विराट हिंदू सम्मेलन में विवादित बयान से बवाल!। Uttarakhand News | Lal Baba Viral Video | Almora News

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक बयान ने सियासी और सामाजिक माहौल गरमा दिया है। विराट हिंदू सम्मेलन के मंच से दिए गए कथित भड़काऊ भाषण के बाद ‘लाल बाबा’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। Controversial statement at the Virat Hindu Conference मंच से दिया गया बयान— “जिहादी उत्तराखंड छोड़ दें, वरना जहां मिलोगे वहीं काटूंगा”— अब कानून के दायरे में आ चुका है। इस बयान के वायरल होते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। क्या यह सिर्फ एक उग्र भाषण था या फिर सामाजिक सौहार्द को चुनौती देने वाला गंभीर मामला? फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन इस बयान ने अल्मोड़ा से लेकर पूरे उत्तराखंड तक बहस छेड़ दी है। दोस्तो एक तरफ प्रदेश में डेमोग्रफिक बदलाव नई बहस चल पड़ी है। इस पर राजनीतिक और समाजिक स्तर पर चर्चा जोरों पर है, लेकिन दोस्तो इस बीच एक बायान आया। उत्तराखंड की सास्कृतिक नगरी अल्मोडा से वो भी एक बाबा का। जी हां दोस्तो उत्तारखंड के अल्मोड़ा जिले में आयोजित हिंदू सम्मेलन में लाल बाबा द्वारा मंच से विवादित टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर जमकर बाबा का वीडियो वायरल हो रहा है। कांग्रेस ने सवाल खड़े किये तो आयोजन समिति ने भी बाबा को नोटिस भेज दिया है। साथ ही लाल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है. बीते रविवार को हिन्दू सम्मेलन में बाब ने विशेष समुदाय पर टिप्पणी की थी।

कोतवाली अल्मोड़ा में मुकदमा दर्ज हुआ है, दोस्तो बीजेपी पूरे प्रदेश में हिंदू सम्मेलन कर रही है, लेकिन अल्मोड़ा के समकानी मैदान में हुए हिंदू सम्मेलन में लाल बाबा ने विशेष समुदाय के लिए टिप्पणी की और उन्हें उत्तराखंड नहीं छोड़ने पर काटने की धमकी दे डाली। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया वायरल हुआ तो आयोजन समिति ने भी बाबा को एक नोटिस जारी कर पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ दिया है। लाल बाबा आपने आप को सप्त ऋषि अखाड़े का महामंडेश्वर बताते हैं, जो जागेश्वर धाम में ही रहते हैं लेकिन उनका बयान मचा गया। वहीं इस पूरे विवाद में कांग्रेस भी कूद पड़ी है। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी बाबाओं का सम्मान करती है, लेकिन इस तरह की टिप्पणी महिलाओं के सामने करना ठीक नहीं है। इस पूरे मामले की निंदा की जानी चाहिए और ऐसे ही बाबा पर कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा और आरएसएस हिंदू को एक मंच लाने के लिए राज्य भर के सभी विधानसभा में हिंदू सम्मेलन कर रही है इन कार्यक्रम में लोग भी जुट रहे थे। लेकिन जैसे ही विशेष समुदाय के बारे में टिप्पणी करते हुए लाल बाबा ने मंच से बोलना शुरू किया तो सभी महिलाओं कि आंखें शर्म के मारे नीचे हो गयी। दोस्तो बाबा का बयान कि उन्हें रैली करनी पड़ी तो जहां-जहां वह समुदाय मिलेगा, वहां-वहां उन्हें “काटने” की बात कही। उन्होंने पुलिस-प्रशासन को भी अपनी व्यवस्था करने की चुनौती दी और कहा कि उन पर कितनी भी धाराएं लगें, उन्हें कोई चिंता नहीं है। इसके अलावा उन्होंने अशोभनीय टिप्पणियां भी कीं, जिससे कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और बच्चों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। इधर दोस्तो विवाद बढ़ने पर कार्यक्रम के संयोजक मनोज सनवाल ने कोतवाली में लाल बाबा के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया।

तहरीर में कहा गया है कि आयोजन समिति ने लाल बाबा को वेद-उपनिषदों के ज्ञाता मानकर मंच पर आमंत्रित किया था, लेकिन उनके बयान से सम्मेलन की गरिमा को ठेस पहुंची और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पैदा हुई। पुलिस ने आयोजकों की शिकायत पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है, वहीं प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है तो दोस्तों, अल्मोड़ा के समकानी मैदान से उठा यह विवाद अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून, राजनीति और सामाजिक सौहार्द—तीनों के केंद्र में आ खड़ा हुआ है। दोस्तो एक मंच से दिए गए उग्र और आपत्तिजनक बयान ने न केवल सम्मेलन की गरिमा पर सवाल खड़े किए, बल्कि प्रदेश की शांत छवि को भी चुनौती दी है। आयोजकों ने खुद तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है, पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और राजनीतिक दल भी खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। क्या अभिव्यक्ति की आड़ में इस तरह की भाषा को स्वीकार किया जा सकता है? क्या धार्मिक मंचों से दिए गए बयान समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर रहे हैं? फिलहाल प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन यह मामला साफ संकेत देता है कि संवेदनशील मुद्दों पर शब्दों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। देखना होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या यह प्रकरण प्रदेश में सामाजिक संतुलन को लेकर एक बड़ी सीख बनता है।