जी हां दोस्तो उत्तराखंड के लंबे वक्त से संघर्षरत 2000 हजार से शिक्षकों की किस्मत बदलने वाली है। 14 साल से लंबित शिक्षक प्रमोशन विवाद पर अब बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार ने हाईकोर्ट से केस वापस लेने की तैयारी कर ली है, जिसके बाद करीब 2100 शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। कैसे मामले में आया नया मोड़ आया है। कैसा रहा शिक्षकों का संघर्ष बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो ये वही मामला है जो सालों से अटका हुआ था और जिस पर लगातार विवाद चलता रहा, लेकिन अब सरकार के इस कदम के बाद शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है। तो दोस्तो 2100 शिक्षकों के जल्द ही प्रमोशन होने वाले हैं। शिक्षक पदोन्नति से जुड़े विवाद में बड़ा निर्णय लेते हुए उत्तराखंड सरकार, हाईकोर्ट से वाद वापस लेने जा रही है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन के मुताबिक केस वापस लेने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन कर दिया है साथ ही बताया ये भी जा रहा है कि कुछ समय पहले ही शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने केस वापस लेने के निर्देश दिए थे उसी को देखते हुए शासन स्तर से तैयारियां शुरू कर दी गई थी। दोस्तो सरकार के इस निर्णय से शिक्षकों के 14 वर्ष से अटके प्रमोशन की राह खुलने की आस है यदि शिक्षक भी केस वापस लेते हैं तो 32 सौ से ज्यादा प्रमोशन की राह खुलेगी।
वहीं आपको बता दूं कि वर्तमान में 2100 शिक्षकों के प्रवक्ता कैडर में प्रमोशन लंबित हैं। इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य के 1200 और हाईस्कूल प्रधानाध्यापक के 800 पद रिक्त हैं। यदि इन सभी पदों में से आधे भी प्रमोशन से भर लिए जाते हैं तो इनकी संख्या भी लगभग एक हजार होगी।इधर, दोस्तो शिक्षा सचिव के मुताबिक प्रमोशन प्रकरण में दायर केस वापस लेने को लेकर न्याय विभाग से राय ली गई थी। लंबे विमर्श के बाद विभाग ने कोर्ट में पक्ष रखा है। सरकार चाहती है कि पात्र शिक्षकों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिले लेकिन दोस्तो क्या आप जानते हैं ये मामला कोर्ट कैसे पहुंचा था और कब से शिक्षक बनाम सरकार की ये लड़ाई चल रही है वो मै आपको बताता हूं मामला कुछ यू हैं। साल 1995 में तत्कालीन यूपी सरकार ने तदर्थ रूप से नियुक्त शिक्षकों को अक्तूबर 1990 से विनियमित करने का निर्णय लिया था। साल 2000 तक शिक्षकों को मौलिक नियुक्ति दी गई। तदर्थ शिक्षक 1990 से वरिष्ठता की मांग कर रहे हैं। सरकार ने 23 जुलाई 2019 को मंजूरी दे दी थी। बाद में बैकडेट से वरिष्ठता पर रोक लगा दी गई थी। वहीं दोस्तो इसके बाद लोक सेवा अभिकरण के फैसले के खिलाफ सरकार कोर्ट चली गई।
दोस्तो उत्तराखंड में तदर्थ विनियमित शिक्षकों को एक अक्तूबर 1990 से वरिष्ठता देने का फैसला अगर लागू किया जाता है तो भी अब इसका व्यापक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस श्रेणी में मौजूदा समय में 50 से भी कम शिक्षक कार्यरत हैं, अधिकांश सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अगर ये विवाद सुलझता है तो एलटी कैडर के 2100 शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता खुल जाएगा यदि शिक्षक अपने प्रकरण कोर्ट से वापस लेते हैं तो प्रमोशन की प्रक्रिया तत्काल शुरू हो सकती है। सरकार ने दावा किया है कि शिक्षकों की ओर से केस वापस लेने पर 24 घंटे के भीतर प्रमोशन कर दिए जाएंगे। तो दोस्तों, इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यही है कि सरकार के इस फैसले से लंबे समय से अटके प्रमोशन का रास्ता अब खुलता नजर आ रहा है। करीब 14 साल से जिस मुद्दे पर विवाद चल रहा था, उसे खत्म करने की दिशा में अब सरकार ने हाईकोर्ट से वाद वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो हजारों शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ मिल सकता है।अब सवाल ये भी उठता है कि चुनावी साल में इस फैसले का कितना राजनीतिक और प्रशासनिक असर देखने को मिलेगा, और क्या वाकई इतने लंबे इंतजार के बाद शिक्षकों को उनका हक समय पर मिल पाएगा।फिलहाल सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई और कोर्ट की प्रक्रिया पर टिकी है क्योंकि जो काम सालों से अटका था, वो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।