BJP Meeting Dushyant Gautam का फूल-माला से स्वागत | Ankita Bhandari Justice | Uttarakhand News

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दोस्तो उत्तराखंड की जमीन पर एक चेहरे के कई दिनों बाद कदम रखने से एक बार फिर हलचल मच चुकी है। दोस्तों, उत्तराखंड की राजनीति की एक तस्वीर पर फिर सवाल शुरू हो चुकाहै। कई दिनों के बाद बीजेपी के नेता दुष्यंत गौतम नजर आए, और पार्टी कार्यक्रम में उन्हें फूल-माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया, लेकिन जैसे ही विपक्ष ने अंकिता केस का जिक्र किया, माहौल में हल्की खिंचतान भी देखने को मिली। कैसे दुष्यंत गौतम की इस वापसी ने उत्तराखंड की राजनीतिक गलियों में हलचल मचा दी, पूरी खबर विस्तार से बताने जा रहा हूं। दोस्तो बीजेपी के नेताओँ ने हाल के दिनों में अपने प्रभारी का नाम लेना तक छोड़ दिया। कई बैठकें हुई, रणनीति बनी लेकिन बीजेपी का एक बड़ा केंद्रीय नेता जो कभी दिल्ली में कम उत्तराखंड में ज्यादा रहता था वो गायब। बीजेपी के पोस्टर बैनर तक से हटा दिया गया दुष्यंत गौतम का चेहरा या ये कहूं कहूं की बीजेपी को हटाना पड़ा था, लेकिन दोस्तो अब ऐसा क्या हो गया पोस्टर भी है। पोस्टर में चेहरा भी है दुष्यंत गौतम का और बैठक में हिस्सा तो लिया ही स्वागत ऐसा हुता है कि जैसे कुछ हुआ नहीं था लेकिन दोस्तो हुआ क्या था ये तो आप जानते ही हैं, लेकिन में अचानक दुष्यंत गौतम की उत्तराखंड एंट्री के बारे में बताता हूं।

दोस्तो लंबे समय बाद उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम फिर बीजेपी की बैठक में दिखाई दिए। वही दुष्यंत गौतम जिनका नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड में सामने आए ऑडियो में “VIP” के रूप में लिया गया था। उस बातचीत में सुरेश राठौर और उर्मिला के बीच यह ज़िक्र आया था। उसके बाद अचानक गौतम उत्तराखण्ड बीजेपी की बैठकों से गायब हो गए थे। लोग समझने लगे थे कि शायद जनता के आक्रोश और उत्तराखंड की बेटी के न्याय के सवाल को देखते हुए बीजेपी उन्हें उत्तराखंड प्रभारी पद से हटा देगी, लेकिन दोस्तो ऐसा कुछ नहीं किया बीजेपी वालाों ने रविवार को बैठक में मौजूदगी ने साफ कर दिया कि बीजेपी के लिए अंकिता भंडारी हत्याकांड कोई संवेदनशील मुद्दा नहीं है ये सवाल अब होने लगा है, विपक्ष पूछने लगा है। दोस्तो पहले कभी सुना था लोकतंत्र सत्ता से नहीं, लोकलज्जा से चलता है, लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबी पार्टीयों को अक्सर लगता है कि वो ही मालिक मल्लिकार हैं जनता तो गाजर मूली है। हां ये बात भी सच है कि सिर्फ बातें हुई। आरोप लगे लेकिन आरोप सिद्दी के लिए इंतजार करना पडेगा, लेकिन दोस्तो उत्तराखंड की जनता सब भूल जाएगी यहां भूल चुकी है। जैसा की तब हुआ था जब अंकिता हत्याकर दी गई थी। कुछ दिन खूब हो हल्ला उसके बाद सब अपने आप में मगन हो गए। क्या वैसा ही कुछ इस बार भी होने जा रहा है क्योंकि जांच का पता नहीं कब पूरी होगी। ये नहीं पता की वीआईपी सवाल जो साल साल से गूंज रहा है वो सामने आ भी पाएगा। ऐसे में उत्तराखंड के सियासी लोगोौं की पार्टियों की कोई जिम्मेंदारी नहीं बनती।

