Sitarganj खनन माफिया के हौसले बुलंद? | CM Dhami | Mining Mafia | Uttarakhand News

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उत्तराखंड में सनसनीखेज घटना बेखौफ खनन माफिया ने ट्रैक्टर से वन दारोगा और कर्मियों की जान लेने की कोशिश की। क्या वाकई हौसले इतने बुलंद हैं कि कानून को दरकिनार किया जा रहा है? कैसे नदी के बीचो बीच एक खौफनाक मुठभेड़ हो गई। बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो आज से लगभग एक साल पहले देश की संसद में बजट सत्र के दौरान बीजेपी के सांसद ने प्रदेश में अवैध खनन को लेकर बड़ी चिंता जाहिर की थी तब ये लगा कि प्रदेश में बीजेपी की सरकार केन्द्र में बीजेपी की सरकार मामला उठने वाले बीजेपी के सांसद तो शायद त्रिवेंद्र सिंह रावत की चिंता चुनौती में नहीं बदलेगी लेकिन क्या कोई बदलाव हुआ। अगर हां तो तो फिर ये तस्वीर क्या कह रही है। प्रदेश में खनन माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सितारगंज की रनसाली वन रेंज में अवैध खनन रोकने गए वन दारोगा और वनकर्मियों को खनन माफियाओं ने ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया। जब वो इस प्रयास में कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने वन दारोगा और वनकर्मियों की मौके पर जमकर धुनाई कर दी।

दोस्तो इस घटनाक्रम के बाद वन विभाग के दारोगा की तहरीर पर सितारगंज पुलिस ने साधुनगर निवासी राजकुमार समेत तीन लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है। वहीं घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। दरअसल दोस्तो उधम सिंह नगर के सितारगंज के रनसाली रेंज में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गश्त कर रही वन विभाग की टीम पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार वन दारोगा नंद किशोर पांडे, वन आरक्षी शक्ति सिंह और वन बीट अधिकारी भूपेंद्र कुमार के साथ आरक्षित वन क्षेत्र में गश्त कर रहे थे, जब गश्त टीम कैलाश नदी किनारे पर पहुंची तो आरक्षित वन क्षेत्र से तीन ट्रेक्टर ट्राली में अवैध खनन सामग्री भरी जा रही थी। वन दारोगा ने खनन माफियाओं से कागज दिखाने को कहा तो वो टीम को कागज नहीं दिखा पाए। जिसके बाद जबरन खनन माफिया उप खनिज से भरे ट्रैक्टर ट्रालियों को अपने साथ ले जाने लगे। वन दारोगा एवं वन कर्मियों द्वारा रोकने पर साधुनगर के रहने वाले खनन माफियाओं ने वन दारोगा समेत टीम के साथ अभद्रता गाली गलौज एवं मारपीट शुरू कर दी। वन दारोगा को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया गया। इतना ही खनन माफियाओं ने वन दारोगा समेत वनकर्मियों से मारपीट शुरू कर दी। जिसका वीडियो वन कर्मियों द्वारा बनाया गया। वहीं वन दारोगा की तहरीर के आधार पर सितारगंज पुलिस ने आरोपी राजकुमार समेत कुल तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दोस्तो वन कर्मियों से खनन माफियाओं का मारपीट अभद्रता का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

गौर हो कि ये पूरी घटना सितारगंज के कैलाश नदी क्षेत्र की है, यहां घटना अवैध खनन कर रहे खनन माफियाओं को रोकने के दौरान ये घटना घटित हुई। वहीं आपको ये बता दूं कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार हो रहे अवैध खनन पर अपनी चिंता जाहिर की है। वो भी ससंद में एक साल हो गया उस बात को लेकरिन आज भी स्थिति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। एक तरफ वो संसद में दिया गया बयान और दूसरी तरफ आज की ये तस्वीर मुंह चीढाने का काम कर ही। ये आज की तस्वीर है लेकिन दोस्तो तब त्रिवेंद्र सिंह रावत ने न सिर्फ अवैध खनन पर अपनी चिंता जाहिर, बल्कि उत्तराखंड में किस तरह से प्रशासन की मिली भगत से अवैध खनन कर नदियों का सीना चीरा जा रहा है, उसका भी जिक्र किया। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सदन में जिस तरह के अवैध खनन का मुद्दा उठाया, उसने शासन-प्रशासन के दावों पर सवाल जरूर खड़े किए है, जिसमें प्रशासन अवैध खनन पर लगाम लगाने की बात करता है। दोस्तों, ये केवल एक घटना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में अवैध खनन की लगातार बढ़ती चुनौती का सच है। संसद में उठाई गई चेतावनी और आज की तस्वीर—दोनों हमें यही बता रही हैं कि कानून और प्रशासन के बीच की खाई अब भी बरकरार है। वन दारोगा और कर्मियों पर ट्रैक्टर से हमला, मारपीट और अभद्रता ने केवल उनके साहस को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि खनन माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं। क्या प्रशासन और सरकार इस खतरे को गंभीरता से लेंगी और अवैध खनन पर लगाम लगाएंगी, या फिर खनन माफियाओं की यह चुनौती और बढ़ती जाएगी? उत्तराखंड की नदियों, वन क्षेत्र और वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए जवाब अब इंतजार कर रहा है।