Disaster Alert उत्तराखंड में आया भूकंप! | Garhwale Arth Quake | Uttarakhand News

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देवभूमि एक बार फिर दहल उठी, सुबह-सुबह गढ़वाल में धरती के अचानक कांपने से लोगों में दहशत फैल गई।क्या ये किसी बड़े खतरे का संकेत है, या फिर एक सामान्य भूकंपीय हलचल?लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है—हालांकि राहत की बात ये है कि अब तक किसीबड़े नुकसान की खबर नहीं है।लेकिन सवाल वही—क्या उत्तराखंड में खतरे की दस्तक फिर सुनाई दे रही है? दोस्तो उत्तराखंड से सबसे बड़ी खबर है क्यों ये जो हो रहा है ना रुक रुक कर कभी दिन तो कभी रात के अंधेर में क्या ये कोई बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है। ये सवाल मै इसलिए कर रहा हूं क्योंकि दोस्तो पौड़ी गढ़वाल जिले में दहशत से लोग भरे हुए हैं, जहां शनिवार सुबह भूकंप के दो झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। धरती के हल्के कंपन ने कई इलाकों में गहरी नींद में सोए लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया हालांकि राहत की बात ये रही कि दोनों ही झटकों की तीव्रता कम रही और अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई। दोस्तो जानकारी के मुताबिक, दिन की शुरुआत भूकंप के झटके के साथ हुई, जो सुबह 5:02 बजे दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर आफ सिस्मोलाजी के अनुसार इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.3 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था।

दोस्तो ये झटके ऋषिकेश से लगभग 47 किलोमीटर पूर्वव दिशा में महसूस किया गया। उस समय अधिकांश लोग घरों में सोए हुए थे, जिससे अचानक हुए कंपन ने उन्हें चौंका दिया। दोस्तो पहले झटके के करीब डेढ़ घंटे बाद सुबह 6:29 बजे एक और कंपन दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 3.6 रही। इसका केंद्र भी पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में ही पाया गया और गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही। अब दोस्तो लगातार दो झटकों के कारण लोगों में भय का माहौल बन गया, हालांकि अभी तक किसी तरह की क्षति की पुष्टि नहीं हुई। लेकिन एहतियाती तौर पर जिला प्रशासन ने सभी तहसील स्तर के अधिकारियों को भूकंप से हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया है। दोस्तो विशेषज्ञों का कहना है कि, उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय रूप से बेहद संवेदनशील है। यहां इस तरह के हल्के झटके भूगर्भीय गतिविधियों का सामान्य हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन बार-बार कंपन महसूस होना भविष्य में बड़े झटकों की संभावना की ओर भी संकेत करता है। इध दोस्तो प्रशासन साफ करता दिखाई दिया कि फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि घबराने के बजाय सतर्क रहें और अफवाहों से बचें। साथ ही दोस्तो विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि भूकंप के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें, इमारतों से दूर खुले स्थान की ओर जाएं और आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहें। इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि आपदा के समय जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है, लेकिन दोस्तो बीते कुछ वक्त को आप देखेंगे तो आपको उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे भूकंप के झटके कई बार महसूस हुए होंगे। और वो उन क्षेत्रों में जो भूकंप के लिहाज से बेहद ही संवदनशिल हैं।

उत्तराखंड की पहाड़ियों में अक्सर हल्के भूकंप आते रहते हैं, न जाने कितनी बार ऐसे धरती हिलती रहती है, लेकिन सवाल ये कि क्या कोई बड़ा खतरा भी इन झटकों के साथ आने वाला है वो इसलिए दोस्तो कि अकसर जिन्हें “सामान्य घटनाएँ” मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन क्या ये झटके भविष्य में आने वाले किसी बड़े भूकंप का संकेत हैं? राज्य के आपदा प्रबंधन केंद्र के तामाम बड़े अधिकारी ये मानते हैं कि उत्तराखंड की पहाड़ियों में बार-बार आने वाले हल्के भूकंपों को सामान्य घटनाएँ नहीं मानना चाहिए, बल्कि इन्हें एक बड़े भूकंप के संकेत के रूप में लेना चाहिए, जो हिमाचल प्रदेश , नेपाल और उत्तराखंड तक फैले हिमालयी क्षेत्र के मध्य भूकंपीय अंतराल में लंबे समय से अपेक्षित है। दोस्तो ये दावा इसलिए क्या जाता है क्योंकि उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में सन् 1803 में एक विनाशकारी भूकंप आया था और 200 साल बाद भी हिमालय क्षेत्र में अपार ऊर्जा मौजूद है। जानकार कहते हैं कि 200 से अधिक वर्षों में संचित यह दबी हुई ऊर्जा वैज्ञानिकों के बीच इस आशंका को जन्म दे रही है कि निकट भविष्य में हिमालयी क्षेत्र में, जिसमें उत्तराखंड भी शामिल है, एक बड़े भूकंप के रूप में यह ऊर्जा बाहर आ सकती है। इसके साथ ही दोस्तो एक और आशंका का एक अन्य कारण यह है कि हिमालयी मोर्चे पर स्थित 700 किलोमीटर लंबी भूकंपीय दरार, जो उत्तराखंड, पड़ोसी हिमाचल प्रदेश और नेपाल तक फैली हुई है, पिछले 200-500 वर्षों में किसी भी बड़े भूकंप से नहीं टूटी है। दोस्तो इधर उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्र एक बार फिर से बड़े भूकंप की आशंका के घेरे में हैं. हाल ही में देशभर के प्रमुख भूवैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह चिंता जाहिर की है कि हिमालय क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव से जबरदस्त ऊर्जा जमा हो रही है, जो भविष्य में कई बड़े तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप का कारण बन सकती है। यह चेतावनी कोई अटकल नहीं, बल्कि भूगर्भीय घटनाओं और छोटे-छोटे भूकंपों के लगातार बढ़ते पैटर्न पर आधारित है। पिछले छह महीनों में उत्तराखंड में 22 छोटे भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं, जिनकी तीव्रता 1.8 से 3.6 के बीच रही है। इन झटकों का केंद्र मुख्यतः चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी जिलों में रहा है तो दोस्तो क्या दोस्तो ये भूकंप की आहट है या कयामत की शुरुआत! क्या उत्तराखंड में छोटे झटके दे रहे हैं बड़ी तबाही का इशारा? ये सवाल आज ओर होने लगा है।