दोहरी पेंशन का लाभ? घर-घर होगी पड़ताल!| Retired Employees Scam | Dehradun News | Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड में अब पेंशन को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है जिन रिटायर्ड कर्मचारियों को ईमानदारी और सेवा की मिसाल माना जाता था, अब उन्हीं पर दोहरी पेंशन लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार जांच कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घर-घर जाकर सच्चाई की पड़ताल होगी। क्या वाकई रिटायर्ड कर्मचारी दोहरी पेंशन का फायदा उठा रहे हैं? और अगर ऐसा है, तो सरकार उनके खिलाफ कितना बड़ा एक्शन लेने जा रही है? दोस्तो अपने उत्तराखंड में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक सरकारी विभाग से रिटायर्ड कर्मचारी दो-दो पेंशन का लाभ ले रहे हैं। यानी की एक तरफ तो उन्हें अपने विभाग से रिटायरमेंट की पेंशन मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे रिटायर्ड कर्मचारी समाज कल्याण विभाग की योजनाओं जैसे वृद्धावस्था और विधवा जैसी पेंशन का लाभ भी ले रहे हैं। इस तरह के मामले सामने आने के बाद समाज कल्याण के निदेशक की तरफ से जांच के आदेश दिए गए हैं। दोस्तो जब इस मालले तूल पकड़ा सवाल होने शुरु हुए कि कैसे ये खेल कुछ रिटायर कर्मचारी कर रहे हैं तो समाज कल्याण के निदेशक के आदेश पर अब ज़िलों में भी जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देहरादून जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर कल्याण ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। देहरादून जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर कल्याण के अनुसार देहरादून में ऐसे 126 मामले सामने आए हैं, जो दोहरी पेंशन यानी कि रिटायरमेंट और समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था या विधवा पेंशन का लाभ रहे हैं। इसके अलावा दोस्तो जिला समाज कल्याण ने साफ किया है कि देहरादून जिले में वृद्धावस्था पेंशन धारकों की संख्या 93 है तो वहीं विधवा पेंशन धारकों की संख्या 33 है। वो बताते हैं कि निदेशालय द्वारा भेजी गई फाइल का संज्ञान ले लिया गया है और जल्द ही सीडीओ कार्यालय द्वारा इन पेंशन धारकों की घर-घर जाकर वेरिफिकेशन और पड़ताल कर ली जाएगी। जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।

दोस्तो इसके अलावा ये बताया गया कि पेंशन धारकों के लिए जो मानक हैं, उनमें मासिक आय राजस्व विभाग से प्रमाणित मासिक आय ₹4000 होनी चाहिए और इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जाता है। दोस्तो दरअसल, समाज कल्याण विभाग ने वृद्धावस्था और विधवा पेंशन ले रहे 1377 रिटायर्ड कर्मचारियों की सूची जारी की है, जो सभी जिलों में भेजी गई है. इस संबंध में समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने सभी जिलाधिकारियों को जांच करते हुए कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा है। यहां आपको ये भी बता दूं कि समाज कल्याण निदेशालय द्वारा जिलों को भेजी गई 1377 पेंशन धारकों कि इस लिस्ट में से 314 पेंशनधारक ऐसे हैं, जिनकी समाज कल्याण से जाने वाली पेंशन पहले ही रोकी जा चुकी है तो वहीं अब 970 कर्मियों की पेंशन रोककर जिलों को इनकी जांच के निर्देश दिए गए है। अब आपको ये बताना चाहुंगा कि ये पूरा मामला कैसे सामने आया है। गौर कीजिएगा दोस्तो यह मामला तब सामने आया था जब महालेखाकार (लेखा परीक्षा) ने प्रदेश के पेंशन धारकों में रिटायर्ड कर्मचारियों के रिकॉर्ड खंगाले थे। इसमें देखा गया था कि 13 सौ से ज़्यादा ऐसे कर्मचारी हैं, जो कि समाज कल्याण विभाग से भी पेंशन का लाभ ले रहे हैं। इसके बाद महालेखाकार ने चीफ सेक्रेटरी और फाइनेंस सेक्रेटरी को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र भेजा था। अब पहली बार दोहरी पेंशन लेने वाले लोगों को लेकर मामला सामने आया था और इसी पर आगे कार्रवाई करते हुए अब समाज कल्याण विभाग द्वारा एक्शन लिया गया है।

दोस्तो, अब ज़रा ठहरिए और इस पूरे मामले को एक बड़े सवाल की तरह देखिए। सरकारी नौकरी, रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन और उसके साथ समाज कल्याण की योजनाओं का लाभ—अगर ये सब नियमों के खिलाफ हुआ है, तो ये सिर्फ गलती नहीं, बल्कि सिस्टम के साथ खुला खेल है। जिन योजनाओं का मकसद गरीब, बेसहारा बुज़ुर्गों और विधवाओं को सहारा देना था, अगर वही योजनाएं रिटायर्ड कर्मचारियों की जेब भरने का जरिया बन गईं, तो असली ज़रूरतमंद कहां जाएंगे?अब सरकार और समाज कल्याण विभाग ने साफ कर दिया है कि इस बार मामला फाइलों में दबेगा नहीं। 1377 नामों की सूची, 970 पेंशन रोकी गईं, घर-घर जाकर वेरिफिकेशन—ये सब इशारा है कि आने वाले दिनों में बड़ा एक्शन तय है। सवाल ये भी है कि अगर महालेखाकार की ऑडिट में ये गड़बड़ी सामने न आती, तो क्या ये खेल यूं ही चलता रहता?देहरादून में 126 मामले सामने आ चुके हैं, और बाकी जिलों में जांच अभी जारी है। यानी तस्वीर का पूरा सच अभी सामने आना बाकी है। जांच के बाद तय होगा कि कौन नियमों के दायरे में है और कौन सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठा रहा था। दोस्तो, ये मामला सिर्फ दोहरी पेंशन का नहीं है, ये भरोसे का मामला है। सरकार की योजनाओं पर भरोसा, सिस्टम की पारदर्शिता और उस आम आदमी के हक का भरोसा, जिसके लिए ये पेंशन बनाई गई थी। अब देखना ये है कि जांच के बाद कितनों से वसूली होगी, कितनों पर कार्रवाई होगी और क्या आगे ऐसे मामलों पर सच में लगाम लग पाएगी? ये सिर्फ खबर नहीं, सिस्टम की साख का सवाल है।