उत्तराखंड में कुदरत का कहर बरप रहा हैे, चमोली में भारी तबाही हुई है। यहां के नंदानगर में बादल फटा है। धुरमा गांव में आए पानी के सैलाब में कई लोग लापता है। वहीं मलबे से मासूम सहित दो महिलाओं को सुरक्षित बचा लिया गया है। Chamoli Nandanagar Disaster बादल फटने की घटना 17 सितंबर बुधवार की रात हुई। धुरमा गांव की तस्वीरे डराने वाली हैं, यह गांव मलबे में तब्दील हो गया है। मकान पानी में बह गए है। सब तरफ तबाही का मंजर है। इस आपदा ने सिर्फ जान-माल का नुकसान ही नहीं किया बल्कि कई परिवारों के अरमान भी मलबे और पानी में बह गए। जिस घर में पांच दिन बाद शादी की शहनाई बजने वाली थी वह अब मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है। बेटी की शादी की सारी तैयारियां, जेवरात और सामान सब कुछ मोक्ष गदेरे की बाढ़ में बह गया। सेरा गांव में महिपाल सिंह गुसांई के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनकी दूसरी बेटी नीमा की शादी 23 सितंबर को होनी तय है। घर में शादी की सारी तैयारियां हो चुकी थीं।
इसके लिए की गई तैयारी और जुटाया गया सामान मलबे में बह गया है। परिवार की खुशियां बिखर गई हैं। परिवार के सामने गुजर-बसर करने का संकट आ खड़ा हुआ है। गांव के महिपाल सिंह गुंसाई का मकान, गोशाला और घराट मोक्ष नदी के प्रचंड वेग में बह गया है। उनकी बेटी नीमा गुंसाई की 23 को शादी है। बरात विकासखंड पोखरी के कलसीर डांडों से आनी है। शादी के लिए एकत्रित किया गया सामान बह गया है। परिवार बेघर हैं। परिवार कृषि कार्य करता है। बेटी को विदा करने के लिए खेती-किसानी और मेहनत-मजदूरी से सामग्री और जेवरात जोड़े थे। घर में शादी की खुशियां थीं। मेहमानों के आने का क्रम शुरू हो गया था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि मोक्ष नदी के तेज बहाव में सभी उम्मीद बह जाएंगी। आपदा का मंजर ऐसा था कि परिवार के सदस्यों और मेहमानों ने किसी तरह जंगल में भागकर जान बचाई है। महिपाल की पत्नी देवेश्वरी देवी का कहना है कि बेटी की शादी के लिए उन्होंने पाई पाई जोड़कर रखा था, लेकिन आपदा सब कुछ बहा ले गई।