हरक सिंह रावत का बीजेपी पर चंदा वार, 27 करोड़ का हिसाब दो। जनता जानना चाहती है सच किसने दिए करोड़ों? नाम बताओ, बताने आया हूं दगड़ियों क्या है हरक सिंह रावत का बीजेपी को नया चैलैंज कैसे बीजेपी बताएगी कहां से और किस किस से पैसा लिया। Uttarakhand Mining Policy उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गर्म है — और इस बार आग लगाई है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने। लगातार शांत बैठे सत्ता पक्ष को हरक सिंह ने अपने तीखे बयानों से झकझोर कर रख दिया है। मुद्दा है – 27 करोड़ का कथित पार्टी फंड, जो पहले 30 करोड़ बताया गया, और अब खुद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसे 27 करोड़ कह रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है – ये पैसा आया कहां से? और किसने दिया? पहले सुनिए पूर्व मख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को वो मान रहे हैं कि चंदा लिया गया हरक सिंह रावत का कहना है साफ है – अगर पैसे का लेनदेन ‘टेबल के नीचे’ नहीं हुआ, तो फिर पारदर्शिता क्यों नहीं? जनता यह जानना चाहती है कि बीजेपी को करोड़ों का चंदा देने वाले वो कारोबारी चेहरे कौन हैं, जो सत्ता के गलियारों में इतनी ताकत रखते हैं कि 25 करोड़ का लक्ष्य तय करने के बाद भी 27 करोड़ जुट जाते हैं। दगड़ियों हरक सिंह रावत ने सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
उनका सवाल है — “मुख्यमंत्री रहते हुए आपने खुद फंड इकट्ठा करने की बात कबूली थी, अब बताइए कि ये रकम किन स्रोतों से आई? इतना ही नहीं है हरक सिंह का बयान और भी गंभीर तब हो जाता है जब वो कहते हैं कि “आज मुझे कोई पांच लाख रुपये तक देने को तैयार नहीं, लेकिन बीजेपी को करोड़ों रुपये फटाफट चंदे में मिल जाते हैं। क्या ये कोई चमत्कार है या फिर सत्ता की ताकत का इस्तेमाल? क्या यह सिर्फ पार्टी फंड है, या फिर इसके पीछे सत्ता-संपर्क और सौदों का बड़ा खेल छुपा है? क्या खनन, शराब, जमीन और कॉन्ट्रैक्ट जैसे मसलों पर दानदाताओं को कुछ खास ‘सुविधाएं’ मिलीं? या फिर कुछ और खेल प्रदेश की जनता दगड़ियो ये जानना भी चाहती है। आप अपने लिए पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, चमक धमक, गाडि़या, आलिशान कार्यालय, कभी जनता की सुध भी ले लो। मैने कई जन समस्याओं को अपनी खबरों के मध्यम से जनता और सत्ता तक पहुंचाने का काम किया, लेकिन नहीं सबको अपनी-अपनी पड़ी है। पुल नल, सड़क, शिक्षा इलाज कई तरह की समस्याएं आज भी हैं।
खैर ये तो मै आगे करता रहुंगा सवाल लेकिन आज बता चंदे के खेल की हो रही है। उन्होंने कहा कि चंदे का पैसा यदि व्हाइट है तो फिर बीजेपी को दान देने वालों की पते समेत सूची सार्वजनिक करनी चाहिए. इस सूची को रामनगर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, कोटद्वार, देहरादून और ऋषिकेश के लोग देख सकेंगे और ये जान लेंगे कि यही वो दानदाता हैं, जिसने बीजेपी को चंदा दिया है. लोग इन दानदाताओं के पास जाकर संगठनों या स्वास्थ्य शिविरों के लिए आर्थिक रूप से दान ले सकते हैं। दगड़ियो सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब एक पूर्व मुख्यमंत्री ने खुद पैसे की बात मानी है, तो बीजेपी अब चुप क्यों है?क्या पार्टी अपने ‘दानदाताओं’ के नाम उजागर करने से डरती है?क्या यह धन राजनीति की पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है? हरक सिंह ने कहा है कि अगर जवाब नहीं मिला तो वे आगे और खुलासे करेंगे। उनका तेवर बता रहा है कि ये मामला यहीं नहीं रुकेगा। उन्होंने इशारों में कहा – “27 करोड़ की रकम अगर साफ-सुथरी है, तो फिर नाम बताने में क्या दिक्कत है?”उत्तराखंड की राजनीति अब इस मोड़ पर है, जहां जनता सिर्फ विकास के दावों से संतुष्ट नहीं है। लोग जानना चाहते हैं कि पार्टी फंड के नाम पर जुटाया गया पैसा कहां से आया, किसके इशारे पर आया और बदले में किसको क्या मिला।