दोस्तो, देहरादून के रानीपोखरी इलाके में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने यह जमीन शिक्षा संस्थान के लिए दी थी, लेकिन अब उन्हें धोखा देकर सरकार ने अपनी मर्जी चलाने का काम किया है। क्या सच में यह एक धोखाधड़ी है या सरकार का फैसला प्रदेश के विकास को ध्यान में रखते हुए है? इस पूरे मामले की हर पड़ताल और आंदोलन का हाल हम आपको दिखाएंगे। देखते रहिए हमारी रिपोर्ट और जानिए रानीपोखरी में लॉ यूनिवर्सिटी का असली सच। दोस्तो ये मामला है देहरादून की डोईवाला विधानसभा के अंतर्गत रानीपोखरी, भट्टनगरी और लिस्ट्राबाद क्षेत्र में प्रस्तावित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी हैँ। वहीँ कांग्रेस के कई नेता धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दें रहे हैँ। रानीपोखरी डोईवाला क्षेत्र के लोगों का आरोप हैँ कि उन्होंने ये जमीन शिक्षण संस्थान के लिए दी थी, अब सरकार ने उनसे जमीन लेकर उनको धोखा देकर ये जमीन हड़पकर अपनी मर्जी चलाने का काम किया हैँ। वहीँ अब पुलिस के बल पर ग्रामीणों को डराने का कार्य कर रही है। इस पूरे हंगामे के बाद लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान भी सामने आया हैँ. सी एम धामी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश का विकास हमारी प्राथमिकता में हैँ और हम कोई फैब्रिकेटेड व्यवस्था नहीं बनाएंगे।
पूरा मामला उनकी जानकारी में हैँ और यह बीजेपी की ही सरकार का फैसला हैँ, जिसको लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा, लेकिन दोस्तो इससे पहले कांग्रेस ने आरोप कई लगाए हैं, गंभीर लगानाए हैं। दोस्तो मै आपको आरोप दिखाउं उससे पहले इस मसले को थोड़ा समझ लीजिए। BJP की सरकार में त्रिवेन्द्र सिंह रावत के मुख्यमंत्रित्व काल में ऋषिकेश के रानीपोखरी में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के नाम पर भूमि आवंटित की गई थी जिस पर लॉ यूनिवर्सिटी का शिलान्यास भी तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा स्थानीय सांसद डॉ0 रमेश पोखरियाल निशंक व शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत की उपस्थिति में हुआ था। 7 वर्ष बीत जाने के बाद यूनिवर्सिटी के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। दोस्तो अब आरोप लग रहे हैं कि यूनिवर्सिटी के नाम आवंटित भूमि का टिहरी बांध विस्थापितों के नाम पर खुर्द-बुर्द करने का काम किया जा रहा है। हरक सिंह रावत ने कहा कि पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की संवैधानिक गरिमा को ही गिरा दिया है क्योंकि त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री के रूप में लॉ यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अपनी ही सरकार के शासन के आदेशों का खुला उल्लंघन किया है। भारतीय जनता पार्टी में गुटबाजी चरम पर है। भाजपा किसी भी काम का श्रेय दूसरे नेता को नहीं देना चाहते हैं।
रानीपोखरी में जो कार्रवाई की गई है, उससे आने वाले समय में मुख्यमंत्री की घोषणा और शिलान्यास से भी जनता का भरोसा उठ जायेगा भाजपा के राष्ट्रीय नेता चुनावों के समय जुमले बाजी करते हैं उसी प्रकार लोकसभा चुनाव के समय जनता की आंख में धूल झोंकने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी झूठा नाटक कर लॉ यूनिवर्सिटी बनाने का नाटक मात्र किया, और आज स्थानीय जनता को इसके लिए आन्दोलन करना पड़ रहा है। दोसतो इस आन्दोलन में स्थानीय जनता के साथ कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और निर्वाचित प्रतिनिधि, प्रधान संगठन के लोग शामिल हैं। दोस्तो कांग्रेस ये भी आरोप लगा रही है कि जनता की जायज मांग को लेकर चलाये जा रहे शांतिपूर्ण आंदोलन पर जिस प्रकार उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया गया तथा आंदोलन में शामिल महिलाओं के साथ अभद्रता की गई वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है..दोस्तो, रानीपोखरी में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर चल रहा यह विवाद केवल जमीन या प्रशासनिक फैसले तक सीमित नहीं है। यहां सवाल उठ रहे हैं सरकार की पारदर्शिता, स्थानीय जनता के अधिकार और शांति पूर्ण आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर। क्या सच में लोगों के भरोसे और संवैधानिक गरिमा के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौती बन गया है?क्या भविष्य में प्रशासन और सरकार इस तरह के विरोध को शांतिपूर्वक हल करने में सक्षम होंगे?