जिसे काली लड़की, सूखी कहकर देते थे ताने, अब फैशन आइकॉन बन कान्स तक पहुंचीं उत्तराखंड की डॉली

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Nainital News: लगन और परिश्रम से वक्त और किस्मत को कैसे पलटा जा सकता है इसकी जीवंत मिसाल है नैनीताल की बेटी डॉली सिंह। नैनीताल में रोजी रोटी के लिए परिवार के साथ कभी मोमबत्ती बना कर खर्च चलाने वाली डॉली आज देश की प्रमुख और लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर हैं। डॉली सिंह ने फ्रांस में चल रहे 76वें अंतरराष्ट्रीय कान फिल्म महोत्सव में रेड कार्पेट पर अपने फैशन का जलवा बिखेरा। डॉली ने फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम की जीनत अमान की पोशाक से प्रेरित ड्रेस पहनी। इसमें कोनिकल ब्लाउज के साथ आइवरी सारोंग-स्कर्ट शामिल थी। डॉल जैसी पोशाक में डॉली ने अपने लुक से जबरदस्त तारीफ बटोरी और उपस्थित लोगों ने देर तक स्टैंडिंग ओवेशन से उन्हें सराहा। डॉली ने इंस्टाग्राम पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा कि कान में रेड कार्पेट में वह बीते दौर के बॉलीवुड को सादर नमन करना चाहती थीं। जब अबू जानी, संदीप खोसला ने इस कोनिकल ब्लाउज का आइडिया दिया तो उन्होंने तुरंत इसे पसंद कर लिया।

कभी स्कूली दिनों में साथियों की ओर से सूखी डंडी, काली लड़की, हड्डियों की पोटली जैसे नामों से खिंचाई की जाने वाली डॉली एक बार एक स्कूल की पार्टी में सिर्फ इसलिए भाग नहीं ले सकी कि उसकी ड्रेस अध्यापकों को पसंद नहीं आई। वही डॉली आज विश्व स्तर पर फैशन आइकॉन और युवाओं की फैशन रोल मॉडल बन कर जलवे बिखेर रही हैं। एक सामान्य परिवार से निकलीं डॉली ने बगैर किसी ट्रेनिंग और गॉडफादर के सहयोग के मात्र 29 वर्ष की आयु में अपनी प्रतिभा, संघर्ष और लगन के बूते इंटरनेट, सोशल मीडिया और बॉलीवुड में एक असाधारण मुकाम बनाया है। डॉली के पिता राजकुमार और मां राजबाला नैनीताल मालरोड पर अपना बाजार नाम से फैंसी आइटम्स की दुकान चलाते हैं। राजू की मम्मी और ‘बुधवार’ के डॉली के अवतार से डॉली को इस कदर लोकप्रियता मिली कि नैनीताल आने वाले अनेक पर्यटक उसके पिता की दुकान तलाशते हुए आते हैं और वहां सेल्फी और फोटोग्राफ लेते हैं। पिता राजकुमार ने बताया कि डॉली ने यूट्यूब चैनल पर अपनी दुकान का एक वीडियो डाला था जिसे देखकर लोग वहां पहुंचने लगे।