Dhari Devi बाबा की साधना खींच रही ध्यान | Navratri | Baba Naarayana Giri | Uttarakhand News

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दोस्तो एक दिलचस्प तस्वीर मेरे सामने आई और मैने ऐसी भक्ती भी कहीं देखी। एक बाबा की साधना ऐसी कि सब का धान खींच रही है। मां धारी देवी का ऐसा अनोखा भक्त आपने अब तक नहीं देखा होगा, जिसने मां की भक्ति में लीन हो कर कर दिया ऐसा काम, की ऐसी साधना कि देखने वाले भी दंग हैं। हैरान हैं इस बात को लेकर की क्या कोई भक्त ऐसा भी हो सकता है। 0 दोस्तो नवरात्री चल रही हैं, भक्तों की भक्ती देखते बन रही है जहां मां के मंदिर में भक्तों का तांता दिखता है। वहीं अनोखी भक्ती भी दिखाई दे ही जाती है। उत्तराखंड के सिद्धपीठ मां धारी देवी मंदिर परिसर में दिख रही भक्त की अनोखी साधना, सिर पर हरियाली उगाकर बाबा नारायण गिरी कर रहे समर्पण। जो है देवभूमि यहां सिर पर जौ उगा, भक्ति का ये कैसा रूप, मां धारी देवी में डूबा, त्याग और श्रद्धा अनूप। देख साधना ये अनोखी, हर कोई है हैरान, भक्ति में लीन ये बाबा, बन गए नई पहचान। दोस्तो चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध धारी देवी मंदिर में इन दिनों भक्ति, आस्था और अनूठी साधना का अद्भुत समागम देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर सैकड़ों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर एक भक्त की अनोखी तपस्या और समर्पण लोगों को गहराई से प्रभावित कर रहा है।

दोस्तो मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी और जूना अखाड़ा से जुड़े बाबा नारायण गिरी इन दिनों धारी देवी मंदिर परिसर में विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उनकी भक्ति का स्वरूप इतना अनूठा है कि जो भी उन्हें देखता है, वो आश्चर्य और श्रद्धा से भर उठता है। दरअसल, दोस्तो बाबा ने अपने सिर पर जौ की हरियाली उगाई है, जिसे वे मां धारी देवी को समर्पित कर रहे हैं। बाबा नारायण गिरी ने बताते हैं कि इस साधना के पीछे उनकी गहरी आस्था और आत्मशुद्धि की भावना जुड़ी हुई है। उन्होंने अपने सिर पर पहले एक कपड़ा बांधा, फिर उसमें मिट्टी रखकर जौ के बीज बो दिए। दोस्तो आश्चर्यजनक रूप से ये बीज मात्र तीन दिनों में अंकुरित होकर हरी-भरी घास के रूप में उग आए। यह हरियाली उनके सिर पर एक जीवंत प्रतीक की तरह दिखाई दे रही है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कई लोग इसे सच्ची भक्ति और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। दोस्तो बताते हैं कि ये कोई पहली बार नहीं है, बल्कि हर वर्ष चैत्र नवरात्रि के दौरान वे इसी प्रकार अपने सिर पर जौ बोकर यह अनुष्ठान करते हैं। उनकी मानें तो जीवन में जाने-अनजाने में हुई गलतियों का प्रायश्चित करने और आत्मिक शुद्धि के लिए उन्होंने यह मार्ग अपनाया है। दोस्तो एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद उनका यह संकल्प और समर्पण लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

इन दिनों बाबा नारायण गिरी का वीडियो खूब छाया हुआ है, जिसमें उनकी इस अनोखी भक्ति को देखा जा सकता है। लोग इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं और उनकी श्रद्धा की सराहना कर रहे हैं। दोस्तो आपको बता दूं ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये मंदिर स्वयं में एक जागृत सिद्धपीठ माना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। दोस्तो इस प्राचीन सिद्धपीठ ‘धारी देवी’ मंदिर को ‘दक्षिणी काली माता’ के रूप में भी पूजा जाता है। माना जाता है कि मां धारी चारों धाम की रक्षा करती हैं। ये भी कहा जाता है कि मां धारी देवी दिन में 3 बार रूप बदलती हैं, जिसके तहत वो सुबह कन्या तो दोपहर में युवती और शाम को वृद्धा का रूप धारण कर दर्शन देती हैं। दोस्तो मां धारी देवी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु बाबा नारायण गिरी की इस अनूठी साधना को देखकर अभिभूत हो रहे हैं. कई श्रद्धालु उनके पास जाकर आशीर्वाद भी ले रहे हैं और उनके इस समर्पण को मां के प्रति सच्ची भक्ति का उदाहरण मान रहे हैं। इस तरह चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर बाबा नारायण गिरी की यह अनोखी भक्ति न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि सच्ची आस्था और पश्चाताप के साथ किया गया कोई भी कार्य ईश्वर तक अवश्य पहुंचता है।