उत्तराखंड के बूढ़ा केदार में कुदरत का क़हर, आधी रात को फट गया बादल और सब कुछ बदल गया। दगड़ियों किसी को संभलने का मौका नहीं मिला, जब पहाड़ों ने ज़मीन निगल ली और ज़िंदगियाँ मलबे में दब गईं। Rudraprayag Cloud Burst बूढ़ा केदार की तस्वीर दिल को कंपा देने वाली है। टिहरी के बूढ़ा केदार में बादल फटने की भीषण आपदा — प्रकृति का कहर, क्या इंसानी लापरवाही की वजह से बढ़ी तबाही, ये सब कुछ इस वीडियो में मै आपके सामने लाने जा रहा हूं। दोस्तो धराली की आपदा में जो लोग लापता हैं, थराली में तबाही सब ने देखि और अब रूद्रप्रयाग के बाद टिहरी गढवाल में तबाही का मंजर दिखाने जा रहा हूं दगडड़ियों। टिहरी गढ़वाल के बूढ़ा केदार इलाके में जो हुआ, वह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण भी आप कह सकते हैं। आधी रात को अचानक फटा बादल, जिससे पहाड़ों ने मलबे की भारी बरसात कर दी। एक पल में ज़िंदगी थम सी गई, परिवार बिखर गए, सपने टूट गए और जो बच गए, वे सदमे में हैं, प्राकृतिक आपदा की चपेट में बूढ़ाकेदार, बाल गंगा नदी का कहर और बादल फटने से तबाही का ये मंजर बहुत कुछ कहता है। उत्तराखंड के टिहरी जनपद में स्थित बूढ़ाकेदार क्षेत्र एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है।
बीते 24 घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश ने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया है। बाल गंगा नदी का जलस्तर सामान्य से कहीं अधिक हो गया है और नदी उफान पर है। इसका प्रत्यक्ष असर आसपास के गांवों में साफ देखा जा सकता है, जहां कई घर, रास्ते और खेत इस आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। सबसे भयावह स्थिति बूढ़ाकेदार कस्बे में देखी गई, जहां बाल गंगा नदी की तेज धारा एक मकान को अपने साथ बहा ले गई। यह मकान नदी के ठीक किनारे स्थित था और लगातार बारिश के कारण जमीन की पकड़ कमजोर हो गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, मकान में एक परिवार रह रहा था, जिसने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। हालांकि, परिवार का सारा सामान और आशियाना पल भर में नदी में समा गया घटना के बाद क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल है, क्योंकि कई अन्य घर भी नदी के किनारे स्थित हैं और खतरे की जद में हैं। दगड़ियो इससे पहले वाले वीडियो में मैने आपको रुद्रप्रयाग की तबाही को बड़ी बारीकी से दिखाया था। वहीं बूढ़ाकेदार क्षेत्र के गेंवाली गांव में बादल फटने की घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। सुबह के समय अचानक हुई तेज बारिश के साथ बादल फटने से पूरे गांव में तबाही मच गई। करीब 10 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि बर्बाद हो गई है। खेतों की मिट्टी बह गई, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया कई जगहों पर पेयजल लाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है। गांव के मुख्य रास्ते और संपर्क मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। बादल फटने की इस घटना ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है।
बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग लगातार असुरक्षा की भावना से घिरे हुए दिखाई दिए, लोगों को डर है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो और भी बड़े नुकसान की आशंका है। इधर दगड़ियो आपदा की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए। राजस्व विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है, जो प्रभावित इलाकों में नुकसान का जायजा ले रही है और राहत कार्य की निगरानी कर रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमों को क्षेत्र में भेजा गया है ताकि किसी भी घायल या बीमार व्यक्ति का तुरंत उपचार हो सके। वहीं दोस्तो एक और जानकारी ये कि विद्युत विभाग को क्षेत्र में बाधित विद्युत आपूर्ति को पुनः बहाल करने की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं जल संस्थान और जल निगम की टीमें क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की मरम्मत का काम देख रही हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी टूटे हुए रास्तों और पुलियों की मरम्मत में जुटे हुए हैं ताकि आवागमन जल्द से जल्द सामान्य हो सके। वहीं, वेपकोस (WAPCOS) और पशु चिकित्सा विभाग की टीमों को भी आपात स्थिति के लिए तैनात किया गया है। पशु चिकित्सा टीमें गांव-गांव जाकर मवेशियों की स्थिति की जांच कर रही हैं और जरूरतमंदों को चिकित्सा सहायता प्रदान कर रही हैं। स्थानीय निवासी कहते हैं कि “हमने पहले भी बारिश देखी है लेकिन इस बार जो हुआ, वह विनाश था। खेत, रास्ते, मकान—सब खत्म हो गया, वहीं, ग्रामीण महिलाओं की माने तो कि बच्चों को स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं हो रही, रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं और हर समय डर बना हुआ है।
जब जगड़ियों एसी आसमानी आफत आती है उस वक्त प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। टिहरी के जिलाधिकारी बताते हैं कि वो लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित इलाकों में सभी आवश्यक विभागों की टीमें भेज दी गई हैं। प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की बहाली है। जरूरत पड़ने पर और टीमें भेजी जाएंगी। ये बादल फटने और तबाही की बढती घटनाएं एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हम पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के लिए पर्याप्त रूप से तैयार हैं? हर साल मानसून के दौरान इस प्रकार की आपदाएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कदम बहुत धीमे दिखाई देते हैं। ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित निर्माण, नदी किनारे के गांवों का पुनर्वास और आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना अब समय की मांग है। दगड़ियों बूढ़ाकेदार और रूद्रप्रयाग के तमाम गांवों की ये घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, यह एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन, असंतुलित विकास और कमजोर ढांचागत योजनाएं इन आपदाओं की गंभीरता को बढ़ा रही हैं। जरूरत है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर एक स्थायी और मजबूत आपदा प्रबंधन रणनीति विकसित करें ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से लोगों की जान-माल की रक्षा की जा सके। दोस्तो ये घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस संकट का परिणाम है जिसकी चेतावनी हम वर्षों से सुनते आ रहे हैं। भारी बारिश और बादल फटने की घटनाएं किसी अनहोनी की तरह अचानक नहीं होतीं ये होते हैं जब प्रकृति हमें बार-बार चेतावनी देती है, पर हम कान नहीं देते। बूढ़ा केदार में हुई यह तबाही हमारी नाकामी की हकीकत को बयां करती है हमें सचेत रहने और समय रहते तैयारी करने में फेल साबित करती है। दगड़ियों जब ये संकट हमारे दरवाज़े पर दस्तक दे रहा था, तब क्या प्रशासन ने पर्याप्त तैयारी की? क्या पहले से प्रभावी बचाव और राहत योजनाएं बनाई गई थीं? या फिर ये सब केवल दिखावा था? स्थानीय लोग कहते हैं कि चेतावनी मिलने के बावजूद सही दिशा-निर्देश और संसाधन नहीं मिले। अफसर सिर्फ दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट बनाते रहे, जबकि यहाँ जिंदगी दांव पर थी। सवाल बहुतेरे हैं दगड़ियो जवाब तो सिर्फ तबाही के रूम में ही हमारे आपके सामने आता है।