दोस्तो पार्टियों को सियासी लोगों को भरोसा है कि उत्तराखंड के लोग अपनी अस्मिता, अपनी बेटियों के सम्मान और न्याय से ज्यादा धार्मिक भावनाओं के आधार पर वोट दे देंगे यही उनकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। इसी लिए यहां न्याय से ज्यादा शोर होता है लेकिन दोस्तो दुष्यंत गौतम की उत्तराखंड वापसी के बाद कोई वैसा सवाल नहीं कर रहा है। जैसा कि तब कर रहा था जब उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर की कथित बातचीत में वीआईपी के तौर पर दुष्ंयतं गौतम का नाम लिया गया। वैसे दोस्तो उत्तराखंड की जनता ने हमेशा स्वाभिमान की राजनीति की है। पार्टियों का सियासी लोगों का पता नहीं दस्तो ये वही देवभूमि है जहाँ अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठती रही है। एक तस्वीर आज कुछ महिने पहले की थी जब पूरा पहाड़ मैदान अँकिता को न्याय को लेकर वीआईपी के मामले पर सड़क पर था। आज ये तस्वीर जहां बीजेपी की संगठनात्मक बैठक में दुष्यंत गौतम की मौजूदगी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचा। प्रदेश प्रभारी होने के बावजूद वे लंबे समय से उत्तराखंड की बैठकों से दूरी बनाए हुए थे, जसे लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल उठ रहे थे। शायद दूरी बनाना तब मजबूरी होगी क्योंकि उस वक्त ज्यादा चर्चा में आई जब उर्मिला सनावर ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित तौर पर दुष्यंत गौतम को ‘वीआईपी’ बताकर आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही दुष्यंत गौतम उत्तराखंड की राजनीतिक गतिविधियों से लगभग दूर दिखाई देने लगे थे। इसी बीच एक और घटनाक्रम ने अटकलों को हवा दी थी। जब नितिन नवीन उत्तराखंड दौरे पर आने वाले थे, तब बीजेपी प्रदेश कार्यालय के बाहर लगाया गया एक पोस्टर चर्चा में आ गया था।

दोस्तो पोस्टर में कई नेताओं की तस्वीरें थीं, लेकिन प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की फोटो गायब थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि कहीं बीजेपी दुष्यंत गौतम से दूरी तो नहीं बना रही। हालांकि अब इन अटकलों पर विराम लगता नजर आ रहा है। संगठनात्मक बैठक में दुष्यंत गौतम की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया है कि वे अभी भी पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद अजय भट्ट, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी मौजूद हैं, लेकिन उधर कांग्रेस महिला विंग ने इसे बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण बताते हूए अपनी सोसल मीडिया पोस्ट में तामम ट्विट और फोटोज को जोड़ कर लिख दिया। दुर्भाग्यपूर्ण बीते रोज़ Dushyant Kumar Gautam का भाजपा की बैठक में फूलों से स्वागत हुआ, मैं मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami जी से पूछना चाहती हूं कि आखिर उत्तराखंड की देवतुल्य और भोली भाली जनता को क्यों बेवकूफ बना रहे हो?क्यों हमारी आंखों में धूल झोंक रहे हो? CBI जांच किसकी करोगे अगर दुष्यंत को हार माला पहना रहे हो? दोस्तो विपक्ष और जनता के मन में सवाल अब भी कायम हैं। अंकिता भंडारी केस और “वीआईपी” चर्चा ने उनके नाम को विवादास्पद बना दिया था। ऐसे में इस स्वागत और सक्रियता ने राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, और सवाल उठते हैं कि क्या सत्ता और संवेदनशील मुद्दों के बीच संतुलन बनाए रखना संभव है? त्तराखंड की जनता की निगाहें अब जांच, न्याय और जवाबदेही पर हैं। सत्ता का खेल चलता रहेगा, लेकिन जनता की सत्य और न्याय की आवाज़ हमेशा सबसे आगे रहेगी।