरु रहा है। कई मामलों में जमातन मिलने के बाद रांची के होटवार जेल से वह 30 जनवरी 2021 को रिहा हुए थे। 2017 से 2021 तक जेल में रहने वाले झारखंड हाई कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिली थी। इसके अलावा मै आपके सामने वो मामले भी रखने जा रहा हूं विक्रम शर्मा पर दर्ज कुछ चर्चित मामले जिसे सुनेंगे देखेंगे तो हैरान हो जाएंगे दोस्तो विक्रम शर्मा कई मर्डर केस में भी नामजद आरोपी रहे हैं। 2008 में टाटा स्टील के सिक्योरिटी हेड जयराम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में विक्रम शर्मा का नाम आया था।
इसके अलावा श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या, साकची के काशीडीह निवासी रवि चौरसिया पर फायरिंग, बर्मामाइंस में परमजीत सिंह के भाई सत्येंद्र सिंह के ससुराल वालों पर फायरिंग और परमजीत सिंह हत्याकांड समेत करीब 20 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोस्तो, देहरादून के विक्रम शर्मा हत्याकांड ने जिस तरह से नया मोड़ लिया है, उसने पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। शुरुआत में जिसे गैंगवार या आपसी रंजिश का मामला माना जा रहा था, अब जांच की दिशा करोड़ों की संपत्ति और पारिवारिक साजिश की ओर इशारा कर रही है। अगर सचमुच भाई ने ही मर्डर की स्क्रिप्ट लिखी है, तो यह सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटने और लालच की चरम कहानी बन जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार शूटर्स की पहचान हो चुकी है और झारखंड कनेक्शन भी सामने आ रहा है। यानी साजिश स्थानीय नहीं, बल्कि सुनियोजित और बहुस्तरीय थी। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—साजिश की पूरी कड़ी जोड़ना, फाइनेंशियल ट्रेल खंगालना और यह साबित करना कि हत्या के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है।यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, संगठित अपराध और पारिवारिक विश्वास जैसे कई बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारी, रिमांड और खुलासों का दौर तेज हो सकता है।फिलहाल सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है—क्या सच पूरी तरह सामने आएगा? और क्या इस हत्याकांड के पीछे छिपे हर किरदार का पर्दाफाश हो पाएगा? हम इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाते रहेंगे।